बॉलीवुड के तीन बड़े सुपरस्टार्स शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ की मुश्किलें बढ़ती हुई नजर आ रही हैं. महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने तंबाकू उत्पादों के खिलाफ अपनी सख्ती बढ़ाते हुए इन तीनों स्टार्स को 'विमल इलायची' विज्ञापन के सिलसिले में 'कारण बताओ' नोटिस जारी किया है. FDA का मानना है कि यह विज्ञापन, राज्य में प्रतिबंधित 'विमल पान मसाला' का ही सरोगेट प्रमोशन है. एफएसएस एक्ट (FSS Act) की धाराओं के तहत अब इन स्टार्स पर 10 लाख रुपये तक की पेनल्टी की तलवार लटक रही है.
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, महाराष्ट्र एफडीए (FDA) राज्य में तंबाकू और पान मसाले की बिक्री के खिलाफ एक्शन मोड में है. इसी कड़ी में अब शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ भी एफडीए की जांच के दायरे में आ गए हैं.
इसी हफ्ते जारी नोटिस में तीनों एक्टर्स से विमल इलायची विज्ञापन में उनकी भूमिका को लेकर जवाब मांगा गया है. FDA का मानना है कि यह एड 'विमल पान मसाला' ब्रांड का प्रचार करता है, जो फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट 2006 के तहत सरोगेट विज्ञापन की श्रेणी में आ सकता है. जानकारी के मुताबिक, एफडीए ने अजय देवगन को जुहू स्थित उनके घर, शाहरुख खान को बांद्रा वाले 'मन्नत' और टाइगर श्रॉफ को उनकी प्रोडक्शन कंपनी 'टाइगर श्रॉफ प्रोडक्शंस एलएलपी' के पते पर यह नोटिस भेजा है.
एफडीए के नोटिस के मुताबिक, विज्ञापन की शुरुआती जांच से साफ होता है कि यह 'विमल' ब्रांड को प्रमोट करता है, जो मुख्य तौर पर पान मसाला से जुड़ा हुआ है. बता दें कि महाराष्ट्र खाद्य सुरक्षा आयुक्त ने 13 जुलाई 2026 के अपने आदेश के जरिए FSS एक्ट 2006 की धारा 30(2)(a) के तहत राज्य में पान मसाला के निर्माण, स्टोरेज, सप्लाई और बिक्री पर एक साल के लिए बैन लगा रखा है.
FDA ने क्या कहा?
यह पहला मौका है जब महाराष्ट्र एफडीए ने सरोगेट विज्ञापनों के खिलाफ ऐसी सीधी कार्रवाई शुरू की है. एफडीए का कहना है कि विज्ञापन के तरीके, उसके डायलॉग्स, प्रोडक्ट नेम और मार्केट ट्रेंड को देखें तो यह साफ तौर पर एक बैन तंबाकू ब्रांड का ही अप्रत्यक्ष प्रमोशन लगता है, जिसे ये तीनों बड़े स्टार्स एंडोर्स कर रहे हैं.
बता दें कि महाराष्ट्र में 2012 से तंबाकू और निकोटिन वाले गुटखे-पान मसाले पर बैन लगा हुआ है. एफडीए कमिश्नर तुकाराम मुंढे के नेतृत्व में विभाग इस समय तंबाकू की बिक्री और प्रमोशन के खिलाफ सख्त एक्शन मोड में है. बैन प्रोडक्ट्स के संगठित नेटवर्क को तोड़ने के लिए एफडीए, पुलिस के साथ मिलकर 'मकोका' (MCOCA) के तहत भी केस दर्ज करा रहा है.
इस मामले में एफडीए (FDA) ने फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट 2006 की धारा 24 लागू की है, जो भ्रामक विज्ञापनों पर रोक लगाती है. इसके अलावा धारा 53 का भी इस्तेमाल किया गया है, जिसके तहत ऐसे किसी भी भ्रामक विज्ञापन का हिस्सा बनने वाली पार्टी पर 10 लाख रुपये तक की पेनल्टी लगाई जा सकती है.
मुस्तफा शेख