कांग्रेस नेता सैम पित्रोदा ने एक बार फिर अपने बयान से चर्चा छेड़ दी है. उन्होंने कहा है कि देश में धर्म और मंदिरों को लेकर जो लगातार बहस चल रही है, वह भारत के भविष्य के लिए सही रास्ता नहीं है. पित्रोदा के मुताबिक कुछ लोग नफरत और धार्मिक मतभेदों को बढ़ावा दे रहे हैं और इसी वजह से शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और विज्ञान जैसे असली मुद्दे पीछे छूट जाते हैं. उन्होंने "राम भगवान" और "हनुमान" का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसी बातों पर अटकी बहस युवाओं को सही दिशा नहीं दे सकती.
पित्रोदा ने अपने बयान में कहा कि भारत का भविष्य तर्क और वैज्ञानिक सोच में है. उनके अनुसार, देश को आगे बढ़ने के लिए तार्किक और विवेकपूर्ण सोच की जरूरत है, न कि धर्म और मंदिरों को लेकर होने वाली रोजाना की बहस की. उन्होंने यह भी कहा कि भारत का भविष्य दूसरे लोगों के प्रति सम्मान और इंसानी गरिमा में छिपा है. साथ ही उन्होंने बातचीत में शालीनता और महिलाओं के सम्मान पर भी जोर दिया.
पित्रोदा ने कहा कि देश में बच्चों की चिंता, अच्छी और सस्ती शिक्षा, अच्छी और सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं, साफ पानी, बेहतर पर्यावरण और पर्याप्त ऊर्जा जैसे मुद्दों पर बात होनी चाहिए. उनका कहना है कि यही वे असली समस्याएं हैं जिन पर राष्ट्रीय स्तर पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए. लेकिन दुख की बात यह है कि इन मुद्दों पर बातचीत बहुत कम होती है.
यह भी पढ़ें: EXCLUSIVE: 'राहुल गांधी पर विदेश में नजर रखी जाती है', सैम पित्रोदा का केंद्र सरकार पर बड़ा आरोप
अपने बयान में पित्रोदा ने यह भी कहा कि देश की बहस अक्सर "तू-तू मैं-मैं" यानी एक-दूसरे पर आरोप लगाने में ही उलझी रहती है. उन्होंने कहा कि बहस इस बात पर आकर रुक जाती है कि किसने क्या कहा, राम भगवान ने क्या कहा या हनुमान ने क्या कहा. उनके मुताबिक यह तरीका देश की युवा पीढ़ी को सही दिशा दिखाने के लिए ठीक नहीं है.
पित्रोदा ने युवाओं से अपील की कि वे आगे आएं और देश के असली भविष्य के बारे में सोचें. उनका मानना है कि जब तक असली मुद्दों पर बात नहीं होगी, तब तक देश का सही विकास मुश्किल है. यह बयान एक बार फिर राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है, क्योंकि इसमें धार्मिक शख्सियतों का सीधा उल्लेख किया गया है.
पीयूष मिश्रा