ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने अरुणाचल प्रदेश में नियंत्रण रेखा (LAC) के पास चीन की गतिविधियों और केंद्र की मोदी सरकार की कथित चुप्पी को लेकर तीखे सवाल उठाए हैं. ओवैसी ने केंद्र सरकार पर चीन सीमा पर राष्ट्रहित से समझौते का आरोप लगाते हुए सवाल किया है कि क्या सरकार बॉर्डर के हालात पर देश की जनता को अंधेरे में रख रही है.
असदुद्दीन ओवैसी ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा के बहाने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गंभीर आरोप लगाए हैं.
ओवैसी ने सोमवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर पोस्ट कर अरुणाचल प्रदेश सीमा पर चीनी सेना की गतिविधियों को लेकर सरकार से 5 प्रमुख सवाल पूछे हैं और मौजूदा स्थिति को स्पष्ट करने की मांग की है.
ओवैसी के उठाए 5 बड़े सवाल
1. क्या चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने हाल ही में भारतीय सेना की पेट्रोलिंग अधिकारों को उन इलाकों में जाने से रोका है, जहां वे पहले तक नियमित रूप से पेट्रोलिंग करती रही हैं?
2. क्या चीनी सैनिकों ने भारतीय सीमा के भीतर हमारी पेट्रोलिंग टीम द्वारा बनाए गए एक अस्थायी ढांचे (Temporary Structure) को नष्ट कर दिया है?
3. क्या PLA ने उस इलाके में अपने टेंट गाड़ लिए हैं, जो स्पष्ट रूप से भारत का क्षेत्र है और जहां पहले भारतीय सेना की पेट्रोलिंग होती थी?
4. क्या सरकार अगले महीने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत दौरे से पहले रिश्तों में 'सामान्य स्थिति' दिखाने के लिए सेना को अपने गश्ती अधिकारों पर ज्यादा दबाव न डालने का निर्देश दे रही है?
5. क्या मोदी सरकार ने डोकलाम (2017) और लद्दाख (2020) की तरह इस बार भी अरुणाचल प्रदेश की वास्तविक स्थिति से देश की जनता को अंधेरे में रखने का फैसला किया है?
असदुद्दीन ओवैसी ने क्या कहा?
हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने सोमवार सुबह-सुबह एक्स पर एक पोस्ट किया. इसमें उन्होंने केंद्र सरकार से पूछा है,'क्या सरकार सेना को उस इलाके में पेट्रोलिंग के अधिकारों पर जोर न डालने के लिए दबाव डाल रही है , क्योंकि अगले महीने (चीन के ) राष्ट्रपति शी जिनपिंग के दिल्ली दौरे से पहले वह सब कुछ सामान्य दिखाना चाहती है?'
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि मैं नरेंद्र मोदी से कहना चाहता हूं कि सरकारें आती-जाती रहती हैं, प्रधानमंत्री आते-जाते रहते हैं, लेकिन भारत की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता से समझौता नहीं किया जा सकता. यह सर्वोपरि है, उन्होंने मांग की कि सरकार को सीमा की वास्तविक स्थिति पर देश को भरोसा दिलाना चाहिए. सरकार को सीमा के वास्तविक हालात पर देश के सामने सच्चाई रखनी चाहिए.
चीन सीमा के मुद्दे पर फिर उठे सवाल
ओवैसी के इन सवालों के बाद भारत-चीन सीमा की स्थिति पर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है. डोकलाम और लद्दाख गतिरोध के पुराने उदाहरणों का हवाला देते हुए विपक्ष लगातार सीमा सुरक्षा और सरकार की विदेश नीति पर स्पष्टीकरण की मांग कर रहा है. कांग्रेस के राहुल गांधी समेत विपक्ष के कुछ नेताओं की ओर से हाल में सोशल मीडिया पर किए गए दावों के आधार पर आरोप लगाए हैं कि अरुणाचल प्रदेश में चीन ने कुछ इलाकों में अतिक्रिमण किया है और भारतीय सुरक्षा बलों को गश्ती में रुकावटें डाल रहा है.
हालांकि, सरकार की ओर से अबतक चीन की ओर से इस तरह के किसी भी अतिक्रमण का स्पष्ट तौर पर खंडन किया गया है. भारत अभी ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है और नई दिल्ली में सितंबर में इसका शिखर सम्मेलन होने वाला है. चीन भी ब्रिक्स का सदस्य है और संभावना है कि शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग खुद भारत आएंगे.
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