'… तो दोबारा बड़ा प्रदर्शन करेगी CJP', दिपके का ऐलान! SC के ऑर्डर पर जताई चिंता

सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद CJP ने छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के खिलाफ बड़ी चेतावनी दे डाली है. CJP के फाउंडर अभिजीत दीपके ने कहा है कि अगर प्रदर्शन में शामिल छात्रों को टारगेट किया गया तो वो फिर से बड़े पैमाने पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करेंगे. उन्होंने सरकार से अपील की है कि छात्रों को परेशान करना बंद किया जाए.

Advertisement
अभिजीत दिपके ने चेतावनी दी है कि छात्रों को परेशान न किया जाए (File photo. Credits: PTI) अभिजीत दिपके ने चेतावनी दी है कि छात्रों को परेशान न किया जाए (File photo. Credits: PTI)

अमित भारद्वाज

  • नई दिल्ली,
  • 28 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 9:18 PM IST

सुप्रीम कोर्ट की ओर से कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन से जुड़ी याचिकाओं पर दिए गए अंतरिम आदेश पर CJP ने कड़ा रुख अपनाया है. CJP के फाउंडर अभिजीत दीपके ने ऐलान किया है कि अगर प्रदर्शन में शामिल छात्रों को टारगेट किया गया तो वो फिर से प्रोटेस्ट शुरू कर देंगे.

अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'अगर पुलिस के हाथों स्टूडेंट्स को परेशान करना जारी रहा, तो कॉकरोच जनता पार्टी जल्द ही बड़े पैमाने पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करेगी. सरकार को स्टूडेंट्स को टारगेट करना और उन पर विच-हंटिंग बंद करनी चाहिए.'

Advertisement

CJP नेता सौरव दास ने भी सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने छात्रों से किया गया अपना वादा तोड़ा, तो उनके पास देशव्यापी आंदोलन दोबारा शुरू करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा.

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश नंबर 4 पर जताई गंभीर चिंता

सौरव दास ने अपने बयान में कहा कि CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच के पारित अंतरिम आदेश, खासतौर पर निर्देश संख्या 4, पूरे देश के लिए खतरे की घंटी है. इस निर्देश के तहत सरकारों को मौजूदा FIR के साथ आगे बढ़ने और जांच जारी रखने की अनुमति दी गई है.

CJP का कहना है कि ये निर्देश भारत सरकार के 25 जुलाई 2026 को देश के युवाओं को दिए गए उस भरोसे और गारंटी के बिल्कुल उलट है, जिसमें सभी FIR वापस लेने और किसी भी प्रदर्शनकारी को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से निशाना न बनाने का वादा किया गया था.

Advertisement

'आश्वासन के भरोसे खत्म किया था आंदोलन'

सौरव दास ने याद दिलाया गया कि 25 जुलाई के सरकारी आश्वासन और पूर्ण विश्वास के आधार पर ही कॉकरोच जनता पार्टी ने अपना विरोध प्रदर्शन वापस लिया था. लेकिन अब सीजेपी को ये शक है कि केंद्र सरकार और बीजेपी शासित राज्य सरकारें इस अदालती आदेश का इस्तेमाल व्यक्तिगत प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR को जारी रखने और उन्हें प्रताड़ित करने के लिए कर सकती हैं.

दास ने कहा कि शुरू से ही उनकी यही चिंता थी कि शांतिपूर्ण असहमति को दबाने और अपने राजनीतिक हितों को साधने के लिए अदालतों का सहारा लिया जा सकता है.

सरकारी वकीलों के रवैये पर उठाए सवाल

CJP ने इस बात पर भी ऐतराज जताया कि अदालत में अंतरिम आदेश का सरकारी वकीलों की ओर से कोई विरोध नहीं किया गया. जबकि केंद्र सरकार इस बात से पूरी तरह वाकिफ थी कि 25 जुलाई को एक समझौता हो चुका था और CJP के साथ बीती देर रात तक बातचीत जारी थी।

पार्टी ने कहा कि बिना पूरी जानकारी के आया ये अदालती आदेश पूरी तरह से नामंजूर है. हजारों युवाओं और छात्रों को दिए गए भरोसे को इस तरह कानूनी दांव-पेच के जरिए खत्म नहीं किया जा सकता. ये सीधे तौर पर जनता के भरोसे के साथ धोखाधड़ी है.

Advertisement

'कार्यपालिका के पास अब भी FIR वापस लेने का अधिकार'

सौरव दास ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के इस अंतरिम आदेश में ऐसा कुछ भी नहीं है जो केंद्र या राज्य सरकारों को FIR वापस लेने से रोकता हो, जैसा कि बिहार और असम की सरकारों ने करके दिखाया है. मामलों को वापस लेने या उन पर कार्रवाई न करने की शक्ति अभी भी कार्यपालिका के पास है.

उन्होंने कहा कि कोर्ट ने ये अनिवार्य नहीं किया है कि सरकारें एफआईआर पर कार्रवाई करें ही. इसलिए सरकार को 25 जुलाई के अपने वादे से मुकरने के लिए अदालत के आदेश को बहाना नहीं बनाना चाहिए.

यह भी पढ़ें: फिर आंदोलन की राह पर केजरीवाल... क्या E20 पर CJP जैसा विरोध खड़ा कर पाएंगे?

सीजेपी की कड़ी चेतावनी

कॉकरोच जनता पार्टी ने सरकार के सामने मांग रखी कि केंद्र और राज्य सरकारें सुप्रीम कोर्ट के सामने इस लिखित आश्वासन की शर्तों को तुरंत रखें, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और अदालत भविष्य में सही फैसला ले सके. इसके साथ ही प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज सभी एफआईआर तुरंत रद्द की जाएं. इसके अलावा युवाओं को भविष्य में किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई से सुरक्षा की गारंटी दी जाए.

दास ने चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार को अपने वादे पूरे करने की जो समय-सीमा दी गई थी, वो आज खत्म हो रही है. अगर सरकार अपने वादों से पीछे हटती है, तो छात्र और युवा शांत नहीं बैठेंगे और देश की सड़कें एक बार फिर युवाओं की आवाज से गूंज उठेंगी.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »