20 हजार जवान, 300 CCTV, 7 लेयर की बैरिकेडिंग... CJP प्रोटेस्ट से पहले छावनी बनी दिल्ली

CJP के 10 अक्टूबर को होने वाले प्रदर्शन से पहले दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं. दिल्ली, मध्य दिल्ली और राजधानी की सीमाओं पर 20 हजार से ज्यादा सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाएंगे. जंतर-मंतर और आसपास के संवेदनशील इलाकों में 6,500 से ज्यादा जवान, 300 से अधिक CCTV कैमरे और सात स्तरों की बैरिकेडिंग की व्यवस्था की गई है.

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दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था के लिए पूरे इंतजाम किए गए हैं.(Photo-PTI) दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था के लिए पूरे इंतजाम किए गए हैं.(Photo-PTI)

अंशुल सिंह / हिमांशु मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 09 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 8:06 PM IST

20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के दौरान नई दिल्ली की सड़कों पर हंगामा हुआ था. उस समय प्रदर्शनकारी तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे. प्रदर्शन के बाद अब CJP के नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर एक बार फिर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की बात कही है. हालांकि, दिल्ली पुलिस ने इस धरने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है. पुलिस यह सुनिश्चित करने में जुटी है कि 20 जुलाई जैसी स्थिति दोबारा न बने.

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दिल्ली पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने और अपनी छवि को और नुकसान से बचाने के लिए विस्तृत योजना तैयार की है. नई दिल्ली जिले, मध्य दिल्ली और राजधानी की सीमाओं पर 20 हजार से ज्यादा सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाएंगे. पुलिस को निर्देश दिए गए हैं कि प्रदर्शनकारियों को नई दिल्ली जिले में प्रवेश करने से रोका जाए और वहां पहुंचने वालों को जल्द से जल्द हटाया जाए.

जंतर-मंतर, जनपथ, चुनाव आयोग और दिल्ली पुलिस मुख्यालय के आसपास करीब 1.5 किलोमीटर के दायरे को बेहद संवेदनशील माना गया है. इस क्षेत्र में 6,500 से ज्यादा सुरक्षाकर्मी तैनात होंगे. नई दिल्ली जिले के संवेदनशील स्थानों पर ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग की सुविधा वाले 300 से ज्यादा CCTV कैमरे लगाए गए हैं, ताकि निगरानी की जा सके और किसी भी अप्रिय स्थिति से तुरंत निपटा जा सके.

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 सात स्तरों की बैरिकेडिंग

जंतर-मंतर की ओर जाने वाली सड़क पर कम से कम सात स्तरों की बैरिकेडिंग की गई है. आखिरी कुछ बैरिकेड को वेल्डिंग करके आपस में जोड़ा गया है. संवेदनशील स्थानों पर लाउडस्पीकर भी लगाए गए हैं. इनके जरिए रिकॉर्डेड घोषणाएं करके लोगों को बताया जा रहा है कि प्रदर्शन की अनुमति नहीं है. लोगों से प्रदर्शन करने, नारे लगाने, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और पुलिसकर्मियों पर हमला करने से बचने की अपील की जा रही है.

दिल्ली पुलिस ने जागरूकता अभियान भी शुरू किया है. सामुदायिक केंद्रों, मस्जिदों और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) से लोगों तक यह संदेश पहुंचाने को कहा गया है कि 10 अक्टूबर को होने वाले प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई है. पुलिस नई दिल्ली और मध्य दिल्ली के होटलों व लॉज की भी जांच कर रही है. होटल संचालकों को बताया जा रहा है कि प्रदर्शन में शामिल होने के इरादे से दिल्ली आने वालों को पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है. एयरबीएनबी संचालकों और संपत्ति मालिकों से भी ऐसे लोगों को फ्लैट या संपत्ति नहीं देने और प्रदर्शन में शामिल होने के इरादे से आए लोगों की जानकारी पुलिस को देने को कहा गया है.

दिल्ली पुलिस सोशल मीडिया को लेकर एक्टिव

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दिल्ली पुलिस का एक और बड़ा ध्यान अपनी छवि को और नुकसान से बचाने पर है. 2, 3 और 4 अक्टूबर को हुए प्रदर्शनों के बाद सोशल मीडिया पर कुछ एडिट किए गए वीडियो सामने आए थे. इनमें पुलिस पर प्रदर्शन में शामिल एक महिला के साथ मारपीट और छेड़छाड़ करने के आरोप लगाए गए थे. ऐसी स्थिति दोबारा न हो, इसके लिए पुलिस ने सोशल मीडिया अभियान शुरू किया है.

प्रदर्शन के दौरान हर घटना की रिकॉर्डिंग सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस आयुक्त और उनसे वरिष्ठ अधिकारियों सहित पुलिसकर्मियों को बॉडी कैमरे दिए गए हैं. इसके अलावा, सैकड़ों फोटोग्राफर और वीडियोग्राफर नियुक्त किए गए हैं, ताकि प्रदर्शन और पुलिस की कार्रवाई को वास्तविक समय में रिकॉर्ड किया जा सके. इन वीडियो को गलत प्रचार का जवाब देने और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वालों के खिलाफ सबूत के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है.

नागरिकों के नाम पुलिस का पत्र

दिल्ली पुलिस ने नागरिकों के नाम एक खुला पत्र भी लिखा है. इसमें कहा गया है कि वर्दी पहनने वाला व्यक्ति भी इंसान है और उसके घर पर उसका परिवार इंतजार करता है. पत्र में कहा गया है कि वर्दी भले ही अलग हो, लेकिन इंसानियत एक जैसी रहनी चाहिए. दिल्ली पुलिस इन सभी इंतजामों को जमीन पर लागू करने की कोशिश कर रही है, ताकि नई दिल्ली जिले में कानून-व्यवस्था बनी रहे और पुलिस की छवि को और नुकसान न पहुंचे.
 

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