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आई-पैक

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आई-पैक (I-PAC) यानी इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (Indian Political Action Committee) भारत की राजनीति में एक प्रभावशाली और पेशेवर चुनावी रणनीति संस्था के रूप में जानी जाती है. इसकी स्थापना वर्ष 2013 में प्रसिद्ध राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने की थी. आई-पैक का उद्देश्य राजनीति को डेटा, शोध और जमीनी फीडबैक के माध्यम से अधिक संगठित और प्रभावी बनाना रहा है.

आई-पैक ने पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर पहचान 2014 के लोकसभा चुनावों में बनाई, जब इसने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा के चुनावी अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. इसके बाद यह संस्था विभिन्न राज्यों और दलों के लिए काम करती रही. आई-पैक ने बिहार में जदयू, पंजाब में कांग्रेस, पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस, आंध्र प्रदेश में वाईएसआर कांग्रेस और दिल्ली में आम आदमी पार्टी जैसे कई दलों के साथ चुनावी रणनीति पर काम किया.

आई-पैक का काम केवल चुनावी प्रचार तक सीमित नहीं है. यह संस्था नीति निर्माण, जनसंवाद, सर्वेक्षण, डिजिटल कैंपेन, बूथ स्तर की रणनीति और सरकार बनने के बाद सुशासन मॉडल पर भी काम करती है. हजारों युवाओं की टीम जमीनी स्तर पर जाकर मतदाताओं की राय, समस्याएं और अपेक्षाएं जुटाती है, जिसके आधार पर नेताओं को रणनीतिक सुझाव दिए जाते हैं.

आई-पैक को खास तौर पर युवाओं को राजनीति से जोड़ने के लिए भी जाना जाता है. इसके “लीडरशिप डेवलपमेंट” और “नेशनल इंटर्नशिप प्रोग्राम” जैसे प्रयासों के माध्यम से देश के पढ़े-लिखे युवा नीति और राजनीति की प्रक्रिया को नजदीक से समझ पाते हैं.

हालांकि, आई-पैक पर यह आरोप भी लगते रहे हैं कि इससे राजनीति में पेशेवर कंपनियों का दखल बढ़ रहा है. इसके बावजूद यह तथ्य है कि आई-पैक ने भारतीय राजनीति में डेटा-ड्रिवन और रणनीतिक सोच को मजबूत किया है. आज आई-पैक आधुनिक भारतीय चुनावी राजनीति का एक अहम चेहरा बन चुका है.

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