कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने जनगणना 2027 के लिए कर्मचारियों की पात्रता सूची बढ़ाने के फैसले पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि इस बदलाव के पीछे RSS-BJP से जुड़े हजारों कार्यकर्ताओं को रोजगार देने की मंशा हो सकती है. अपने ट्वीट में उन्होंने RSS के ट्रेनिंग कैंप, जनसांख्यिकीय बदलावों पर सुझाव मांगने वाली समिति और जनगणना की नई अधिसूचना का जिक्र किया. जयराम रमेश ने इन घटनाक्रमों को जोड़ते हुए जनगणना की निष्पक्षता पर चिंता जताई.
जयराम रमेश का कहना है कि RSS ने 10 से 12 जुलाई 2026 के बीच बेलगावी में जनगणना 2027 को लेकर एक ट्रेनिंग कैंप आयोजित किया था. उन्होंने इस कैंप के एजेंडे और जनगणना के लिए कर्मचारियों की पात्रता सूची बढ़ाने के फैसले को साथ रखकर सवाल उठाए हैं. उनका आरोप है कि इस बदलाव से RSS-BJP से जुड़े हजारों कार्यकर्ताओं को रोजगार मिल सकता है.
जनसांख्यिकीय बदलावों पर सुझाव मांगने वाली समिति भी निशाने पर
जयराम रमेश ने केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से बनाई गई जनसांख्यिकीय बदलावों से जुड़ी उच्चस्तरीय समिति पर भी सवाल उठाए. उनके मुताबिक, समिति ने 14 अक्टूबर 2026 को देश में आबादी से जुड़े बदलावों पर आम लोगों के साथ भारतीय और विदेशी संगठनों से सुझाव मांगे थे. उन्होंने समिति के सदस्यों के RSS से जुड़े होने का आरोप लगाया. उन्होंने इस आधार पर समिति की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं.
जनगणना की निष्पक्षता पर जताई चिंता
जयराम रमेश ने 16 अक्टूबर 2026 को जारी जनगणना की अधिसूचना को इन घटनाक्रमों के संदर्भ में देखने की बात कही. उन्होंने आशंका जताई कि कर्मचारियों की पात्रता बढ़ाने से जनगणना की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है. उन्होंने इसकी तुलना मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR से भी की और जनगणना में गड़बड़ी की आशंका जताई. हालांकि, RSS-BJP से जुड़े कार्यकर्ताओं को रोजगार देने और जनगणना में गड़बड़ी की आशंका जयराम रमेश के आरोप हैं.
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