Gen Z Psychology: वर्क प्रेशर की नो टेंशन! मनोवैज्ञानिक ने बताया क्यों बेस्ट है Gen Z?

जेन जी को लेकर पुरानी पीढ़ियां तरह-तरह के सवाल उठाती रही हैं. मिलेनियल्स ने भी लगातार जेन जी का मजाक उड़ाया है, चाहे वह वर्कप्लेस पर काम करने का उनका तरीका हो, बात करने का अंदाज हो या उनसे जुड़ी कोई दूसरी छोटी-मोटी बात. लेकिन अब एक साइकोलॉजिस्ट ने जेन जी को लेकर अपना नजरिया सामने रखा है, जो आमतौर पर सामने आने वाली राय से बिल्कुल अलग है.

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क्या आने वाले वक्त में जेन जी बनेगी सबसे बेस्ट जेनरेशन क्या आने वाले वक्त में जेन जी बनेगी सबसे बेस्ट जेनरेशन

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 19 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 8:30 PM IST

क्या पुरानी पीढ़ियों की तरह आज की जेन जी भी उसी तरह दबाव में काम कर रही है? क्या वर्क कल्चर में पुरानी पीढ़ियों ने जिस तरह से खुद को खपाया है क्या जेन जी भी खुद को वैसे ही खपा रही हैं? पुरानी पीढ़ियों को लगता है कि जेन जी अपनी चीजों को लेकर कैजुअल है, ढीली है या लेजी है लेकिन जेन जी को लेकर एक साइकोलॉजिस्ट ने अपनी राय दी है. जो आमतौर पर दिए गए लोगों के राय से एकदम हटकर है. साथ ही उन्होंने जेन जी और उनके मेंटल हेल्थ को लेकर भी अपनी प्रतिक्रिया दी.

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साइकोलॉजिस्ट अनस खान इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट साझा करते हुए बताते हैं कि जेन जी अब तक की ग्रेटेस्ट जेनरेशन्स में से एक है. अपनी बात को रखते हुए उन्होंने इसके कारण भी बताए. अनस का कहना हैं कि पुरानी पीढ़ियां हर चीज के बारे में ध्यान रखने के लिए मजबूर थी. उन्हें दिखाना पड़ता था उनकी आस-पास हो रही चीजों से उन्हें फर्क पड़ता है. सिर्फ इसलिए ताकि वो सोसायटी में सर्वाइव कर सकें. 

फेक प्रोफेशनलिज्म को रिजेक्ट कर रही है जेन जी

अनस कहते हैं कि जेन जी पहली ऐसी जेनरेशन है जिसने मास लेवल पर फेक प्रोफेशनल्जिम, नकली उत्साह और काम करते करते खुद को खत्म कर देने वाली मानसिकता को रिजेक्ट किया है वो भी ऐसी नौकरी और कंपनी के लिए जो आपको एक हफ्ते में भी निकाल सकती है. 

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मेंटल हेल्थ को बहाना नहीं, अपनी सीमा मानती है जेन जी

मनोवैज्ञानिक अनस खान का कहना हैं कि जेन जी ने मेंटल हेल्थ को लेकर जागरूकता को बहाने के तौर पर नहीं, बल्कि अपनी सीमाएं तय करने के तरीके के तौर पर अपनाया है.

इस पीढ़ी ने अपने माता-पिता को रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पेंशन की उम्मीद में सालों तक काम करते और थकते हुए देखा है. इसलिए जेन जी ने तय किया कि वो ऐसा नहीं करेगी. उसे आलसी या काम में कमजोर कहना उसकी सोच को समझने में चूक करना है. जेन जी आलसी नहीं है, बल्कि वो काम को ज्यादा कुशलता से करना जानती है.

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60 घंटे काम करने की क्या जरूरत?

आखिर किसी को 60 घंटे काम करने की जरूरत क्यों होनी चाहिए, जब आधा काम ऑटोमेशन से किया जा सकता है? बचे हुए टाइम का यूज अपनी जिंदगी जीने के लिए क्यों नहीं किया जा सकता?

पहले की पीढ़ियां इसे अपनी जिम्मेदारी निभाना या आगे बढ़ने के लिए जरूरी मेहनत करना कहती थीं. लेकिन जेन जी इसे शोषण कहने से नहीं हिचकती.

तकलीफ सहना कोई गुण नहीं

अनस खान के मुताबिक, जेन जी की सबसे खास बात ये है कि वो समझती है कि तकलीफ सहना कोई गुण नहीं है. दुख और तनाव सहते रहना जरूरी नहीं है. व्यक्ति के पास ये चुनने का ऑप्शन होना चाहिए कि वो अपनी जिंदगी कैसे जीना चाहता है.

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इसी वजह से अनस खान का मानना है कि जेन जी एक शानदार पीढ़ी साबित होने वाली है. ये पीढ़ी काम करने से लेकर जिंदगी जीने तक के हर नियम को नए सिरे से लिख सकती है.

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