केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के तहत आने वाले लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस (L&DO) ने दिल्ली जिमखाना क्लब को 'कारण बताओ नोटिस' जारी किया है. इस नोटिस में क्लब से पूछा गया है कि 'पब्लिक प्रीमिसेस (अनधिकृत कब्जा करने वालों को बेदखल करने का) एक्ट, 1971' के तहत उन्हें बेदखल करने का आदेश क्यों न जारी किया जाए.
एस्टेट ऑफिसर बिपिन कुमार सिंह की तरफ से 29 जून को जारी इस नोटिस में क्लब और वहां मौजूद सभी संबंधित लोगों से कहा गया है कि वे 7 जुलाई तक जवाब दें और उसी दिन दोपहर 2.30 बजे व्यक्तिगत सुनवाई के लिए पेश हों.
यह कदम केंद्र सरकार द्वारा 26 मई को दिल्ली हाई कोर्ट में दिए गए उस बयान के एक महीने से ज्यादा वक्त बाद उठाया गया है, जिसमें कहा गया था कि वह 'रक्षा बुनियादी ढांचे को मजबूत और सुरक्षित करने' के लिए जरूरी 27.3 एकड़ ज़मीन का कब्जा 5 जून तक जबरदस्ती नहीं लेगी.
बेदखली की कार्रवाई शुरू...
केंद्र सरकार की तरफ से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि बेदखली की कार्रवाई सिर्फ कानून के मुताबिक और उचित नोटिस देने के बाद ही शुरू की जाएगी.
मंत्रालय के एक सीनियर अधिकारी ने बुधवार को कहा कि उन्होंने कानून के मुताबिक बेदखली की कार्रवाई शुरू कर दी है.
क्लब के सदस्यों और इसके कर्मचारी संघ ने नोटिस पर निराशा जताई और कहा कि उन्हें कानूनी प्रक्रिया से उम्मीद है. दिल्ली हाई कोर्ट में अगली सुनवाई 28 जुलाई को होनी है. उन्होंने बताया कि क्लब को बुधवार दोपहर करीब 1 बजे 'कारण बताओ नोटिस' मिला और इस मामले पर चर्चा करने के लिए सदस्यों और कर्मचारियों की समिति ने एक बैठक की. सदस्यों ने बताया कि क्लब के वकील नोटिस का जवाब तैयार कर रहे हैं, जबकि प्रतिनिधि 7 जुलाई को एस्टेट ऑफिसर के सामने पेश होंगे.
नोटिस में एस्टेट ऑफिसर ने कहा कि सक्षम अधिकारी ने यह तय किया है कि रक्षा बुनियादी ढांचे को मजबूत और सुरक्षित करने, पब्लिक सेफ्टी, जरूरी संस्थागत जरूरतों, शासन से जुड़े बुनियादी ढांचे और जनहित की अन्य परियोजनाओं के लिए इस जगह की बहुत ज्यादा जरूरत है.
नोटिस में कहा गया है कि राष्ट्रीय राजधानी में मौजूद सरकारी जमीन को सरकारी फैसले और व्यापक जनहित के खिलाफ अनधिकृत कब्जे में नहीं रहने दिया जा सकता.
एस्टेट ऑफिसर ने कहा, "एक्ट की धारा 4 की उप-धारा (1) के तहत, मैं आपको निर्देश देता हूं कि आप 7 जुलाई को दोपहर 2.30 बजे या उससे पहले कारण बताएं कि आपको वहां से हटाने का आदेश क्यों न दिया जाए. धारा 4 की उप-धारा (2) के क्लॉज (b)(ii) के तहत, मैं आपको यह भी निर्देश देता हूं कि आप 7 जुलाई को दोपहर 2.30 बजे व्यक्तिगत सुनवाई के लिए मेरे सामने खुद आएं या किसी ऐसे अधिकृत प्रतिनिधि को भेजें, जो मामले से जुड़े सभी जरूरी सवालों के जवाब दे सके और आपके बताए गए कारण के समर्थन में सबूत भी पेश कर सके. अगर आप बताई गई तारीख और वक्त पर पेश नहीं होते हैं, तो मामले का फैसला आपकी अनुपस्थिति में (एक-पक्षीय रूप से) कर दिया जाएगा."
कहां है जिमखाना क्लब?
हरे-भरे लुटियंस दिल्ली के बीचों-बीच 2, सफदरजंग रोड पर स्थित यह बड़ी जगह इंपीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब लिमिटेड को एक सोशल और स्पोर्ट्स क्लब चलाने के लिए लीज पर दी गई थी. इस जगह को अब दिल्ली जिमखाना क्लब लिमिटेड के नाम से जाना जाता है. यह जगह शहर की सबसे कीमती और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जमीनों में से एक है, जो लोक कल्याण मार्ग पर प्रधानमंत्री आवास के बगल में स्थित है. यह हाई-सिक्योरिटी वाले प्रशासनिक इलाके में है, जहां केंद्र सरकार और रक्षा विभाग के कई अहम दफ्तर और संस्थान भी मौजूद हैं.
हमेशा के लिए पट्टे का समझौता यानी परपेचुअल लीज डीड की धारा 4 का हवाला देते हुए, नोटिस में कहा गया है कि इसमें लीज देने वाले (लेसर) के पास यह अधिकार है कि जब भी सार्वजनिक उद्देश्य के लिए जगह की जरूरत हो, तो वह उस जगह को वापस ले सकता है और उस पर दोबारा कब्जा कर सकता है.
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क्लब के सदस्य मेजर अतुल देव ने कहा कि यह नोटिस उन लोगों के लिए निराशाजनक है, जो कई साल से इस संस्थान से जुड़े हुए थे. उन्होंने कहा कि जिमखाना क्लब सिर्फ मनोरंजन की जगह नहीं थी, बल्कि यहां सदस्य दोस्तों से मिलते थे, परिवार के साथ वक्त बिताते थे और लंबे वक्त तक चलने वाले रिश्ते बनाते थे.
जिमखाना क्लब वर्कर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष नंदन सिंह नेगी ने कहा कि 600 से ज्यादा कर्मचारी अपनी आजीविका के लिए क्लब पर निर्भर हैं और इस उठापटक ने उनमें चिंता पैदा कर दी है.
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