कॉकरोच जनता पार्टी के संसद मार्च में युवाओं की भागीदारी और पुलिस से झड़पों के बाद आम आदमी पार्टी और कांग्रेस आमने-सामने आ गई हैं. पेपर लीक, शिक्षा और बेरोजगारी से जुड़े मुद्दे की लड़ाई को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दहलीज तक पहुंच दिया. राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने सड़क से संसद तक मोर्चा खोल रखा है.
राहुल गांधी और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का पीएम आवास के बाहर धरना देना और सड़कों पर डटे रहना. यह सिर्फ बीजेपी के खिलाफ लड़ाई नहीं है, बल्कि 'विपक्ष की धुरी' बनने की होड़ भी है. प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरने पर बैठकर राहुल गांधी की देशभर के युवाओं से उनके साथ आने की अपील की तो आम आदमी पार्टी ने सवाल खड़े कर दिए. आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने कांग्रेस पर सीजेपी के प्रदर्शन को कमजोर करने की साजिश करार दिया.
दिल्ली में छात्र मुद्दों और पेपर लीक को लेकर कांग्रेस का अचानक से 'आक्रामक आंदोलन मोड' में आना आम आदमी पार्टी के लिए चिंता का सबब बन गया. इसीलिए आम आदमी पार्टी के लिए सबसे बड़ी असहजता का कारण बनी हुई है. यही वजह कि राहुल-प्रियंका के उतरने से आम आदमी पार्टी बेचैन है, क्योंकि पंजाब चुनाव में कांग्रेस और AAP के बीच सियासी जंग होनी है?
सीजेपी के आंदोलन को AAP का समर्थन
पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार और बेरोजगारी के मुद्दे पर दिल्ली के जंतर-मंतर सीजेपी ने आंदोलन शुरू होने के बाद से आम आदमी पार्टी खुलकर साथ खड़ी रही. आम आदमी पार्टी की पूरी नींव ही 'सड़क से संसद तक' के आंदोलनों पर टिकी रही है. अन्ना आंदोलन से निकलकर सत्ता तक पहुंची है. आम आदमी पार्टी खुद को सड़क पर उतरकर लड़ने वाली इकलौती ताकत के रूप में पेश करती रही है.
दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी आम आदमी पार्टी के नेता पहुंचकर सीजेपी के आंदोलन को समर्थन किया. आंदोलनकारी युवाओं पर पुलिस की बर्बरता के आरोपों के साथ अरविंद केजरीवाल मंगलवार सुबह से आक्रामक मुद्रा में दिखे. कॉकरोच जनता पार्टी के संसद मार्च से विपक्षी दलों की गैरहाजिरी को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि प्रोटेस्ट में मेरे दोनों बच्चे सभी छात्रों के साथ कदम से कदम मिलाकर संसद मार्च कर रहे थे, जहां टीयर गैस के गोले छोड़े, वहीं मेरे बच्चे मौजूद थे.
केजरीवाल ने पंजाब में कुछ व्यस्तता का हवाला देते हुए खुद के प्रदर्शन में नहीं शामिल होने पर सफाई भी दी. केजरीवाल यहीं नहीं रुके, उन्होंने बड़ी संख्या में युवाओं को हिरासत में लिए जाने का मुद्दा उठाते हुए उन्हें हर तरह की कानूनी सहायता की घोषणा कर दी. इसके लिए एक वाट्सएप नंबर भी जारी किया. केजरीवाल घायल युवाओं से मिलने राम मनोहर लोहिया अस्पताल भी पहुंच गए. ऐसे में जब कांग्रेस ने अपनी पुरानी छवि को तोड़कर आक्रामक अंदाज में विरोध प्रदर्शन करने उतरी तो आम आदमी पार्टी का नैरेटिव कमजोर पड़ने लगा.
कांग्रेस छात्र आंदोलन को लेकर फ्रंटफुट पर उतरी
सीजेपी के आंदोलन से दूरी बनाकर चल रही कांग्रेस ने सोमवार को पुलिस एक्शन के बाद आक्रामक तेवर अपना लिया. कांग्रेस ने गूगल फॉर्म जारी करते हुए कानूनी सहायता की जरूरत वाले युवाओं को कांग्रेस के साथ जानकारी साझा करने की अपील कर दी. कांग्रेस के संचार महासचिव जयराम रमेश ने बताया कि युवाओं की मदद के लिए कांग्रेस ने एक विशेष लीगल टीम का गठन किया है. ऐसे में संसद के भीतर और संसद परिसर में मोदी सरकार पर हमलावर कांग्रेस ने जमीनी स्तर पर बढ़त बनाने की कवायद में जुट गई.
राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ अन्य कांग्रेसी नेता घायल युवाओं का हाल जानने के लिए राम मनोहर लोहिया अस्पताल पहुंच गए. इसके तुरंत बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत तमाम कांग्रेसी नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के घर से मार्च करते हुए प्रधानमंत्री के आवास के बाहर धरने पर बैठ गए. इस तरह जंतर-मंतर की लड़ाई को राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री के दहलीज तक पहुंचा दिया.
जंतर-मंतर की लड़ाई को पीएम के दहलीज तक पहुंची
राहुल गांधी ने देशवासियों से अपील करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री आवास के सामने धरने में शामिल हों, मोदी सरकार की जवाबदेही तय करें जब तक छात्रों-युवाओं को न्याय नहीं मिल जाता, तब तक कांग्रेस पार्टी, हमारे नेता और हम लोग पीएम आवास के सामने से हिलने वाले नहीं हैं. उन्होंने कहा कि दिन हो या रात, नरेंद्र मोदी को बाहर आना पड़ेगा. कांग्रेस के अन्य नेताओं ने राहुल गांधी की अपील को दोहराना शुरू कर दिया.
प्रधानमंत्री आवास के बाहर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने धरने पर बैठकर मोदी सरकार का खिलाफ बिगुल फूंक दिया तो यह अब सिर्फ एक छात्र प्रदर्शन न रहकर केंद्र सरकार के खिलाफ एक राष्ट्रीय अभियान बन गया है. राहुल का पीएम आवास के बाहर एक साथ ज़मीन पर बैठना यह दर्शाता है कि कांग्रेस ने युवा और बेरोजगारी के मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी कर ली है. इससे पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर युवाओं और बेरोजगारों के सबसे बड़े मुखर विकल्प के रूप में उभरने का मौका दे दिया है. राहुल, प्रियंका सहित कांग्रेस नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया. ऐसे में कांग्रेस जिस तरह से छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर आक्रामक तेवर अपनाया है और सड़क के संसद तक माहौल गर्मा दिया.
कांग्रेस के एक्टिव होने से आम आदमी पार्टी हुई बेचैन
आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस नेताओं के अलग धरने को पूरे आंदोलन को कमजोर करने की साजिश करार दिया. पार्टी नेता संजय सिंह कहा कि देश के करोड़ों युवाओं के लिए सोनल वांगचुक पिछले 23 दिनों से आमरण अनशन पर हैं. जंतर मंतर पर देश का युवा आंदोलन कर रहा है. कांग्रेस एक महीने से आंदोलन को गाली दे रही है, अब राहुल गांधी कह रहे हैं. जंतर मंतर पर नहीं, हमारे धरने में शामिल हों.
संजय सिंह ने सवाल उठाया कि आखिर युवाओं के आंदोलन को क्यों कमजोर करना चाहती है कांग्रेस? जंतर मंतर के आंदोलन में शामिल होने की अपील क्यों नहीं करती कांग्रेस. इसी तरह से आम आदमी पार्टी के दूसरे नेताओं ने भी राहुल और प्रियंका के आंदोलन पर सवाल खड़े किए, लेकिन सीजेपी ने संजय सिंह पर ही सवाल खड़े कर दिए. कांग्रेस के इस आक्रामक रुख से AAP की बेचैनी के तार सीधे पंजाब की जमीनी राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है.
पंजाब में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी की सीधी टक्कर
पंजाब में आम आदमी पार्टी सत्ता में है और वहाँ उसकी मुख्य विरोधी पार्टी कोई और नहीं, बल्कि कांग्रेस ही है. दिल्ली में छात्र आंदोलन का असर पंजाब के चुनाव में भी पड़ सकता है. कांग्रेस ने जिस तर फ्रंटफुट पर उतर आंदोलन की अगुवाई की, उससे पंजाब में AAP के लिए कांग्रेस के खिलाफ आक्रामक नैरेटिव बनाना बेहद मुश्किल हो जाता है.
राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी गोलबंदी की बातें भले होती हों, लेकिन पंजाब में AAP और कांग्रेस के कार्यकर्ता एक-दूसरे के आमने-सामने रहते हैं. कांग्रेस अगर केंद्र सरकार के खिलाफ जन-आंदोलनों का नेतृत्व अपने हाथ में ले लेती है, तो पंजाब में भगवंत मान सरकार के खिलाफ भी उसका हमलावर रुख और मजबूत होगा.
पंजाब कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग कहते हैं कि हमारे नेता राहुल गांधी ने युवाओं के हक की लड़ाई लंबे समय से लड़ रहे हैं और पेपर लीक के मुद्दे पर पहले से आक्रामक है और इसी मद्देनजर प्रधानमंत्री के आवास पर धरना देकर सरकार की चूल्हे हिला दिया है, जिसके चलते मोदी सरकार ही नहीं बीजेपी की बी-टीम वाले भी परेशान है.
पंजाब के विधानसभा चुनाव के लिए शह-मात का खेल
पंजाब में विधानसभा चुनाव होने हैं और छात्र आंदोलन का सियासी असर पड़ सकता है. पंजाब में पेपर लीक से लेकर रोजगार के मुद्दा गर्मा गया है. पंजाब के किसान भी अपनी मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं. दिल्ली की सत्ता से बाहर होने के बाद आम आदमी पार्टी का सियासी आधार पंजाब में ही बचा है. पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार है, कांग्रेस किसी भी सूरत में पंजाब की सत्ता में वापसी के लिए पूरी ताकत झोंक रखी है.
कांग्रेस का यह 'स्ट्रीट पॉलिटिक्स' वाला अवतार दिखाता है कि वह अब सिर्फ चुनावी बैठकों या बयानों तक सीमित नहीं रहना चाहती. वह आंदोलनों के रास्ते ही अपनी खोई हुई राजनीति को पानी चाहती है. आम आदमी पार्टी यह समझ रही है कि कांग्रेस अगर युवाओं के बीच मजबूत होती है तो उसके लिए पंजाब की सत्ता के बचाए रखना मुश्किल हो जाएगा.
कांग्रेस ने छात्र आंदोलन से राजनीति की यह जमीन पक्की कर ली, तो पंजाब में अपनी सत्ता बचाने और दिल्ली में अपनी खोई हुई पकड़ को मजबूत करने के आप के राजनीतिक समीकरण उलझ सकते हैं. यही वजह है कि कांग्रेस के हर एक बड़े प्रदर्शन के साथ AAP नेताओं के सियासी धड़कनें तेज होती दिखाई दे रही हैं. ऐसे में देखना है कि इस शह-मात के खेल में कौन किस पर भारी पड़ता है?
कुबूल अहमद