पंचायत आजतक बिहार के सेशन '100 दिन: कितना वादा… कितना दावा!' में आरजेडी नेता अली अशरफ फातमी ने बिहार की आर्थिक स्थिति को लेकर सरकार पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि राज्य में ऐसी स्थिति है कि कभी भी यहां काम करने वाले लोगों की तनख्वाह बंद हो सकती है. उनके मुताबिक, कई ठेकेदारों को पिछले एक साल से उनका पैसा नहीं मिल पा रहा है.
फातमी ने कहा कि सिर्फ कांग्रेस और लालू प्रसाद यादव के शासन को बिहार की बदहाली के लिए जिम्मेदार बताना सही नहीं है. उन्होंने कहा कि रामविलास पासवान समाजवादी आंदोलन से जुड़े रहे और अलग-अलग दौर में बिहार सरकार और केंद्र की सरकार का हिस्सा रहे. बिहार की तरफ दिल्ली की निगाह होनी चाहिए. फातमी ने कानून-व्यवस्था को लेकर भी सरकार के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य के अलग-अलग जिलों में जाकर वास्तविक स्थिति देखी जानी चाहिए.
शाहनवाज हुसैन ने कानून-व्यवस्था पर दिया जवाब
सैयद शाहनवाज हुसैन ने फातमी के कानून-व्यवस्था वाले सवाल का जवाब देते हुए कहा कि बिहार में अब कानून का राज है और अपराध तथा अपराधियों से कोई समझौता नहीं किया जाता. आज लोग रात में सड़कों पर घूम सकते हैं और पहले जैसी स्थिति नहीं है. शाहनवाज हुसैन ने बिहार की तुलना दिल्ली और मुंबई से करते हुए कहा कि अपराध और विकास दो अलग-अलग विषय हैं. उनके मुताबिक, अगर कोई राज्य विकास कर रहा है तो इसका मतलब यह नहीं कि वहां अपराध खत्म हो जाएगा. अगर पिछले 22 साल में अपराध पर नियंत्रण नहीं हो पाया तो इसकी जिम्मेदारी उस लंबे शासनकाल की भी बनती है.
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उद्योग और निवेश पर भी हुई बहस
फातमी ने सवाल उठाया कि अगर पिछले 20 वर्षों से बिहार में सरकारें विकास और निवेश की बात कर रही हैं, तो बाहर गए उद्योगपतियों और पूंजी को वापस लाने के लिए अब तक क्या किया गया. इस पर शाहनवाज हुसैन ने कहा कि बिहार में लंबे समय तक ऐसा माहौल रहा, जिसमें उद्योगपतियों के मन में डर बैठ गया था. उस डर को खत्म करने में समय लगता है. पिछले वर्षों में आधारभूत ढांचे पर काम हुआ है और अब उद्योगपति बिहार की ओर आ रहे हैं.
गुजरात मॉडल पर आमने-सामने आए नेता
चर्चा के दौरान गुजरात और बिहार के विकास की तुलना भी हुई. फातमी ने कहा कि अगर केंद्र सरकार बिहार की मदद नहीं करेगी तो राज्य आगे नहीं बढ़ सकता. उन्होंने एयरपोर्ट और दूसरे आधारभूत ढांचे को लेकर गुजरात और बिहार के बीच अंतर का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि गुजरात में बड़ी संख्या में एयरपोर्ट हैं, जबकि बिहार में अंतरराष्ट्रीय स्तर की हवाई कनेक्टिविटी अभी सीमित है. इस पर शाहनवाज हुसैन ने कहा कि गुजरात को बिहार के साथ सीधे समान आधार पर नहीं देखा जा सकता, क्योंकि दोनों राज्यों की ऐतिहासिक और विकास संबंधी परिस्थितियां अलग रही हैं. गुजरात पहले से ही विकसित राज्यों में शामिल रहा है और नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री रहते वहां एक अलग विकास मॉडल सामने आया.
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'सड़क, बिजली और पानी में बिहार पीछे क्यों रहे?'
कांग्रेस सांसद डॉ. अखिलेश प्रसाद सिंह ने बिहार के विकास को लेकर सरकार से सवाल किया. उन्होंने कहा कि बिहार की प्रति व्यक्ति आय देश में सबसे कम राज्यों में है और राज्य को बीमारू राज्यों की श्रेणी से बाहर निकालने के लिए स्पष्ट रोडमैप की जरूरत है. उद्योग और रोजगार की स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि बिहार में अभी भी बड़ी संख्या में लोग रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों का रुख करते हैं.
अखिलेश प्रसाद सिंह ने सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य को लेकर भी सरकार के दावों पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि सिर्फ यह कहना पर्याप्त नहीं है कि सड़कें पहले से बेहतर हुई हैं, बल्कि दूसरे राज्यों के मुकाबले बिहार की स्थिति भी देखनी होगी.
एलजेपी (आर) सांसद अरुण भारती ने कहा कि बिहार में रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए आधारभूत संरचना और अलग-अलग विभागों के माध्यम से काम किया जा रहा है. कुछ समय पहले बीपीएससी से जुड़े छात्रों का आंदोलन हुआ था और सरकार के प्रतिनिधियों ने छात्रों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं को समझने की कोशिश की. सरकार में रहते हुए सिर्फ शिकायतें सुनना नहीं, बल्कि उनके समाधान की दिशा में काम करना भी जरूरी है.
रोजगार के अवसर पैदा करने में समय लगता है. उन्होंने उद्योग, निवेश और बाजार को किसानों से जोड़ने को भी रोजगार के नए अवसर पैदा करने से जोड़ा. उन्होंने मखाना बोर्ड का भी उल्लेख किया.
'एक करोड़ नौकरियों के वादे पर हिसाब देना होगा'
रोजगार के मुद्दे पर चर्चा के दौरान बिहार में एक करोड़ नौकरियों के वादे का भी जिक्र हुआ. सवाल उठाया गया कि अगर पांच साल में एक करोड़ नौकरियां देने का लक्ष्य है तो प्रतिदिन कितनी नौकरियां पैदा करनी होंगी. अली अशरफ फातमी ने कहा कि बिहार में सरकारी विभागों में बड़ी संख्या में पद खाली हैं.
सरकार को रोजगार और नौकरी के मुद्दे पर स्पष्ट प्रतिबद्धता दिखानी चाहिए, क्योंकि बड़ी संख्या में युवा आज भी दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु और दूसरे शहरों में रोजगार की तलाश में जा रहे हैं.
अखिलेश प्रसाद सिंह ने कहा कि बिहार की जीडीपी में वृद्धि के आंकड़े अपनी जगह हैं, लेकिन युवाओं को रोजगार नहीं मिलेगा तो सवाल उठते रहेंगे. उन्होंने पेपर लीक और छात्र आंदोलनों का मुद्दा भी उठाया. अरुण भारती ने कहा कि युवाओं के लिए अवसर पैदा करने के लिए आधारभूत ढांचे और निवेश पर काम करना जरूरी है. उनके मुताबिक, नए उद्योग और परियोजनाएं आने से रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे.
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