सत्य निकेतन हादसे के बाद एक्शन में MCD, लक्ष्मी नगर-विश्वास नगर में अवैध PG पर शिकंजा

सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली में MCD ने लक्ष्मी नगर और विश्वास नगर में कार्रवाई शुरू की है. वहीं NHRC ने DU छात्रों के लिए पर्याप्त और किफायती हॉस्टल सुविधाओं की कमी पर संज्ञान लेते हुए दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव और UGC चेयरमैन को चार हफ्ते में एक्शन प्लान देने का निर्देश दिया है.

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सत्य निकेतन हादसा. (Photo:PTI) सत्य निकेतन हादसा. (Photo:PTI)

सुशांत मेहरा / अनीषा माथुर

  • नई दिल्ली,
  • 08 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 4:17 PM IST

सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली में MCD का एक्शन शुरू हो गया है. दिल्ली के लक्ष्मी नगर और विश्वास नगर में एमसीडी की कार्रवाई जारी है. लक्ष्मी नगर में चल रहे अवैध PG का स्ट्रक्चरल सर्वे करने के लिए एमसीडी की टीम पहुंची है. इसके साथ ही इस मामले पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्रों, खासकर दिल्ली के बाहर से आने वाले छात्रों के लिए पर्याप्त और किफायती हॉस्टल सुविधाओं की कमी का गंभीर संज्ञान लिया है. आयोग ने दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव और यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के चेयरमैन को हॉस्टल की सुविधा बढ़ाने के लिए जरूरी कदम उठाने का निर्देश दिया है.

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यह मामला साल 2025 में द नेटवर्क फॉर एक्सेस टू जस्टिस एंड मल्टीडिसिप्लिनरी आउटरीच फाउंडेशन की शिकायत के बाद आयोग के सामने आया था. शिकायत में बताया गया था कि दिल्ली यूनिवर्सिटी में करीब 72,000 अंडरग्रेजुएट छात्र हैं, जबकि हॉस्टल की सुविधा बेहद कम है. दिल्ली के बाहर से आने वाले छात्रों को अक्सर महंगे पीजी या निजी किराए के मकानों पर निर्भर रहना पड़ता है. इससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है और उनकी पढ़ाई और भलाई भी प्रभावित होती है.

आयोग ने इस मामले को छात्रों के मानवाधिकारों से जुड़ा मुद्दा माना था. 30 सितंबर 2025 को प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली NHRC बेंच ने मामले पर सुनवाई की और मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत संबंधित अधिकारियों से एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) मांगी.

रिपोर्ट देने के लिए दिया अतिरिक्त समय

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निर्धारित समय में रिपोर्ट नहीं मिलने पर आयोग ने संबंधित अधिकारियों को रिमाइंडर जारी किया और रिपोर्ट जमा करने के लिए अतिरिक्त समय दिया. इसके बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी की ओर से दी गई रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर लिया गया.दिल्ली यूनिवर्सिटी ने अपने जवाब में बताया कि उसके अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम 65 कांस्टीट्यूएंट/एफिलिएटेड कॉलेजों के जरिए चलाए जाते हैं. यूनिवर्सिटी ने दिल्ली के बाहर से आने वाले छात्रों के सामने रहने की दिक्कतों का भी जिक्र किया और हॉस्टल की नई सुविधाओं समेत इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार की जरूरत बताई.

हालांकि, आयोग ने कहा कि यूनिवर्सिटी के जवाब में शिकायत के मुख्य मुद्दे का पर्याप्त समाधान नहीं किया गया. जवाब में मौजूदा हॉस्टल क्षमता और इंफ्रास्ट्रक्चर, वास्तविक कमी, कितनी अतिरिक्त क्षमता की जरूरत है, नए हॉस्टल की जरूरत, वित्तीय जिम्मेदारियां और इसे लागू करने की निश्चित समयसीमा का स्पष्ट आकलन नहीं दिया गया.

मुख्य सचिव और UGC चेयरमैन को ठोस एक्शन प्लान देने का निर्देश

प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली NHRC बेंच ने अब दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव और UGC चेयरमैन को दिल्ली यूनिवर्सिटी के साथ समन्वय कर हॉस्टल की सुविधा बढ़ाने के लिए व्यापक, स्पष्ट और एक्शन आधारित रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया है.

आयोग ने साफ किया है कि प्रस्तावित योजना सिर्फ नए हॉस्टल बनाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए. इसमें मौजूदा हॉस्टल इंफ्रास्ट्रक्चर के अपग्रेडेशन, विस्तार, रिनोवेशन और क्षमता बढ़ाने की संभावनाओं के साथ नए या अतिरिक्त हॉस्टल की जरूरत और व्यवहार्यता का भी आकलन किया जाना चाहिए. प्रस्तावित रिपोर्ट में मौजूदा हॉस्टल क्षमता और इंफ्रास्ट्रक्चर का आकलन, रिनोवेशन, अपग्रेडेशन और विस्तार की संभावनाएं, नए या अतिरिक्त हॉस्टल की जरूरत और व्यवहार्यता, कॉलेजवार जरूरतों का आकलन, प्रस्तावित कदम, संस्थागत और वित्तीय जिम्मेदारियों का निर्धारण और स्पष्ट क्रियान्वयन समयसीमा शामिल करनी होगी.

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NHRC ने दिल्ली के मुख्य सचिव और UGC चेयरमैन को दिल्ली यूनिवर्सिटी के साथ समन्वय कर चार हफ्ते के भीतर स्पष्ट, समेकित और एक्शन आधारित रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया है. आयोग ने रिपोर्ट जमा करने की अंतिम तारीख 15 अक्टूबर 2026 तय की है.

किफायती रहने की सुविधाएं भी उपलब्ध हों

दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्रों के लिए अपर्याप्त हॉस्टल सुविधाओं को लेकर पिछले साल शुरू हुई कार्यवाही अब एक ठोस और समयबद्ध संस्थागत कार्रवाई की ओर बढ़ गई है. आयोग की पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उच्च शिक्षा तक पहुंच सिर्फ एडमिशन मिलने तक सीमित न रहे, बल्कि छात्रों के लिए पर्याप्त और किफायती रहने की सुविधाएं भी उपलब्ध हों.

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