सोनम वांगचुक कश्मीर से लौटकर अपने गांव पहुंच गए हैं. यहां सिंधु नदी किनारे आराम करते हुए उन्होंने एक वीडियो संदेश जारी किया. इसमें उन्होंने सरकार से अनशन खत्म कराते समय किए गए लिखित वादे पूरे करने की मांग दोहराई. उन्होंने कहा कि प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर कोई कानूनी कार्रवाई नहीं होनी चाहिए. साथ ही आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने की भी मांग की. इसके अलावा उन्होंने भारतीय रेल की तारीफ करने पर आलोचना झेलने का भी जिक्र किया.
सोनम वांगचुक ने अपने संदेश में कहा कि वे शुक्रवार को कश्मीर से लौटते समय भी यही बात कह रहे थे. उन्होंने सरकार को याद दिलाया कि अनशन तुड़वाते वक्त जो वादे लिखित रूप में किए गए थे, उन्हें अब पूरा किया जाना चाहिए. उन्होंने साफ कहा कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ कोई कानूनी कदम नहीं उठाया जाना चाहिए.
इसके साथ ही उन्होंने उन छात्रों को भी याद किया जिन्होंने आत्महत्या कर ली थी. उनका कहना था कि अब समय आ गया है कि इन छात्रों के परिवारों को मुआवजा दिया जाए. उन्होंने कहा कि हर काम समय पर होने से ही उसकी कीमत और सम्मान बनता है.
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वांगचुक ने एक और मुद्दा उठाया. उन्होंने बताया कि जब वे कश्मीर से लौट रहे थे तो उन्होंने भारतीय रेल की तारीफ की थी, क्योंकि रेलवे ने कश्मीर तक लाइन पहुंचाकर बड़ा इंजीनियरिंग काम पूरा किया है. इस पर कुछ लोगों ने नाराजगी जताई कि वे सरकार की तारीफ कर रहे हैं. इस पर वांगचुक ने सवाल किया कि अगर इसरो मंगल ग्रह पर इंसान उतार दे तो क्या उसकी तारीफ नहीं होगी. उन्होंने कहा कि भारतीय रेल हजारों इंजीनियरों और अधिकारियों की मेहनत से बनी है, इसलिए इसकी तारीफ होनी चाहिए.
उन्होंने लोगों से खुले दिमाग से सोचने की अपील की. उनका कहना था कि पक्ष हो या विपक्ष, सबको मिलकर देश बनाना है. गलत काम को गलत कहना चाहिए, लेकिन सही काम की तारीफ भी करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि किसी एक पक्ष के अंधभक्त बनने की बजाय हमें सही और गलत दोनों को साफ तौर पर पहचानना चाहिए.
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