SC में ईडी-बंगाल सरकार में तीखी बहस, सॉलिसिटर जनरल बोले- 'सूबे में कानून का राज पूरी तरह फेल'

सुप्रीम कोर्ट में I-PAC रेड मामले पर ईडी और बंगाल सरकार में जोरदार बहस हुई. तुषार मेहता ने जांच में बाधा का आरोप लगाया, जबकि मेनका गुरुस्वामी ने राजनीतिक इस्तेमाल का विरोध किया.

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आई-पैक मामले पर सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई (File Photo: PTI) आई-पैक मामले पर सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई (File Photo: PTI)

अनीषा माथुर / संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 23 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 2:22 PM IST

सुप्रीम कोर्ट में I-PAC रेड मामले की सुनवाई के दौरान ईडी और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच जोरदार कानूनी जंग देखने को मिली. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने राज्य में 'कानून के शासन' की अनुपस्थिति का आरोप लगाया, वहीं सीनियर अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने अदालती कार्यवाही के राजनीतिक इस्तेमाल पर आपत्ति जताई. सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू होते ही माहौल गरमा गया. पश्चिम बंगाल सरकार की तरफ से पेश सीनियर एडवोकेट मेनका गुरुस्वामी ने आरोप लगाया कि अदालती कार्यवाही को सोशल मीडिया पर एक राजनीतिक दल द्वारा चुनाव प्रचार के हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है. उन्होंने सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता के लहजे पर भी आपत्ति जताई. 

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जवाब में SG मेहता ने कहा कि वह किसी के इशारे पर राजनीतिक नहीं बल्कि तथ्यों पर आधारित कानूनी दलीलें दे रहे हैं. उन्होंने कोर्ट से कहा कि पश्चिम बंगाल में एक खास पैटर्न के तहत जांच को बाधित किया जा रहा है और बाबासाहेब अंबेडकर ने कभी ऐसी स्थिति की कल्पना भी नहीं की होगी.

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि 8 जनवरी 2026 को कोयला तस्करी मामले की जांच के दौरान 10 ठिकानों पर छापेमारी की गई थी, जिसमें प्रतीक जैन का आवास भी शामिल था. ED का आरोप है कि अवैध कोयला खनन से मिले 20 करोड़ रुपये की 'प्रोसीड्स ऑफ क्राइम' को हवाला के जरिए I-PAC को ट्रांसफर किया गया था. SG मेहता ने सनसनीखेज दावा किया कि छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद सैकड़ों पुलिस अधिकारियों के साथ दोपहर 12:40 बजे परिसर में घुस गईं. उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने ED अधिकारियों से जबरन डिजिटल डिवाइस और दस्तावेज छीन लिए और कंप्यूटर सिस्टम का बैकअप रोक दिया.

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राज्य सरकार और पुलिस विभाग पर सवाल

सुनवाई के दौरान SG मेहता ने राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) और पुलिस कमिश्नर की मौजूदगी पर कड़े सवाल किए. उन्होंने कहा कि जब मुख्यमंत्री वहां पहुंचीं, तो DGP और कमिश्नर उनके साथ ऐसे खड़े थे जैसे वे उनके 'निजी सुरक्षा अधिकारी' हों. राज्य सरकार के उस हलफनामे पर भी तंज कसा गया, जिसमें कहा गया था कि मुख्यमंत्री Z+ कैटेगरी की सिक्योरिटी प्राप्त हैं, इसलिए अधिकारी वहां मौजूद थे. मेहता ने कहा कि मुख्यमंत्री के जाने के बाद भी DGP वहां रुके रहे, जो इस बात का सबूत है कि जांच को प्रभावित करने और सुबूत मिटाने करने की कोशिश की गई.

सॉलिसिटर जनरल ने 2019 की उस घटना का भी जिक्र किया, जब सीबीआई टीम तत्कालीन पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार से पूछताछ करने गई थी और मुख्यमंत्री धरने पर बैठ गई थीं. उन्होंने कहा कि बंगाल में एक पैटर्न बन गया है कि जब भी किसी ऐसे मामले की जांच होती है, जो मुख्यमंत्री को पसंद नहीं है, तो राज्य मशीनरी का दुरुपयोग किया जाता है. ईडी ने कोर्ट से मांग की है कि इस पूरे मामले और ईडी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर की जांच सीबीआई जैसी किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए, क्योंकि वे पश्चिम बंगाल पुलिस से न्याय की उम्मीद नहीं कर सकते.

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इस बीच, I-PAC के डायरेक्टर और को-फाउंडर विनेश चंदेल ने खुद के खिलाफ दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की है. एडिशनल सेशंस जज धीरेंद्र राणा ने इस पर ईडी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. इस मामले की अगली सुनवाई 29 अप्रैल को होनी है. सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी पक्षों की दलीलें सुनीं और अगली सुनवाई के लिए वक्त दिया.

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