2007 में आई 'आवारापन' आज भी इमरान हाशमी के करियर की सबसे यादगार फिल्मों में गिनी जाती है. दर्द से भरा किरदार, दिल छू लेने वाला म्यूजिक, दमदार डायलॉग और श्रेया शरण के साथ उनकी इमोशनल केमिस्ट्री ने इस फिल्म को एक कल्ट स्टेटस दिलाया था. ऐसे में जब 'आवारापन 2' का ऐलान हुआ तो फैंस की उम्मीदें सातवें आसमान पर पहुंच गईं. लेकिन रिलीज से महज 8 दिन पहले आया 85 सेकेंड का ट्रेलर उतने जवाब नहीं देता, जितने सवाल खड़े कर जाता है.
न कहानी समझ आई, न किरदारों की तस्वीर साफ हुई
ट्रेलर की शुरुआत इमरान हाशमी के गंभीर लुक से होती है. इसके बाद तेजी से बदलते शॉट्स, एक्शन, खून-खराबा और डार्क विजुअल्स नजर आते हैं. लेकिन 85 सेकेंड खत्म होने तक यह साफ नहीं हो पाता कि फिल्म की असली कहानी क्या है, इमरान का मिशन क्या है और आखिर उनका किरदार किस संघर्ष से गुजर रहा है.
सबसे बड़ी कमी यही महसूस होती है कि ट्रेलर किसी भी तरह की भावनात्मक पकड़ नहीं बना पाता.
डायलॉग नहीं, सिर्फ विजुअल्स का सहारा
जिस फिल्म की पहली किस्त अपने यादगार डायलॉग्स और इमोशनल सीन्स के लिए जानी जाती हो, उसके सीक्वल के ट्रेलर में लगभग कोई प्रभावशाली संवाद सुनाई नहीं देना थोड़ा चौंकाता है. पूरा ट्रेलर तेज रफ्तार एडिटिंग और एक्शन सीक्वेंस पर टिका हुआ नजर आता है. कई जगह ऐसा लगता है कि मेकर्स ने कहानी छिपाने की कोशिश में दर्शकों को फिल्म से जोड़ने वाला सबसे अहम पहलू ही पीछे छोड़ दिया.
इमरान हाशमी का इंटेंस लुक, लेकिन क्या सिर्फ वही काफी है?
इस बात में कोई शक नहीं कि इमरान हाशमी अपने स्क्रीन प्रेजेंस से प्रभावित करते हैं. लंबे बाल, रफ लुक और दर्द से भरे एक्सप्रेशन पुराने 'आवारापन' की याद जरूर दिलाते हैं. लेकिन सिर्फ नॉस्टैल्जिया किसी फिल्म को सफल बनाने की गारंटी नहीं होता. ट्रेलर में उनके किरदार की गहराई की झलक कम और स्टाइल ज्यादा नजर आती है.
शबाना आजमी ने खींचा ध्यान, दिशा पाटनी रहीं सीमित
ट्रेलर में सबसे ज्यादा असर अगर किसी सपोर्टिंग किरदार का दिखता है तो वह शबाना आजमी हैं. उनका निगेटिव शेड वाला अंदाज स्क्रीन पर अलग प्रभाव छोड़ता है और कुछ सेकेंड की मौजूदगी भी याद रह जाती है.
वहीं दिशा पाटनी की स्क्रीन प्रेजेंस काफी सीमित दिखती है. ट्रेलर के आधार पर उनके किरदार के बारे में ज्यादा कुछ समझ नहीं आता. फिलहाल उनकी मौजूदगी कहानी को आगे बढ़ाने से ज्यादा विजुअल अपील तक सीमित नजर आती है.
2007 की 'आवारापन' से तुलना क्यों होगी?
तुलना होना तय है, क्योंकि पहली फिल्म सिर्फ एक गैंगस्टर ड्रामा नहीं थी, बल्कि एक इमोशनल लव स्टोरी भी थी. उस फिल्म में इमरान हाशमी और श्रेया शरण की केमिस्ट्री दर्शकों के दिल में बस गई थी. 'तेरा मेरा रिश्ता', 'तो फिर आओ' और 'माहिया' जैसे गाने आज भी लोगों की प्लेलिस्ट का हिस्सा हैं. फिल्म का दर्द, संवाद और भावनात्मक सफर ही उसकी सबसे बड़ी ताकत थे.
इसके मुकाबले 'आवारापन 2' का ट्रेलर फिलहाल एक्शन और डार्क टोन पर ज्यादा फोकस करता दिखता है. इमोशनल कनेक्ट की झलक बहुत कम नजर आती है.
क्या रिलीज के बाद बदलेगी तस्वीर?
यह भी संभव है कि मेकर्स ने जानबूझकर कहानी और बड़े ट्विस्ट छिपाए हों. कई बार ट्रेलर पूरी फिल्म का सही प्रतिनिधित्व नहीं करता और असली सरप्राइज थिएटर में देखने को मिलते हैं. लेकिन फिलहाल 85 सेकेंड का यह ट्रेलर दर्शकों की उत्सुकता बढ़ाने के साथ-साथ कई सवाल भी छोड़ जाता है.
'आवारापन 2' का ट्रेलर इमरान हाशमी के फैंस के लिए नॉस्टैल्जिया जरूर लेकर आता है, लेकिन कहानी, दमदार डायलॉग और भावनात्मक जुड़ाव के मामले में यह पहली फिल्म जैसी मजबूत छाप छोड़ता नजर नहीं आता. अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या थिएटर में पूरी फिल्म ट्रेलर से कहीं ज्यादा दमदार साबित होगी, या फिर मेकर्स ने अपना सबसे बड़ा दांव सिर्फ इमरान हाशमी की पुरानी यादों पर लगाया है?
आरती गुप्ता