महाराष्ट्र में लोकप्रिय रम ब्रांड 'ओल्ड मॉन्क' के शौकीनों के लिए बड़ा झटका लगा है. बॉम्बे हाईकोर्ट ने भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) के ओल्ड मॉन्क की बिक्री पर लगाई गई रोक पर अंतरिम स्टे लगाने से इनकार कर दिया है.
दरअसल FSSAI ने ओल्ड मॉन्क की बोतल पर भ्रामक लेबलिंग और उम्र के गलत दावों को लेकर महाराष्ट्र में इसकी बिक्री पर रोक लगा दी थी.
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र वी. घुगे और जस्टिस गौतम ए. अंखाड की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की. इस दौरान अदालत ने ओल्ड मॉन्क की बोतल पर लिखे '7 इयर्स ओल्ड ब्लेंडेड' और 'वेरी ओल्ड वैटेड' जैसे शब्दों पर सख्त ऐतराज जताया.
अदालत ने कहा, 'आप जनता को गुमराह कर रहे हैं. 7 साल पुरानी का मतलब 7 साल ही होना चाहिए.' जब निर्माता कंपनी 'मोहन रॉकी स्प्रिंगवॉटर प्राइवेट लिमिटेड' के सीनियर एडवोकेट नवरोज सीरवई ने नियमों का हवाला दिया, तो बेंच ने कहा, 'हमारी चाहत है कि देश का हर नागरिक इतना पढ़ा-लिखा हो कि ये सब समझ सके.'
मैग्नीफाइंग ग्लास से भी नहीं दिखी महीन लिखावट
अदालत में सुनवाई के दौरान जज ने खुद ओल्ड मॉन्क की बोतल हाथ में लेकर देखी. बोतल पर आर्टिफिशियल फ्लेवरिंग की बेहद बारीक लिखावट थी. इस पर नाराजगी जताते हुए मुख्य न्यायाधीश घुगे ने कहा, 'मैंने अपने मैग्नीफाइंग ग्लास का इस्तेमाल किया, फिर भी मुझे ये नहीं दिखा. मैंने हर कोने से देखने की कोशिश की, लेकिन मुझे ये लिखावट नहीं मिली.'
दूसरी ओर, एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने FSSAI का पक्ष रखते हुए कहा कि असली रम का स्वाद गन्ने के फर्मेंटेशन से आना चाहिए. अगर ड्रिंक में मुख्य हिस्सा न्यूट्रल स्पिरिट का है और असली रम स्पिरिट सिर्फ 2 से 5 प्रतिशत है, तो इसे प्योर रम के रूप में बेचना जनता को धोखा देना है.
कंपनी लेबल बदलने को तैयार, 3 सितंबर को अगली सुनवाई
अदालत के कड़े रुख को देखते हुए कंपनी ने बिक्री फिर से शुरू करने के लिए अपने लेबल और पैकेजिंग में बदलाव करने पर सहमति जताई है. कंपनी ने कोर्ट को भरोसा दिया है कि वो अपनी बोतल से '7 इयर्स ओल्ड ब्लेंडेड' शब्द हटा देगी और 'एडेड फ्लेवर' को बड़े शब्दों में छापेगी.
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हाईकोर्ट ने कंपनी को रिव्यू के लिए एक नया डिजिटल प्रिंटेड लेबल ड्राफ्ट पेश करने का निर्देश दिया है. मामले की अगली सुनवाई अब 3 सितंबर 2026 को होगी.
विद्या