महाराष्ट्र सरकार के ऑटो रिक्शा, टैक्सी और ऐप बेस्ड कैब ड्राइवरों के लिए 'मराठी भाषा' अनिवार्य करने के फैसले को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है. राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ एडवोकेट विवेक शुक्ला ने अदालत में एक जनहित याचिका दायर की है.
इस जनहित याचिका पर तुरंत दिशा-निर्देश जारी करने के लिए मंगलवार को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की बेंच के सामने मामला पेश किया जाएगा. हालांकि, कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे, ने हाल ही में कहा था कि बेंच किसी भी नए मामले की सुनवाई नहीं करेगी.
दरअसल जस्टिस रवींद्र घुगे को कोलकाता हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश के रूप में ट्रांसफर करने की सिफारिश की गई है.
'मौलिक अधिकारों और मोटर वाहन अधिनियम का उल्लंघन'
बता दें कि ये जनहित याचिका मोहम्मद कासिम अहमद सहित चार ऐप-आधारित कैब ड्राइवरों ने दायर की है. याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि सरकार का ये नियम संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 के तहत उन्हें मिले मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है.
इसके साथ ही याचिका में कहा गया है कि ये नियम 'मोटर वाहन अधिनियम, 1988' के भी खिलाफ है, क्योंकि इसमें केंद्रीय कानून में ड्राइविंग लाइसेंस के लिए किसी भी विशिष्ट भाषा की शर्त या अनिवार्यता का कोई प्रावधान नहीं है.
लाखों ड्राइवरों के रोजगार पर खतरा
याचिकाकर्ताओं ने कहा कि सरकार के इस फैसले से राज्य के लाखों गरीब और प्रवासी ड्राइवरों के बैज निलंबित होने और परमिट रद्द होने का बड़ा खतरा पैदा हो गया है. इससे उनके सामने रोजगार का संकट खड़ा हो जाएगा.
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जनहित याचिका में मांग की गई है कि इस फैसले पर तुरंत रोक लगाई जाए. याचिका में दावा किया गया है कि अगर इस फैसले पर रोक नहीं लगाई गई, तो पूरे महाराष्ट्र के लगभग 9.65 लाख ड्राइवरों को भारी परेशानी और आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ेगा.
विद्या