झारखंड में सरकारी नौकरियों में नियुक्ति को लेकर छात्रों का आंदोलन जारी है. आंदोलन में शामिल राहुल क्रांति नाम के युवक ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर सीधा आरोप लगाया है कि सरकारी नियुक्तियां पैसों के बदले बांटी जा रही हैं. राहुल पिछले 20 साल से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं.
उन्होंने हाई स्कूल शिक्षक परीक्षा और सहायक आचार्य परीक्षा दोनों पास कीं, फिर भी उन्हें नौकरी नहीं मिली. उनका कहना है कि इस बार जेपीएससी परीक्षा उनका आखिरी प्रयास था, लेकिन उसमें ओएमआर शीट लीक होने का मामला सामने आया.
राहुल क्रांति ने बताया कि वे हाई स्कूल शिक्षक परीक्षा में चयनित उम्मीदवार से 20 नंबर ज्यादा लाए थे, फिर भी उनकी नियुक्ति नहीं हुई. राज्य में 14 हजार पद खाली पड़े हैं. उनका कहना है कि जब 26 हजार पदों के लिए विज्ञापन एक बार निकलता है और परीक्षा भी एक बार होती है, तो नियुक्ति भी एक साथ होनी चाहिए. लेकिन नियुक्तियां टुकड़ों में बांटी जा रही हैं. सहायक आचार्य पद के लिए पांच बार नियुक्ति पत्र बांटे जा चुके हैं, फिर भी पूरी प्रक्रिया अब तक खत्म नहीं हुई है.
राहुल ने आरोप लगाया कि जितनी सीटें बिकती हैं, मुख्यमंत्री उतने ही लोगों को नियुक्ति पत्र वितरण समारोह में बुलाकर पत्र सौंपते हैं. उन्होंने सीजीएल परीक्षा का भी जिक्र किया, जहां अभय तिवारी नाम के व्यक्ति को मास्टरमाइंड के तौर पर पकड़ा गया था.
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राहुल का कहना है कि जेपीएससी में सरकार के प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य की पत्नी अजिता भट्टाचार्य को सदस्य बनाया गया, जिनके जरिए ओएमआर शीट बाहर निकलने की आशंका जताई गई है.
राहुल ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री आवास प्रदर्शन स्थल से सिर्फ तीन किलोमीटर दूर है, फिर भी मुख्यमंत्री खुद मिलने नहीं आए और न ही कोई प्रतिनिधिमंडल भेजा. उन्होंने दिल्ली में हुए नीट पेपर लीक मामले से तुलना करते हुए कहा कि वहां कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी प्रधानमंत्री आवास तक पहुंच गए थे, लेकिन झारखंड में कोई नेता उनका हाल जानने तक नहीं आया.
प्रीति चौधरी