केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव को खुली चुनौती दी है. शाह ने कहा कि CEC और SIR को लेकर उठे विवाद पर भारतीय जनता पार्टी संसद में चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है. उन्होंने कहा कि पार्टी के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है और इसके लिए संसद का विशेष सत्र भी बुलाया जा सकता है. शाह का आरोप है कि विपक्ष बहस करना ही नहीं चाहता, इसलिए संसद नहीं चलने देता और सिर्फ हंगामा करता है.
विपक्ष का कहना है कि चुनावों में वोट चुराए गए. इसी पर जवाब देते हुए शाह ने राहुल गांधी को "राहुल बाबा" कहा और उनके साथ अखिलेश यादव का नाम लेकर कहा कि दोनों यहीं और अभी उनकी चुनौती स्वीकार करें.
शाह ने अपनी पार्टी की जीत का पूरा हिसाब भी गिनाया. उन्होंने कहा कि हरियाणा में भाजपा ने सबसे ज्यादा सीटें जीतकर सरकार बनाई. महाराष्ट्र में एनडीए को सबसे बड़ी हिस्सेदारी मिली और वहां भी सरकार बनी. बिहार में पहली बार भाजपा का मुख्यमंत्री बना. दिल्ली में तीन दशक बाद भाजपा की सरकार बनी. पुडुचेरी में पार्टी ने एक बार फिर सरकार बनाई. असम में भाजपा ने 100 सीटें जीतकर हैट्रिक लगाई. बंगाल के बारे में शाह ने कहा कि वहां ममता बनर्जी का पूरी तरह सफाया हो गया.
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शाह के मुताबिक बंगाल के नतीजों के बाद विपक्ष समझ गया है कि वह चुनाव नहीं जीत सकता. उन्होंने खेल की मिसाल देते हुए कहा कि जब कोई टीम मैच हार जाती है, तो उसे बैठकर और ज्यादा अभ्यास करना चाहिए. यही उम्मीद भी की जाती है. लेकिन राहुल बाबा अलग मिट्टी के बने हैं. यही बात अखिलेश और उनके साथ खड़े इंडिया गठबंधन के बाकी नेताओं पर भी लागू होती है. शाह का कहना है कि हार मानने की जगह ये लोग अंपायर पर बेईमानी का आरोप लगाने लगे और कहने लगे कि वोट चुरा लिए गए.
इसके बाद शाह ने सीधी चुनौती रखी. उन्होंने कहा कि भाजपा इस मुद्दे पर संसद में बात करने को तैयार है और उसके पास कुछ भी छिपाने को नहीं है. चाहें तो विशेष सत्र बुला लिया जाए. मगर शाह का दावा है कि विपक्ष का वहां बोलने का कोई इरादा ही नहीं है. उनके मुताबिक विपक्ष संसद को चलने नहीं देता और सिर्फ शोर मचाता है.
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