गाजीपुर के करंडा थाना क्षेत्र स्थित कटरिया गांव में 22 अप्रैल को निशा विश्वकर्मा हत्याकांड के बाद भारी हिंसा भड़क गई. समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष गोपाल यादव और विधायकों का डेलिगेशन पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचा था. पुलिस ने केवल 15 लोगों को अनुमति दी थी, लेकिन करीब 250 समर्थकों की भीड़ जबरन गांव में घुसने लगी. ग्रामीणों ने अवांछनीय तत्वों की आशंका जताते हुए उन्हें रोका, जिसके बाद दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए. देखते ही देखते पथराव शुरू हो गया, जिसमें थानाध्यक्ष और कई पुलिसकर्मी घायल हुए. पुलिस ने अब 40 नामजद और 200 अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है.
धरने के दौरान अचानक मची भगदड़ और पथराव
सपा विधायक और कार्यकर्ता गांव के बाहर धरने पर बैठ गए थे, जिसके बाद पुलिस ने बीच-बचाव कर पीड़ित परिवार को वहीं बुलाकर मुलाकात करवाई. लेकिन मुलाकात के दौरान ही माहौल बिगड़ गया और 'जान से मारो' जैसे नारों के बीच पत्थरबाजी शुरू हो गई. सपा समर्थकों पर आरोप है कि उन्होंने ईंट-पत्थर और लाठी-डंडों से हमला किया. इस हिंसक झड़प में स्थानीय युवक अभिनंदन और एक महिला के साथ कई पुलिसकर्मी चोटिल हो गए.
पुलिस प्रशासन और सपा के अपने-अपने दावे
सपा प्रवक्ता शौर्या सिंह ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव के निर्देश पर पहुंचे डेलिगेशन को पुलिस का सहयोग नहीं मिला. वहीं, एडिशनल एसपी राकेश कुमार मिश्रा ने बताया कि पीड़ित परिवार पुलिस कार्रवाई से संतुष्ट था, लेकिन बाहरी भीड़ ने माहौल खराब किया. पुलिस के मुताबिक, भीड़ में शामिल अवांछनीय तत्वों ने कानून-व्यवस्था को चुनौती दी. घटना के बाद गांव में दहशत का माहौल है, दुकानें बंद हो गईं और लोग घरों में दुबक गए हैं.
10 लोग हिरासत में, जांच और फोर्स तैनात
निशा का शव 15 अप्रैल को गंगा किनारे मिला था, जिसके आरोपी हरिओम पांडेय को पुलिस पहले ही जेल भेज चुकी है. पीड़िता के पिता ने घटना को लेकर अफवाहें न फैलाने की अपील की है. फिलहाल, पुलिस ने 10 लोगों को हिरासत में लिया है और बाकी आरोपियों की तलाश के लिए दबिश दी जा रही है. इलाके में शांति बनाए रखने के लिए कई थानों की फोर्स तैनात की गई है और स्थिति पर पैनी नजर रखी जा रही है.
सपा मुखिया का बयान
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने गाजीपुर के कटारिया गांव में पार्टी प्रतिनिधिमंडल और पुलिस पर हुए हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है. उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता पोषित 'वर्चस्ववादी' तत्वों और ग्राम प्रधान ने पूर्व मंत्री राम आसरे विश्वकर्मा सहित सपा कार्यकर्ताओं पर प्राणघातक हमला किया. अखिलेश ने इसे 'पीडीए' (95% आबादी) पर हमला बताते हुए दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की. उन्होंने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश अराजकता के दौर से गुजर रहा है और राज्य में न गांव सुरक्षित हैं, न शहर.
फिलहाल, गाजीपुर पुलिस ने हिंसा मामले में गिरफ्तार 10 नामजद आरोपियों को 10 दिन की पुलिस रिमांड पर लिया है. आरोप है कि इन लोगों ने समाजवादी पार्टी के समर्थकों पर ईंट-पत्थर चलाए थे. घटना के बाद इलाके में तनाव की स्थिति बनी हुई है और पुलिस सतर्कता बरत रही है. पुलिस अब रिमांड के दौरान आरोपियों से पूछताछ कर घटना की साजिश और अन्य शामिल लोगों की जानकारी जुटा रही है.
आशीष श्रीवास्तव