ग्राउंड रिपोर्ट: सुसाइड या साजिश? अफवाह, सियासत और पत्थरबाजी से जंग का मैदान बना गाजीपुर का कटारिया गांव

गाजीपुर के कटारिया गांव में हुई हिंसा की वजह आत्महत्या को लेकर फैली अफवाहें और जातीय तनाव बताया जा रहा है. इस पूरी घटना ने गांव में डर का माहौल पैदा कर दिया है. पुलिस ने 47 कार्यकर्ताओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है और 10 को गिरफ्तार भी किया है.

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कटारिया में जमकर पत्थरबाजी हुई थी. (Photo- ITGD) कटारिया में जमकर पत्थरबाजी हुई थी. (Photo- ITGD)

आशीष श्रीवास्तव

  • लखनऊ,
  • 24 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 7:08 AM IST

कटारिया… गाजीपुर का एक छोटा सा गांव, लेकिन उस दिन यहां सिर्फ सन्नाटा नहीं था, एक दबा हुआ डर, एक अनकही बेचैनी हर गली में महसूस हो रही थी. जैसे ही मैं गांव में दाखिल हुआ, सबसे पहले नजर पड़ी पुलिस के भारी बंदोबस्त पर. पूरा गांव मानो छावनी में तब्दील हो चुका था.

सड़कें खाली थीं, लेकिन खिड़कियों और दरवाजों के पीछे से झांकती आंखें बहुत कुछ कह रही थीं. हाथ में माइक और कैमरा लेकर जैसे ही हम आगे बढ़े, कुछ लोग धीरे-धीरे बाहर आए. बातचीत शुरू हुई तो एक अजीब सी कहानी सामने आने लगी.

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गांव वालों का दावा था कि बाहरी लोग, समाजवादी पार्टी के समर्थक, अचानक गांव में घुस आए और माहौल बिगाड़ दिया. लेकिन सवाल ये था कि पहचान कैसे? जवाब मिला- 'हम जानते हैं, ये सब पहले से तय था.' इस जवाब में यकीन कम, लेकिन डर ज्यादा महसूस हुआ.

गांव में फैली अफवाहें

मनोहर नाम का एक शख्स आगे आया. उन्होंने जो कहा, वो और भी चौंकाने वाला था- 'लड़की ने सुसाइड किया है, ये पुलिस ने बताया है. पोस्टमार्टम और सीसीटीवी में कुछ नहीं मिला.' एक आम ग्रामीण के मुंह से इतनी तकनीकी जानकारी सुनकर साफ लगा कि गांव में सिर्फ घटना नहीं, जानकारी भी तेजी से सबके जहन में थी .

जैसे-जैसे हम आगे बढ़े, पुलिस के दावे और गांव की कहानियां एक-दूसरे से टकराने लगीं. एसपी ईराज राजा ने बताया,ये पूरा घटनाक्रम अचानक नहीं था. मृतका निशा की मौत के बाद जहां एक तरफ परिवार ने गैंगरेप की बात से इनकार किया, वहीं दूसरी तरफ सोशल मीडिया पर इसे जातीय रंग देकर फैलाया गया.

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एक लोकल यूट्यूबर और कुछ स्थानीय नेताओं जैसे अनिल यादव के जरिए ये नैरेटिव खड़ा किया गया कि 'ओबीसी समाज की बेटी के साथ अत्याचार हुआ है.'

समाजवादी पार्टी पर आरोप

फिर जो हुआ, वो सिर्फ विरोध नहीं था, बल्कि एक सुनियोजित टकराव था. समाजवादी पार्टी का 15 लोगों का डेलिगेशन बताया गया, लेकिन पहुंचे 300-400 लोग. पुलिस ने अंबेडकर चौक पर रोकने की कोशिश की, लेकिन भीड़ का इरादा साफ था. गांव वालों के मुताबिक, 'पहला पत्थर उधर से आया और फिर देखते ही देखते लाठी, डंडे और पत्थरों की बारिश शुरू हो गई.'

मैं उन गलियों में भी गया जहां अब भी टूटे ईंट-पत्थर पड़े थे. मानो कुछ देर पहले ही यहां हिंसा थमी हो. लेकिन जब लोगों से पूछा, तो ज्यादातर ने चुप्पी साध ली. 'हम वहां नहीं थे… हमने कुछ नहीं देखा…' हर जवाब एक जैसा था और डर अब भी जिंदा था.

निशा की मौत पर सवाल

इस पूरी कहानी में सबसे उलझा हुआ हिस्सा था- मौत का सच. पुलिस कहती है कि निशा ने आत्महत्या की आखिरी कॉल, सीसीटीवी, पोस्टमार्टम- सब उसी ओर इशारा करते हैं. लेकिन सवाल यहीं है- अगर ये सुसाइड था, तो फिर गैंगरेप और हत्या की कहानी इतनी तेजी से कैसे फैली? किसने इसे हवा दी? और क्यों? जिसका जवाब समाजवादी पार्टी के सपोर्टर थे जो हिंसा को फैलाने की कोशिश कर रहे थे. जिसका पर्दाफाश गाजीपुर SP ने किया.

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परिवार की अपनी पीड़ा है. मां आरोप लगाती है, प्रेम संबंध की कड़ी जुड़ती है. हरि ओम पाण्डेय शामिल है, उसका दोस्त मित्र अभिषेक पांडे शामिल है. लेकिन इन सबके बीच जो सबसे खतरनाक चीज दिखती है, वो है- अफवाह और उसे हथियार बनाकर खड़ा किया गया गुस्सा. जो आपस में ब्राह्मणों और ठाकुरों के साथ यादव के बीच टकराव के रूप में देखने को मिला.

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कटारिया में उस दिन सिर्फ पत्थर नहीं चले थे… यहां भरोसा टूटा था, सच और झूठ की लड़ाई हुई थी. एक गांव को मोहरा बनाकर बड़ी सियासत खेलने की कोशिश की गई थी. पुलिस ने अपनी पीठ थपथपाते हुए कहा हिंसा को रोक लिया गया.

पुलिस की गिरफ्त में 10 आरोपी

पुलिस ने उपद्रव का खुलासा किया और 47 समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं के खिलाफ मुकदमा लिखकर 10 को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. जबकि 200 से ऊपर अज्ञात के घर पर दबिश दी जा रही है. पुलिस ने बताया कि सुनियोजित दंगा भड़काने की कोशिश की गई. जिसमें सपा ने जबरदस्ती खबर को हवा दी और अपने समर्थकों के साथ ईंट-पत्थर चलाए.

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