उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में वोटर लिस्ट को लेकर कांग्रेस की शिकायत के बाद चुनाव आयोग ने सख्त कदम उठाया है. जांच में कुछ मतदाताओं के पहचान नंबर यानी EPIC नंबर को ऑनलाइन सर्च करने पर किसी दूसरे मतदाता का ब्योरा दिखाई देने की पुष्टि हुई है. इसके बाद चुनाव आयोग ने जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों को मतदाता सूची के काम से हटाने के साथ उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं.
इस मामले को लेकर कांग्रेस ने लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी. पार्टी ने पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र में वोटरों के नाम बदलने का आरोप लगाया था. इसके बाद उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने शिकायत का संज्ञान लेते हुए जिला निर्वाचन अधिकारी से जांच कराई. जांच में मतदाता सूची में गड़बड़ी मिलने के बाद जिम्मेदारी तय करने और ऐसी गलतियों को ठीक करने के निर्देश दिए गए हैं.
जिम्मेदार अधिकारियों पर होगी कानूनी कार्रवाई
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने पीलीभीत विधानसभा क्षेत्र के निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी और वीआरसी ऑपरेटर को तत्काल मतदाता सूची के काम से हटाने का निर्देश दिया है. दोनों के खिलाफ लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई करने को कहा गया है. इसके अलावा, इस विधानसभा क्षेत्र के सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों की जिम्मेदारी को लेकर स्पष्ट रिपोर्ट मांगी गई है. इससे पता लगाया जाएगा कि मतदाता सूची में हुई गड़बड़ी के लिए कौन जिम्मेदार है. आयोग ने गड़बड़ी को तत्काल ठीक करने के निर्देश भी दिए हैं.
पीलीभीत की सभी विधानसभा सीटों की जांच
चुनाव आयोग ने जिला निर्वाचन अधिकारी को पीलीभीत की सभी विधानसभा सीटों की मतदाता सूचियों की गहराई से जांच करने को कहा है. इस जांच में देखा जाएगा कि EPIC नंबर ऑनलाइन सर्च करने पर कहीं दूसरे मतदाता का ब्योरा तो नहीं दिख रहा. इसकी विस्तृत रिपोर्ट दो दिन के भीतर सौंपनी होगी.
यूपी के सभी जिलों में भी होगी जांच
पीलीभीत में गड़बड़ी सामने आने के बाद चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश के सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को भी जांच के निर्देश दिए हैं. उन्हें अपने-अपने जिले की सभी विधानसभा सीटों की मतदाता सूचियों में इस तरह की त्रुटियों की जांच कर दो दिन में रिपोर्ट देनी होगी.
इस तरह अब जांच सिर्फ पीलीभीत तक सीमित नहीं रहेगी. पूरे प्रदेश में यह पता लगाया जाएगा कि मतदाता पहचान नंबर से जुड़ी ऐसी गड़बड़ी कहीं दूसरे जिलों में भी तो नहीं है.
समर्थ श्रीवास्तव