एक्टर प्रकाश राज एक बार फिर अपने बेबाक अंदाज को लेकर चर्चा में हैं. दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई और CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजे जाने पर उन्होंने सरकार को जमकर घेरा है. प्रकाश राज ने सवाल उठाया कि आखिर जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने की जरूरत ही क्यों पड़ी? क्या अब देश में अपने हक के लिए आवाज उठाना भी मुश्किल हो जाएगा?
प्रकाश राज ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो शेयर कर अपना गुस्सा जाहिर किया. वह इसी साल बेंगलुरु में CJP के प्रदर्शन में भी शामिल हुए थे. इस बार उन्होंने जंतर-मंतर पर लगी पाबंदियों, प्रदर्शनकारियों के साथ कथित बदसलूकी और विरोध के लिए दूसरी जगहों पर जाने की शर्तों पर सवाल उठाए.
‘जगह बदल सकते हो, देश की आवाज नहीं दबा सकते’
प्रकाश राज ने अपने वीडियो में साफ कहा कि सरकार प्रदर्शन की जगह बदल सकती है, लोगों को रोक सकती है, लेकिन उनकी आवाज को हमेशा के लिए दबा नहीं सकती. उन्होंने कहा- प्रोटेस्ट की साइट बदल सकते हैं आप, रोक सकते हैं, लेकिन इस देश की आवाज को आप नहीं रोक सकते. पूरा देश जंतर-मंतर बनेगा.
उनका कहना था कि किसी एक जगह पर प्रदर्शन रोक देने से लोगों के सवाल खत्म नहीं हो जाएंगे. लोग अपनी बात रखने और सत्ता से जवाब मांगने का रास्ता निकाल ही लेंगे.
प्रदर्शनकारियों से बदसलूकी का आरोप, पुलिस से पूछा- कार्रवाई क्यों नहीं?
प्रकाश राज ने प्रदर्शन के दौरान लोगों के साथ कथित दुर्व्यवहार को लेकर भी नाराजगी जताई. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों को पीटा जा रहा है और महिला प्रदर्शनकारियों के साथ भी गलत व्यवहार किया जा रहा है.
उन्होंने सरकार से सवाल किया कि अगर प्रदर्शन करने वालों पर कार्रवाई हो सकती है, तो उन लोगों के खिलाफ कदम क्यों नहीं उठाए जाते जिन पर प्रदर्शनकारियों को डराने या उनके साथ मारपीट करने के आरोप हैं?
प्रकाश राज ने कहा- आप इतने बेचैन क्यों हैं? आपने दिल्ली में गुंडे भेज दिए हैं. वे प्रदर्शनकारियों को पीट रहे हैं, महिला प्रदर्शनकारियों के साथ बदसलूकी कर रहे हैं. उनके लिए कोई हिरासत, कोई पुलिस केस नहीं है? हालांकि, अपने बयान में उन्होंने किसी व्यक्ति का नाम नहीं लिया.
‘सवाल पूछने के लिए भी पैसे देने पड़ेंगे?’
जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने के बाद सरकार ने रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और पूर्वी दिल्ली के CBD ग्राउंड जैसे वैकल्पिक स्थान बताए हैं. इसी मुद्दे पर प्रकाश राज ने रामलीला मैदान में प्रदर्शन करने की कथित फीस को लेकर भी सवाल खड़े किए.
उन्होंने दावा किया कि रामलीला मैदान पूरे साल में सिर्फ दो दिन मुफ्त उपलब्ध है और वहां प्रदर्शन करने के लिए 50 हजार रुपये की फीस के साथ 50 हजार रुपये की रिफंडेबल सिक्योरिटी जमा करनी पड़ती है. इस पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा- इस देश में सवाल पूछने के लिए भी पैसा देना पड़ता है.
प्रकाश राज यहीं नहीं रुके. उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि अगर सरकार प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर पर नहीं आने देना चाहती, तो उन्हें अंडमान-निकोबार द्वीप समूह, किसी रेगिस्तान या हिमालय की चोटी पर भेज दे. उनका यह तंज सरकार की उस नीति पर था, जिसके तहत जंतर-मंतर की जगह प्रदर्शन के लिए दूसरे ठिकाने तय किए गए हैं.
आखिर CJP नेताओं को क्यों भेजा गया तिहाड़ जेल?
CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को 13 अक्टूबर को राष्ट्रीय ध्वज लेकर जंतर-मंतर पहुंचने और बैरिकेडिंग के बावजूद बंद गेट पार कर परिसर में दाखिल होने के आरोप में हिरासत में लिया गया था. वे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में अनियमितताओं के आरोपों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे. 14 अक्टूबर को अदालत ने दोनों को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया, जबकि पार्टी सदस्य अजिंक्य शिंदे को निजी मुचलके पर रिहा कर दिया गया.
इससे पहले 10 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदर्शन के मद्देनजर दिल्ली में सुरक्षा कड़ी की गई थी और रिपोर्टों के मुताबिक, 2,000 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया था. इस दौरान पत्रकारों के साथ कथित धक्का-मुक्की, हिरासत और फोन छीने जाने की शिकायतें भी सामने आईं.
विवाद के बीच दिल्ली पुलिस ने 12 अक्टूबर को जंतर-मंतर को प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थल की सूची से हटाने का ऐलान किया और रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड व CBD ग्राउंड को वैकल्पिक जगहों के तौर पर बताया. पुलिस ने दिल्ली हाई कोर्ट में कहा कि यह फैसला सार्वजनिक सुरक्षा और व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं के बीच सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के मद्देनजर लिया गया.
डर रही सरकार
हालांकि, इस कदम ने विरोध करने के अधिकार और पत्रकारों की स्वतंत्र रिपोर्टिंग को लेकर बहस तेज कर दी है. CJP नेताओं की गिरफ्तारी पर अभिनेता प्रकाश राज ने भी सरकार को घेरते हुए सवाल उठाया कि क्या प्रदर्शन की जगह बदलने से लोगों की आवाज दबाई जा सकती है? उनका कहना है कि सरकार विरोध की जगह तय कर सकती है, लेकिन लोगों को सवाल पूछने से नहीं रोक सकती.
प्रकाश राज ने भी अपने वीडियो के आखिर में सरकार पर तंज कसते हुए कहा- इससे पता चलता है कि आप कितने डरे हुए हैं, कितने बेचैन हैं. चलो, देखेंगे. हम तो बस सवाल पूछ रहे हैं. उनका संदेश साफ था- सरकार प्रदर्शन की जगह बदल सकती है, लेकिन लोगों के मन में उठ रहे सवालों को खत्म नहीं कर सकती.
आजतक एंटरटेनमेंट डेस्क