'सफेद चादर कफन बन जाए, लेकिन अनशन नहीं टूटेगा', रांची में हड़ताल पर बैठे देवेंद्र महतो का ऐलान

रांची में अनशन पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो की तबीयत बिगड़ रही है. डॉक्टरों ने उन्हें अस्पताल में भर्ती होने की सलाह दी है. लेकिन वो जिद पर अड़े हैं कि जब तक छात्रों की सरकार से वार्ता सफल नहीं होती, वो अनशन खत्म नहीं करेंगे.

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महतो 6 दिन से भूख हड़ताल पर बैठे हैं. (Photo- ITGD) महतो 6 दिन से भूख हड़ताल पर बैठे हैं. (Photo- ITGD)

सत्यजीत कुमार

  • रांची,
  • 07 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 7:32 PM IST

झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) में भ्रष्टाचार और पेपर लीक के खिलाफ रांची में छात्रों का आंदोलन जारी है. अनशन पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो की भूख हड़ताल का आज छठा दिन है. गिरते स्वास्थ्य के बावजूद उनका मनोबल डिगा नहीं है.

अनशन के दौरान जांच करने पहुंचे डॉक्टरों की टीम ने बताया कि देवेंद्र नाथ महतो की तबीयत चिंताजनक है. उन्हें चेस्ट में इंफेक्शन हो गया है, साथ ही ब्लड प्रेशर और शुगर लेवल काफी नीचे गिर चुका है.

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डॉक्टरों, SDM और स्थानीय थाना प्रभारी ने उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती होने की सलाह दी है. हालांकि, देवेंद्र महतो अपनी जिद पर अड़े हैं. उन्होंने कहा है कि जब तक सरकार के साथ छात्रों की वार्ता सफल नहीं होती, वो अनशन स्थल से एक इंच भी पीछे नहीं हटेंगे.

'सफेद चादर कफन बन जाए, लेकिन अनशन नहीं टूटेगा'

आजतक से खास बातचीत के दौरान देवेंद्र महतो ने कहा कि वो अपने घर वालों से बात नहीं कर रहे हैं, क्योंकि परिजनों से बात करने पर वो खुद भावुक हो जाएंगे और आंदोलन कमजोर पड़ जाएगा. उन्होंने कहा, 'ये सफेद चादर जो मैंने ओढ़ रखी है, भले ही कफन में बदल जाए, लेकिन जब तक सरकार के साथ वार्ता सफल नहीं हो जाती, अनशन नहीं टूटेगा.'

दो बेटियों के पिता महेंद्र प्रसाद फूट-फूटकर रोए

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देवेंद्र महतो के ठीक बगल में हजारीबाग के महेंद्र प्रसाद भी लगातार चौथे दिन भूख हड़ताल पर बैठे हैं. बातचीत के दौरान महेंद्र कैमरे के सामने ही फूट-फूटकर रो पड़े. उन्होंने बताया कि घर पर उनकी दो मासूम बेटियां हैं, लेकिन वो उनसे फोन पर बात नहीं कर रहे हैं ताकि परिवार का हौसला न टूटे.

महेंद्र ने बताया कि साल 2014 में इंजीनियरिंग की डिग्री लेने के बावजूद उन्हें नौकरी नहीं मिली, जिसके बाद घर वाले उन्हें निकम्मा समझने लगे. इसके बाद उन्होंने संघर्ष का रास्ता चुना और घर छोड़ दिया. उन्होंने JPSC और JSSC की परीक्षाएं दीं, लेकिन बार-बार पेपर लीक होते रहे. इतने पैसे नहीं थे कि सीट खरीदी जा सके. महेंद्र ने कहा, 'आज मैं इसलिए रो रहा हूं ताकि आगे आने वाली पीढ़ियों को न रोना पड़े.'

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सर्किट हाउस में सरकार और छात्रों के बीच वार्ता की उम्मीद

इस बीच, सरकारी सूत्रों से खबर है कि स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने छात्रों को बातचीत का न्योता दिया है. शाम 7 बजे मोहराबादी स्थित सर्किट हाउस में छात्रों के 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल और सरकार के प्रतिनिधियों के बीच अहम वार्ता होने की उम्मीद है.

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