जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों को लेकर बयानबाजी शुरू हो गई है. कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता सौरव दास ने इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट के रुख और केंद्र सरकार की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
सौरभ दास ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की है कि कुछ परिस्थितियों में पैलेट गन का इस्तेमाल किया जा सकता है. उन्होंने पूछा, 'सबसे पहली बात तो ये है कि क्या 20 जुलाई को शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने ऐसे असाधारण हालात पैदा कर दिए थे? वहां ऐसी कोई स्थिति नहीं थी कि पैलेट गन का इस्तेमाल किया जाता.'
दास ने आगे मांग की कि सुप्रीम कोर्ट को इस बात की बारीकी से जांच करनी चाहिए थी कि क्या हालात ऐसे कदम को सही ठहराते हैं, जिसकी वजह से एक व्यक्ति को अपनी आंखों की रोशनी गंवानी पड़ी.
'शांति से प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ पैलेट गन...'
CJP प्रवक्ता ने कहा, 'दूसरा पॉइंट ये है कि क्या किसी भी हालात में शांति से प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ पैलेट गन का इस्तेमाल किया जा सकता है?... आखिर में, होम मिनिस्टर ही सुपरविजन और ऑर्डर जारी करने के लिए जिम्मेदार थे... सुप्रीम कोर्ट को भी इन मामलों पर गंभीरता से और सख्ती से विचार करने की जरूरत है, न कि सिर्फ रबर-स्टैंपिंग करने या ऐसे कदमों का समर्थन करने की.'
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संसद में हो जवाबदेही तय
विपक्ष की भूमिका को के बारे में बात करते हुए दास ने उन्होंने कहा कि विपक्ष अपना काम कर रहा है. विपक्ष का काम सवाल पूछना और सरकार को जवाबदेह ठहराना ही है. उन्होंने कहा, 'मैंने देखा कि संसद में चर्चा चल रही थी. इस बात पर चर्चा होनी चाहिए कि 20 जुलाई को आदेश किसने दिए थे? प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस के रवैये और उन पर की गई बर्बरता का जवाब कौन देगा? स्वाभाविक रूप से, गृह मंत्री को इस मामले पर जवाब देना चाहिए.'
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