दिल्ली के सत्य निकेतन में 5 मंजिला जर्जर इमारत गिरने से हुई 7 मौतों के बाद साउथ कैंपस में दहशत का माहौल है. DU के छात्र अपना-अपना सूटकेस और बोरिया-बिस्तर समेटकर वापस अपने घर (लखनऊ, राजस्थान, हरियाणा) लौटने को मजबूर हैं.
हादसे के बाद आउटस्टेशन छात्रों के परिवारों में खौफ है. यूपी के पूर्वी हिस्से और राजस्थान की कई छात्राओं ने बताया कि परिजनों के लगातार फोन आ रहे हैं. कई छात्र temporary तौर पर अपने रिश्तेदारों या हॉस्टलों में शरण ले रहे हैं.
मलबे के नीचे से वो कॉल और 4 घंटे का इंतजार
बिहार के 20 वर्षीय छात्र आदित्य ने मलबे में दबे-दबे अपनी बहन को फोन किया था कि दीदी, मेरी बैटरी खत्म हो रही है, मुझे बचा लो. AIIMS में भर्ती आदित्य सुरक्षित तो है, लेकिन परिजनों ने रेस्क्यू में हुई 4 घंटे की देरी पर गंभीर सवाल उठाए हैं.
फरार मालिक राजस्थान से गिरफ्तार
7 मौतों और दर्जनों घायलों के जिम्मेदार इमारत के मालिक हरिराम गुप्ता को दिल्ली पुलिस ने राजस्थान के भिवाड़ी से गिरफ्तार कर लिया है. मामले में मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दे दिए गए हैं और आसपास के जर्जर PG की जांच शुरू हो गई है.
₹25 हजार किराया, लेकिन सुरक्षा शून्य!
हादसे के बाद दुर्गाबाई देशमुख साउथ कैंपस मेट्रो स्टेशन के बाहर छात्रों ने जोरदार प्रदर्शन किया. छात्रों का आरोप है कि ब्रोकर और PG मालिक भारी-भरकम किराया वसूलते हैं, लेकिन जर्जर इमारतों में उनकी जान से खिलवाड़ किया जाता है.
सन्नाटे में डूबा सत्य निकेतन का 'स्टूडेंट हब': DU के वेंकटेश्वर, ARSD और मोतीलाल नेहरू कॉलेज के पास स्थित सत्य निकेतन की गलियां, जो कभी छात्रों की चहल-पहल से गुलजार रहती थीं, आज खौफ और खाली पड़े पीजी कमरों की गवाह बनी हुई हैं.
सत्य निकेतन के इस हादसे में सात परिवारों के चिराग बुझ गए हैं. अब प्रशासन कितनी भी औपचारिकताएं कर ले लेकिन वो बच्चे लौटकर अपनी मांओं के गले नहीं लगने वाले. फिर भी अब डीयू प्रशासन और सरकार चाहे तो दूर दराज से पढ़ने आए बच्चों की जिंंदगी को गंभीरता से लेकर आने वाली नई खेप को इस भय से मुक्ति दे सकती है.