'भारतीय कानून मानने पर ही मिलेगा मौका', मस्क की स्टारलिंक को केंद्र की दो टूक

एलन मस्क की स्टारलिंक को भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू करने के लिए अभी सरकारी मंजूरी नहीं मिली है. सरकार चाहती है कि कंपनी सुरक्षा से जुड़ी शर्तें पूरी करे और भारत में बेस स्टेशन बनाए. केंद्र ने साफ किया है कि भारतीय कानूनों का पालन किए बिना देश में कारोबार की इजाजत नहीं मिलेगी.

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मस्क की कंपनी को मंजूरी का इंतजार. (File Photo) मस्क की कंपनी को मंजूरी का इंतजार. (File Photo)

पीयूष मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 16 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 11:59 PM IST

एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू करना चाहती है, लेकिन अभी उसे सरकारी मंजूरी का इंतजार है. इसकी वजह सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं और भारत में बेस स्टेशन बनाने की शर्त है. केंद्र का साफ कहना है कि देश में कारोबार करने वाली हर कंपनी को भारतीय कानून मानने होंगे. इन शर्तों को पूरा किए बिना स्टारलिंक भारत में अपनी सेवा शुरू नहीं कर सकेगी.

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केंद्र सरकार के एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा, "हमारा रुख शुरुआत से साफ है. जो भी भारतीय कानून का पालन नहीं करेगा, उसे भारत में कारोबार करने की इजाजत नहीं दी जाएगी." अधिकारी के मुताबिक, स्टारलिंक को भारत में बेस स्टेशन बनाने की शर्त भी पूरी करनी होगी.

भारत में बेस स्टेशन बनाने की शर्त क्यों?

स्टारलिंक सैटेलाइट के जरिए इंटरनेट सेवा देती है. इसका मकसद उन इलाकों तक भी इंटरनेट पहुंचाना है, जहां सामान्य मोबाइल नेटवर्क या केबल के जरिए इंटरनेट पहुंचाना मुश्किल होता है. इस सेवा को भारत में शुरू करने के लिए सरकार चाहती है कि कंपनी देश के भीतर बेस स्टेशन बनाए. ये स्टेशन इंटरनेट सेवा से जुड़े नेटवर्क का अहम हिस्सा होते हैं. इनके जरिए सैटेलाइट से मिलने वाली कनेक्टिविटी को स्थानीय नेटवर्क से जोड़ने में मदद मिलती है.

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रिपोर्ट्स के मुताबिक, देश में जरूरी तकनीकी व्यवस्था होने से नियमों का पालन कराने और सुरक्षा से जुड़ी शर्तों पर नजर रखने में मदद मिलेगी. सूत्रों के अनुसार, स्टारलिंक ने अभी तक भारत में बेस स्टेशन बनाने की इस शर्त पर सहमति नहीं दी है. यही उसकी मंजूरी की राह में बड़ी अड़चन बनी हुई है.

सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं भी दूर करनी होंगी

बेस स्टेशन के अलावा सरकार चाहती है कि स्टारलिंक सुरक्षा से जुड़ी सभी जरूरी शर्तें पूरी करे. सैटेलाइट के जरिए चलने वाली इंटरनेट सेवा में नेटवर्क और उपकरण अलग-अलग जगहों से जुड़े हो सकते हैं. इसलिए सरकार चाहती है कि भारत में सेवा शुरू होने से पहले सुरक्षा के सभी जरूरी इंतजाम पूरे हों. सरकार ने साफ किया है कि उसे स्टारलिंक के भारत में कारोबार शुरू करने पर आपत्ति नहीं है. लेकिन इसके लिए कंपनी को सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को दूर करना होगा और देश में जरूरी ढांचा बनाने पर सहमत होना होगा.

स्टारलिंक के लिए भारत क्यों अहम है?

स्टारलिंक, स्पेसएक्स की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा है. इसके जरिए दूर-दराज के इलाकों में भी तेज इंटरनेट पहुंचाने की संभावना है. भारत में ऐसे कई क्षेत्र हैं, जहां सामान्य नेटवर्क पहुंचाना चुनौती बना रहता है. ऐसे में सैटेलाइट इंटरनेट लोगों के लिए एक विकल्प बन सकता है.

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हालांकि, भारत में सेवा शुरू करने के लिए कंपनी को जरूरी सरकारी मंजूरी लेनी होगी. फिलहाल सुरक्षा से जुड़ी शर्तों और देश में बेस स्टेशन बनाने पर सहमति का इंतजार है. इन मुद्दों का समाधान होने के बाद ही स्टारलिंक भारतीय ग्राहकों को अपनी सेवा दे सकेगी.
 

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