'बिस्मिल और बिस्मिल्ला खान में फर्क नहीं पता था', जब CM योगी ने सुनाया सपा कार्यकाल के शिक्षा मंत्री का किस्सा

सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पिछली सरकार में शिक्षा से लेकर नौकरियों तक व्यवस्था बदहाल थी और नकल करना जन्मसिद्ध अधिकार जैसा माहौल बना दिया गया था. उन्होंने राम प्रसाद बिस्मिल को बिस्मिल्लाह खान बताए जाने का किस्सा सुनाते हुए सपा पर हमला बोला और कहा कि अब यूपी में नीतिगत फैसलों में कोई भेदभाव नहीं होता.

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CM योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज उत्तर प्रदेश में पॉलिसी पैरालिसिस नहीं है. (Photo- Arun Kumar/ITG) CM योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज उत्तर प्रदेश में पॉलिसी पैरालिसिस नहीं है. (Photo- Arun Kumar/ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 03 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 7:23 PM IST

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मथुरा में आयोजित ‘पंचायत आजतक’ के मंच से समाजवादी पार्टी की पिछली सरकार पर तीखा हमला बोला. उन्होंने गोरखपुर में क्रांतिकारी पंडित राम प्रसाद बिस्मिल के नाम पर पार्क के उद्घाटन से जुड़ा एक किस्सा सुनाते हुए कहा कि उस समय के एक शिक्षा मंत्री ने मंच से राम प्रसाद बिस्मिल का नाम लेने के बजाय उन्हें शहनाई वादक उस्ताद बिस्मिल्लाह खान समझ लिया था.

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सीएम योगी ने कहा कि जब मंच से एक व्यक्ति ने उन्हें बताया कि यह उस्ताद बिस्मिल्लाह खान नहीं, बल्कि क्रांतिकारी पंडित राम प्रसाद बिस्मिल हैं, तो तत्कालीन मंत्री भड़के और बोले कि तुम भाजपाई हो, इसलिए पंडित राम प्रसाद बिस्मिल का नाम ले रहे हो.

मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने कहा कि जिस व्यक्ति को क्रांतिकारी पंडित राम प्रसाद बिस्मिल और शहनाई वादन के उस्ताद बिस्मिल्लाह खान के नाम में अंतर महसूस नहीं होता हो, वह उत्तर प्रदेश की स्कूली शिक्षा को कहां ले गया होगा, इसकी सहज कल्पना की जा सकती है.

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'नकल करना जन्मसिद्ध अधिकार था'

योगी आदित्यनाथ ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार के कार्यकाल में उत्तर प्रदेश में नकल और हर नौकरी में सेंध लगाना जैसे जन्मसिद्ध अधिकार बन गए थे. उन्होंने उस दौर की व्यवस्था को अंधेर नगरी, चौपट राजा बताते हुए कहा कि चारों ओर अराजकता का माहौल था.

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उन्होंने कहा कि उस समय योग्यता से ज्यादा पर्ची को महत्व दिया जाता था और विवेक से ज्यादा फतवे को महत्व दिया जाता था. भारत की विरासत के बजाय उस दौर में एक परिवार की चाटुकारिता को प्राथमिकता दी जाती थी. उत्तर प्रदेश अब उस दौर से निकल चुका है और पिछले साढ़े नौ वर्षों में प्रदेश में व्यवस्था में बड़ा बदलाव आया है.

'अब यूपी में पॉलिसी पैरालिसिस नहीं'

योगी ने कहा कि आज उत्तर प्रदेश में पॉलिसी पैरालिसिस नहीं है. उन्होंने मथुरा में बने क्षेत्र के पहले फाइव स्टार होटल का उदाहरण देते हुए कहा कि यह होटल भी पहले नीतिगत फैसलों में देरी का शिकार था. जब वह बृज तीर्थ विकास परिषद के गठन के बाद पहली बार मथुरा आए थे, तब कई प्रस्ताव लंबित पड़े थे. उन्होंने अधिकारियों से सवाल किया कि ये प्रस्ताव अब तक क्यों लंबित हैं.

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योगी के मुताबिक, उन्होंने अधिकारियों से कहा कि तीन दिन के भीतर निर्णय लेकर बताएं और अगर निर्णय नहीं कर सकते तो बोरिया-बिस्तर बांधो. उन्होंने कहा कि सरकार की एक नीति है और अधिकारियों को उसी नीति के दायरे में काम करना होगा.

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'फाइव स्टार होटल श्रद्धालुओं को मिला'

मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें खुशी है कि अब मथुरा में ताज ग्रुप का एक बेहतरीन फाइव स्टार होटल श्रद्धालुओं को मिला है. यह होटल क्षेत्र का पहला फाइव स्टार होटल है और इसके जरिए मथुरा आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी. उन्होंने कहा कि निवेश के लिए निर्णय लेने की क्षमता जरूरी है. उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश ने निवेश को बढ़ावा देने के लिए 36 सेक्टोरल पॉलिसियां लागू की हैं.

उन्होंने कहा कि निवेश के मामले में सरकार की नीति स्पष्ट है और इसमें किसी तरह का पिक एंड चूज नहीं होगा. ये मेरा है, ये पराया है जैसी सोच सरकार में नहीं है और सभी को समान अवसर दिया जाएगा. सरकार ने इसी सोच के अनुरूप नीतियां बनाई हैं. जो भी निवेशक इन नीतियों के अनुसार काम करेगा, वह उत्तर प्रदेश में निवेश कर सकता है और सरकार की ओर से दिए जाने वाले प्रोत्साहन का लाभ ले सकता है.

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