दिल्ली में वोटर लिस्ट को अपडेट करने के लिए एक बड़ा सर्वे चल रहा है. इस सर्वे के तहत बुधवार तक दिल्ली में करीब 10 लाख फॉर्म बांटे जा चुके हैं और 32 हजार से ज्यादा भरे हुए फॉर्म को डिजिटल रिकॉर्ड में डाला जा चुका है.
दिल्ली में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के दौरान बूथ लेवल अफसरों को कई तरह की दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं. पुराने इलाकों में एक ही घर नंबर पर दो-तीन परिवार रहते मिल रहे हैं और कई लोगों के वोट अभी भी उनके पुराने गांव में दर्ज हैं. दूसरी तरफ दिल्ली में अब तक करीब 10 लाख फॉर्म बांटे जा चुके हैं.
दिल्ली में चुनाव आयोग की तरफ से चलाए जा रहे स्पेशल इंटेंसिव रिविजन यानी SIR के दौरान बूथ लेवल अफसरों को कई पुरानी और अनधिकृत कॉलोनियों में अजीब स्थिति का सामना करना पड़ रहा है.
पूर्वी दिल्ली की गीता कॉलोनी के रानी गार्डन इलाके में एक ही घर नंबर पर दो या तीन घर मिल रहे हैं. यहां करीब 325 झुग्गियां A-1 से A-325 तक क्रम में बनी थीं. लेकिन सालों में परिवार बढ़ते गए, घर बंटते गए, नई इमारतें बनती गईं, मगर नंबर वही पुराने रह गए.
बूथ लेवल अफसर बंकी लाल, जो 2016 से इस इलाके में काम कर रहे हैं, बताते हैं कि जब वो जांच के लिए जाते हैं तो कई बार एक ही नंबर पर दो-तीन प्रॉपर्टी मिलती हैं. लोग बताते हैं कि सब एक ही परिवार के हैं, जिससे पहचान करना मुश्किल हो जाता है.
कांग्रेस के स्थानीय कार्यकर्ता नूर मोहम्मद बताते हैं कि ज्यादातर परिवार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बिजनौर और फर्रुखाबाद से हैं, जबकि कई लोग बिहार और झारखंड से रोजी-रोटी की तलाश में यहां आए थे. सालों और कई पीढ़ियों से दिल्ली में रहने के बावजूद इनके वोट अब भी अपने पुराने गांव से जुड़े हैं.
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बंकी लाल के मुताबिक उनके इलाके में 853 वोटर हैं और पिछले छह महीनों में करीब 330 नाम हटाए जा चुके हैं. उन्होंने बताया कि जो लोग स्थायी रूप से घर बदल चुके हैं, उनके नाम सालों तक वोटर लिस्ट में बने रहते हैं.
कई बार तीन-चार साल तक वोटर पर्ची लेकर जाने पर भी घर पर कोई नहीं मिलता, फिर भी पर्ची छोड़ दी जाती है क्योंकि हो सकता है वो लौट आएं. बार-बार जाने के बाद भी अगर पता अपडेट नहीं होता, तो चुनाव आयोग के नियम के तहत नाम हटा दिया जाता है. उन्होंने यह भी बताया कि कई लोगों के वोटर कार्ड पर अभी भी बचपन की फोटो लगी है, जिसे बदलने के लिए भी कहा जा रहा है.
रानी गार्डन के निवासी समीउद्दीन 1990 में यहां आए थे. उस समय उनका परिवार छह लोगों का था, जो अब बढ़कर लगभग 20 लोगों का हो गया है. उन्होंने बताया कि पहले सब एक ही घर में रहते थे, लेकिन भाइयों की शादी के बाद बच्चे बढ़ने से जगह कम पड़ गई और दो भाई सामने वाली गली में किराए के घर में शिफ्ट हो गए, फिर भी परिवार एक ही माना जाता है.
व्यापारी ताहिर, जो 1992 से दिल्ली में रह रहे हैं, बताते हैं कि उनका वोट अभी भी बिजनौर में है क्योंकि वहां उनकी पुश्तैनी जमीन है, जबकि उनके बच्चों का नाम दिल्ली में जुड़वाया जा रहा है.
नूर मोहम्मद ने बताया कि कई परिवार ऐसे भी हैं जिनके दस्तावेज आग लगने की घटनाओं में जल चुके हैं, ऐसे लोग जांच को लेकर परेशान हैं. उन्होंने लोगों को वोटर हेल्पलाइन नंबर 1950 पर कॉल करने की सलाह भी दी, जहां बीएलओ से बात करने की सुविधा भी मिलती है.
दिल्ली में 10 लाख फॉर्म बंटे
दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के दफ्तर से मिले आंकड़ों के मुताबिक बुधवार को 8 लाख 31 हजार 482 फॉर्म बांटे गए और 24 हजार 504 भरे हुए फॉर्म डिजिटल किए गए. इससे पहले मंगलवार को 1 लाख 68 हजार 291 फॉर्म बांटे गए थे और 7 हजार 605 फॉर्म डिजिटल हुए थे.
बुधवार रात 8 बजे तक के आंकड़ों के अनुसार अब तक 9 लाख 99 हजार 773 वोटरों को फॉर्म दिए जा चुके हैं. दिल्ली में कुल 1 करोड़ 45 लाख 10 हजार 298 वोटर रजिस्टर्ड हैं और इस हिसाब से अभी तक 6.89 प्रतिशत वोटरों तक फॉर्म पहुंचे हैं.
दो दिनों में कुल 32 हजार 109 फॉर्म डिजिटल किए गए हैं जो कुल वोटरों का 0.22 प्रतिशत है. सबसे ज्यादा फॉर्म नॉर्थ ईस्ट जिले में बांटे गए हैं. फॉर्म डिजिटल करने के मामले में साउथ वेस्ट जिला सबसे आगे रहा जहां 5 हजार 827 फॉर्म डिजिटल हुए. सबसे कम फॉर्म डिजिटल करने वाला जिला पुरानी दिल्ली रहा जहां सिर्फ 656 फॉर्म डिजिटल हुए.
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यह सर्वे एक महीने तक चलेगा और 29 जुलाई को खत्म होगा. इस दौरान बूथ लेवल अधिकारी हर वोटर को दो कॉपी में फॉर्म देंगे. एक कॉपी वोटर अपने पास रखेगा और दूसरी कॉपी अधिकारी को वापस देनी होगी.
फॉर्म के साथ कोई भी दस्तावेज जमा करने की जरूरत नहीं है. हर वोटर को यह फॉर्म भरना जरूरी है ताकि उसका नाम अंतिम वोटर लिस्ट में शामिल हो सके, जो 7 अक्टूबर को जारी होगी. जो लोग फॉर्म नहीं भरेंगे उनका नाम 5 अगस्त को आने वाली ड्राफ्ट लिस्ट से हटा दिया जाएगा.
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