सोन नदी जल बंटवारे पर बिहार-झारखंड के बीच समझौता, 53 साल पुराना विवाद भी सुलझा

बिहार और झारखंड के बीच दशकों से चला आ रहा सोन नदी जल विवाद नई दिल्ली में हुई बैठक में सुलझ गया है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में दोनों राज्यों ने 7.75 मिलियन एकड़ फीट पानी के बंटवारे पर MoU पर हस्ताक्षर किए. इस समझौते के बाद इंद्रपुरी जलाशय परियोजना के निर्माण का रास्ता भी साफ हो गया है, जो पिछले 53 सालों से अटका हुआ था.

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सोन नदी पर ये विवाद 26 सालों से चल रहा था. (Photo- X/Samrat Chaudhary) सोन नदी पर ये विवाद 26 सालों से चल रहा था. (Photo- X/Samrat Chaudhary)

जितेंद्र बहादुर सिंह

  • नई दिल्ली,
  • 31 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 9:41 PM IST

बिहार और झारखंड के बीच सोन नदी के पानी के बंटवारे को लेकर चला आ रहा दशकों पुराना विवाद आखिरकार सुलझ गया है. सोमवार को नई दिल्ली में एक बैठक के दौरान दोनों राज्यों के बीच MoU पर हस्ताक्षर किए गए. 

सोन नदी जल विवाद के स्थायी समाधान के तहत कुल 7.75 मिलियन एकड़ फीट पानी का बंटवारा दोनों राज्यों के बीच तय किया गया है.

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी मौजूद रहे.

साल 1973 में हुए बाणसागर समझौते के बाद ये पहला मौका है जब बिहार और झारखंड के बीच सोन नदी के जल में हिस्सेदारी पूरी तरह साफ हुई है. साल 2000 में बिहार से अलग होकर नए राज्य के रूप में झारखंड के गठन के बाद से ही जल बंटवारे का ये मुद्दा अटका हुआ था.

क्यों अटका था मामला?

झारखंड की ओर से लगातार सोन नदी के पानी में वाजिब हिस्सेदारी की मांग की जा रही थी. झारखंड सरकार का तर्क था कि सोन नदी का उद्गम स्थल और एक बड़ा कैचमेंट एरिया उनके राज्य के क्षेत्र में आता है. वहीं, बिहार सरकार 1973 के बाणसागर समझौते को आधार बनाकर पूरे 7.75 MAF पानी पर अपना दावा जता रही थी.

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इंद्रपुरी जलाशय परियोजना का रास्ता साफ

बिहार के साथ इस विवाद के चलते और झारखंड से NOC न मिलने के कारण इंद्रपुरी जलाशय परियोजना पिछले लगभग 53 सालों से अटकी हुई थी. लेकिन अब दोनों राज्यों के बीच सहमति बनने और MoU पर हस्ताक्षर होने के बाद इस परियोजना के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है.

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