महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों एक बड़े सियासी फेरबदल की चर्चा जोरों पर है. अजित पवार की प्लेन हादसे में मौत के बाद कमजोर पड़ी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) महाराष्ट्र में अपने संगठन को मजबूत करने की योजना पर काम कर रही है. ऐसे में 27 सितंबर को नासिक में एनसीपी के होने वाले अपने सम्मेलन में उपमुख्यमंत्री और पार्टी अध्यक्ष सुनेत्रा पवार के एक बड़े "री-लॉन्च" की योजना बना रही है, लेकिन पार्टी इसे खारिज कर रही है.
बता दें कि इस साल की शुरुआत में एक विमान दुर्घटना में कद्दावर नेता अजीत पवार का निधन हो गया था. इसके बाद उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार ने पार्टी की कमान संभाली थी और महाराष्ट्र सरकार में डिप्टी सीएम बनीं.
NCP के रिलांचिंग का क्या प्लान है?
राजनीतिक गलियारों में इस बात की तेज सुगबुगाहट है कि पार्टी अब अपने मशहूर नारे 'एकच वादा, अजीत दादा' (एक ही वादा, अजीत दादा) को पीछे छोड़कर सुनेत्रा पवार पर केंद्रित एक नया नैरेटिव गढ़ रही है. इस नए कैंपेन को 'आपल्या वहिनी आहेत ना!' (हमारी भाभी हैं ना!) के रूप में तैयार किया गया है.
चर्चा है कि इस नए कैंपेन के तहत सुनेत्रा पवार की राज्य भर में सक्रियता बढ़ाई जाएगी, लेकिन पार्टी नेतृत्व ने किसी भी तरह के नियोजित बदलाव (मेकओवर) की बात को सख्ती से खारिज कर दिया है.
एनसीपी ने कहा री-लॉन्च की बातें बेबुनियाद
एनसीपी के नेता उमेश पाटिल ने इन खबरों को बेबुनियाद बताया और कहा कि मीडिया को बिना नाम वाले सूत्रों की बातों को पार्टी का आधिकारिक रुख नहीं समझना चाहिए. इस शब्द के पीछे के तर्क पर सवाल उठाते हुए, पाटिल ने बताया कि सुनेत्रा पवार पहले से ही राज्य की डिप्टी सीएम और राष्ट्रीय पार्टी प्रमुख के तौर पर सक्रिय रूप से काम कर रही हैं और रोज़ाना कार्यकर्ताओं से मिलती-जुलती हैं.
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उमेश पाटिल ने ज़ोर देकर कहा कि वह कभी भी सक्रिय राजनीति से दूर नहीं हुई थीं, वह रोज कार्यकर्ताओं से मिलती हैं और सक्रिय राजनीति में बनी हुई हैं. ऐसे में उनके 'री-लॉन्च' का सवाल ही पैदा नहीं होता.
एनसीपी के भीतर मतभेद और असंतोष
रणनीति में इस संभावित बदलाव की खबरें अजीत पवार के जाने के बाद पार्टी के भीतर चल रही अंदरूनी उथल-पुथल के बीच आ रही हैं. सूत्रों के मुताबिक, पार्टी पर नियंत्रण, चुनावी रणनीति और फैसलों के अधिकार को लेकर अलग-अलग गुटों में मतभेद उभरकर सामने आए हैं.
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एनसीपी के अहम पदों पर नियुक्तियों, आगामी टिकट बंटवारे और प्रफुल्ल पटेल व सुनील तटकरे जैसे वरिष्ठ नेताओं की भूमिका को लेकर भी अंदरूनी नाराजगी जताई जा रही है. ऐसे वक्त में जब पार्टी अपने संस्थापक चेहरे के बिना अपनी जमीन मजबूत करने की कोशिश कर रही है, यह सवाल उठना लाजमी है कि क्या कार्यकर्ताओं में सुनेत्रा पवार की स्वीकार्यता बढ़ाने के लिए किसी नए सार्वजनिक अभियान की जरूरत है.
प्रशांत किशोर से मुलाकात के बाद बढ़ीं अटकलें
एनसीपी और सुनेत्रा पवार की री-लॉन्च की बातों और चर्चाओं को बल तब मिला जब चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर के साथ सुनेत्रा पवार और उनके बेटे पार्थ पवार के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक हुई. पवार परिवार के सरकारी आवास पर हुई इस बंद कमरे की बैठक में पार्टी के पुनर्गठन, छवि सुधारने और पूरे महाराष्ट्र में महिला मतदाताओं को जोड़ने की रणनीति पर मंथन हुआ.
हालांकि, पार्टी के आधिकारिक सूत्रों ने इसे शिष्टाचार भेंट बताया, लेकिन अंदरूनी सूत्रों का दावा है कि प्रशांत किशोर के सुझावों के आधार पर ही NCP के नए कम्युनिकेशन ड्राफ्ट और राज्यभर में होने वाले दौरों की रूपरेखा तैयार की जा रही है.
ऋत्विक भालेकर