मोहन भागवत की तारीफ करना पड़ा भारी? कश्मीर में जमीयत नेता को आतंकी संगठन की धमकी

जम्मू-कश्मीर में जमीयत अहले हदीस के अध्यक्ष डॉक्टर अब्दुल लतीफ अल किंडी ने मोहन भागवत के उस बयान को स्वागत योग्य बताया, जिसमें मुसलमानों को भारत का अलग न किए जा सकने वाला हिस्सा कहा गया था. इसके बाद यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल ने उन्हें आरएसएस की बी टीम कहकर धमकी दी, समर्थन करने वालों को भी निशाना बनाने की चेतावनी दी और इलाके में सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गईं.

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मोहन भागवत की न्यूयॉर्क में दिए भाषण की मौलाना ने तारीफ की थी. (Photo- Screengrab) मोहन भागवत की न्यूयॉर्क में दिए भाषण की मौलाना ने तारीफ की थी. (Photo- Screengrab)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 01 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 2:55 PM IST

जम्मू-कश्मीर में धार्मिक संगठन के प्रमुख को आरएसएस की तारीफ करना भारी पड़ता नजर आ रहा है. जमीयत अहले हदीस जम्मू-कश्मीर के अध्यक्ष अब्दुल लतीफ अल-किंदी को कथित तौर पर यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल यानी यूएलसी ने निशाने पर लिया है. यूएलसी को पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का प्रॉक्सी बताया जाता है. संगठन ने अल-किंदी को आरएसएस की 'बी टीम' बताते हुए उन्हें नेतृत्व पद से हटाने की मांग की और उनके समर्थन में खड़े लोगों को भी धमकी दी है.

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विवाद उस वक्त शुरू हुआ जब एक धार्मिक सेमिनार के दौरान अल-किंदी ने मीडिया से बात की. इस दौरान उन्होंने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के हालिया बयान की तारीफ की थी.

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मोहन भागवत ने कहा था कि मुस्लिम समुदाय भारत का समावेशी और अविभाज्य हिस्सा है और जो हिंदू इससे अलग सोचते हैं, वे सही मायने में हिंदू नहीं हैं. डॉ. अल-किंदी ने भागवत के इस बयान को ‘स्वागत योग्य कदम’ बताया. उन्होंने कहा कि मुस्लिम समुदाय की सुरक्षा, सम्मान और देश के साथ एकीकरण की बात करने वाली किसी भी पहल को सम्मान के साथ देखा जाना चाहिए. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि समुदाय इस बात का इंतजार करेगा कि इन बयानों को जमीन पर किस तरह लागू किया जाता है.

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यूएलसी ने दी धमकी

डॉ. अल-किंदी के बयान के बाद यूएलसी ने कथित तौर पर कड़ा रुख अपनाया. संगठन ने उन्हें कश्मीर में आरएसएस की ‘बी टीम’ करार दिया और जमीयत अहले हदीस के प्रशासन से उन्हें तत्काल नेतृत्व पद से हटाने की मांग की.

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संगठन ने कथित तौर पर चेतावनी दी कि जो लोग डॉ. अल-किंदी का समर्थन करेंगे या उनके नेतृत्व के साथ खड़े होंगे, उन्हें भी ‘आरएसएस एजेंट’ माना जाएगा और निशाना बनाया जाएगा. यूएलसी पर पहले भी कश्मीरी पंडितों के खिलाफ हिटलिस्ट और धमकियां जारी करने के आरोप लगते रहे हैं.

कौन हैं डॉ. अब्दुल लतीफ अल-किंदी?

डॉ. अल-किंदी सऊदी अरब की इस्लामिक यूनिवर्सिटी ऑफ मदीना से पीएचडी कर चुके विद्वान हैं. वह धार्मिक मंचों से सांप्रदायिक सौहार्द और शांति की वकालत करते रहे हैं. उनके खिलाफ कथित धमकी ने जम्मू-कश्मीर में धार्मिक नेताओं की सुरक्षा और राष्ट्रीय एकता की बात करने वाले लोगों के सामने मौजूद चुनौतियों को लेकर चिंता बढ़ा दी है.

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