'विदेश में विविधता स्वीकार, देश में बर्दाश्त नहीं', मोहन भागवत के बयान पर कपिल सिब्बल और ओवैसी का हमला

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका में विविधता को लेकर दिए गए बयान पर राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल और AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने तीखा विरोध जताया है.

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RSS चीफ मोहन भागवत के बयान पर ओवैसी और कपिल सिब्बल ने हमला बोला है RSS चीफ मोहन भागवत के बयान पर ओवैसी और कपिल सिब्बल ने हमला बोला है

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 30 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 5:12 PM IST

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका में विविधता को लेकर दिए गए बयान पर राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल और AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने निशाना साधा है. सिब्बल ने तंज कसते हुए कहा कि भागवत का भाषण सुनकर वह सोचने लगे कि यह राहुल गांधी बोल रहे हैं या RSS प्रमुख. वहीं ओवैसी ने आरोप लगाया कि RSS दुनिया के सामने कुछ और कहता है और अपने सदस्यों के बीच उसका रुख अलग रहता है.

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RSS चीफ भागवत मे मैडिसन स्क्वायर में दिया था संबोधन

मोहन भागवत ने शनिवार को न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन स्थित इन्फोसिस थिएटर में भारतीय-अमेरिकी समुदाय और विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों को संबोधित किया था. 'यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन' में भागवत ने कहा कि एकता और विविधता दोनों भारत के DNA का हिस्सा हैं. उन्होंने कहा कि विविधता का उत्सव मनाया जाना चाहिए, उसका सम्मान और स्वीकार किया जाना चाहिए और साथ ही एकता की भावना को भी ध्यान में रखना चाहिए.

भागवत के इसी बयान पर कपिल सिब्बल ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, 'मैं सोच रहा था कि यह राहुल गांधी का भाषण है या भागवत जी का.' सिब्बल ने आरोप लगाया कि विदेश में विविधता को स्वीकार करने की बात की जाती है, लेकिन देश में विविधता को बर्दाश्त नहीं किया जाता.

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सिब्बल ने मॉब लिंचिंग और जंतर-मंतर की घटनाओं का जिक्र करते हुए सवाल किया कि क्या भागवत ने कभी इन मामलों में सरकार के खिलाफ आवाज उठाई. उन्होंने कहा कि भागवत विदेश में कहते हैं कि 'भारत एक-दूसरे की परवाह करता है', लेकिन दिल्ली में उनका रुख अलग दिखाई देता है.

सिब्बल ने राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा का जिक्र करते हुए भी भागवत से सवाल किया. उन्होंने कहा कि भागवत विविधता के उत्सव, सम्मान, स्वीकार और संरक्षण की बात करते हैं, लेकिन जब देश में विविधता की रक्षा नहीं हुई तो क्या उन्होंने कभी आवाज उठाई? सिब्बल ने आरोप लगाया कि RSS प्रमुख ऐसी राजनीति का समर्थन करते हैं जो विविधता को स्वीकार और संरक्षित नहीं करती.

इससे पहले सिब्बल ने X पर लिखा था कि विदेश में दिए गए समझदारी भरे शब्द पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि काम भी उसी के अनुरूप होना चाहिए.

ओवैसी ने भी भागवत को घेरा

AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी मोहन भागवत के उस बयान पर प्रतिक्रिया दी, जिसमें RSS प्रमुख ने कहा था कि 'अगर कोई हिंदू सोचता है कि भारत में मुसलमान नहीं होने चाहिए तो वह हिंदू नहीं रहेगा.'

ओवैसी ने इसे RSS की 'पुरानी रणनीति' बताते हुए आरोप लगाया कि संघ दुनिया के सामने कुछ और कहता है और अपने सदस्यों के लिए उसका संदेश अलग होता है. उन्होंने RSS संस्थापक केबी हेडगेवार और पूर्व सरसंघचालक एमएस गोलवलकर के लेखन का हवाला देते हुए संघ की विचारधारा पर सवाल उठाए.

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ओवैसी ने आरोप लगाया कि गोलवलकर की किताब 'बंच ऑफ थॉट्स' में मुसलमानों और ईसाइयों को 'आंतरिक खतरे' के रूप में पेश किया गया था. उन्होंने गुजरात दंगों, समान नागरिक संहिता (UCC), धर्मांतरण विरोधी कानूनों और UAPA का भी जिक्र करते हुए RSS पर सवाल उठाए.

ओवैसी ने भागवत से कहा कि उन्हें सावरकर, हेडगेवार और गोलवलकर के लेखन के चुनिंदा अंश लोगों के सामने पढ़ने चाहिए और फिर जनता को तय करने देना चाहिए कि वह RSS की विचारधारा के बारे में क्या सोचती है.

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