बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने अपनी नई टीम गठित करने के साथ ही आगामी चुनावी राज्यों पर फोकस कर दिया है. नितिन नवीन ने अपनी टीम में अनुभवी और बीजेपी को जीत दिलाने वाले नेताओं को प्रमुख सियासी मोर्चों पर तैनात करना शुरू कर दिया है. 2027 में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सहित सात राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं, जिनमें से तीन महत्वपूर्ण राज्यों में बीजेपी ने प्रभारी और सह-प्रभारी की नियुक्तियां कर दी हैं.
बिहार में प्रभारी के रूप में एनडीए को प्रचंड सफलता दिलाने वाले राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े को देश के सबसे महत्वपूर्ण राज्य उत्तर प्रदेश का प्रभार सौंपा गया है. इसी तरह हरियाणा में सत्ता विरोधी लहर के बावजूद लगातार तीसरी बार बीजेपी की वापसी कराने वाले डॉ. सतीश पूनिया को पंजाब का प्रभारी बनाया गया है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के गृह राज्य गुजरात का प्रभारी तरुण चुघ को बनाया गया है. उत्तर प्रदेश, पंजाब और गुजरात तीनों ही राज्य बीजेपी के लिए बेहद अहम हैं ऐसे में नितिन नवीन द्वारा इन नेताओं को प्रभारी और सह-प्रभारी बनाए जाने के पीछे गहरे राजनीतिक समीकरण छिपे हैं.
बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े को यूपी का प्रभारी बनाया है, जबकि जगदीश ईश्वरभाई पटेल को सह-प्रभारी के रूप में नियुक्त किया है. उत्तर प्रदेश भाजपा का सबसे मजबूत गढ़ होने के साथ-साथ सबसे जटिल चुनावी मैदान भी है. बिहार में सहयोगियों के साथ सीट शेयरिंग और जमीनी तालमेल को सफलतापूर्वक साधने वाले विनोद तावड़े के सामने यूपी में कई प्रमुख चुनौतियां होंगी.
विनोद तावड़े संगठन के सबसे भरोसेमंद और सुलझे हुए रणनीतिकारों में गिने जाते हैं. बिहार में राजनीतिक बदलाव और पार्टी की अंदरूनी खींचतान को संभालने के उनके ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हुए उन्हें उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी दी गई है. तावड़े मराठा/ओबीसी पृष्ठभूमि से आते हैं और जगदीश ईश्वरभाई पटेल कुर्मी समुदाय से हैं. यूपी में 2027 के विधानसभा चुनावों को देखते हुए गैर-यादव ओबीसी और कोर वोट बैंक के बीच संतुलन साधना प्राथमिकता है.
तावड़े और सह-प्रभारी जगदीश पटेल मिलकर संगठन, राज्य सरकार और जमीनी कैडर के बीच बेहतर तालमेल बिठाने का काम करेंगे. 2024 के आम चुनाव में बीजेपी को सबसे बड़ा झटका यूपी में ही लगा था. सपा के विनिंग फॉर्मूले 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) नैरेटिव के मुकाबले बीजेपी के पारंपरिक और गैर-यादव ओबीसी वोट बैंक को एकजुट रखना तावड़े की मुख्य चुनौती होगी. इसके अलावा सहयोगी दलों के साथ सीट शेयरिंग का फॉर्मूला तय करने का जिम्मा भी तावड़े के कंधों पर होगा.
हरियाणा के प्रभारी के रूप में ग्रामीण इलाकों और किसान बाहुल्य सीटों पर बीजेपी का जनाधार मजबूत करने वाले सतीश पूनिया सत्ता विरोधी लहर के बाद भी पार्टी की सरकार बनवाने में सफल रहे थे. इसी जीत के ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हुए बीजेपी ने उन्हें पंजाब का प्रभारी बनाया है. हालांकि हरियाणा के मुकाबले पंजाब एक बिल्कुल अलग और कठिन मैदान है.
पंजाब में भाजपा लंबे समय तक केवल शहरी सीटों तक सीमित रही है. ऐसे में पूनिया के सामने सबसे बड़ा काम ग्रामीण इलाकों, किसानों और सिखों के बीच पार्टी की स्वीकार्यता को बढ़ाना है. आम आदमी पार्टी (AAP), कांग्रेस और अकाली दल के बीच भाजपा के लिए अपना एक मजबूत और स्वतंत्र वोट बैंक स्थापित करना उनकी प्राथमिकता होगी. साथ ही, कांग्रेस और अन्य दलों से आए नेताओं के साथ भाजपा के मूल कैडर के बीच तालमेल बिठाकर संगठन का विस्तार करने की चुनौती भी उनके सामने है.
सतीश पूनिया राजस्थान के जाट समुदाय से आते हैं. वे राजस्थान भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और प्रमुख ओबीसी चेहरा माने जाते हैं. बीजेपी ने पंजाब में जाट और सिख ग्रामीण आबादी को साधने के लिहाज से उन्हें प्रभारी बनाया है, जो पार्टी के दीर्घकालिक प्लान का हिस्सा है. पंजाब में बीजेपी अपने दम पर एक मजबूत विकल्प बनने की कोशिश कर रही है, जिसे अमलीजामा पहनाने का काम सतीश पूनिया को करके दिखाना होगा.
बीजेपी शीर्ष नेतृत्व ने पंजाब से आने वाले राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ को पार्टी के केंद्रीय कार्यालय प्रभारी के साथ-साथ अब गुजरात का प्रभार भी सौंप दिया है, जो उनके सांगठनिक कौशल पर नेतृत्व के भरोसे को दर्शाता है. गुजरात भाजपा का सबसे मजबूत किला है, जहां पार्टी को लगातार अपनी सत्ता बनाए रखने, नए नेतृत्व को गढ़ने और 2027 के चुनाव में रिकॉर्ड प्रदर्शन को बरकरार रखने के लिए एक सख्त और जमीनी नेता की जरूरत थी.
बीजेपी के इस कदम से साफ संदेश मिलता है कि पार्टी 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर किसी भी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहती. गुजरात पीएम मोदी और अमित शाह का गृह राज्य है, जिसके चलते यह राज्य बीजेपी के लिए प्रतिष्ठा का विषय माना जाता है. ऐसे में 2027 की चुनावी कमान तरुण चुघ को सौंपी गई है.
बीजेपी हाईकमान ने केवल कागजी रणनीतिकारों की जगह उन चेहरों को जिम्मेदारी दी है जो सीधे कार्यकर्ताओं से संवाद स्थापित कर सकते हैं और कड़े सांगठनिक फैसले लेकर पार्टी की जड़ों को मजबूत कर सकें. उत्तर प्रदेश, पंजाब और गुजरात जैसे रणनीतिक राज्यों में पार्टी की अंदरूनी गुटबाजी खत्म कर एक एकजुट और आक्रामक नैरेटिव के साथ मैदान में उतरना सबसे बड़ा लक्ष्य होगा.
पार्टी नेतृत्व ने स्पष्ट संकेत दिया है कि जिन नेताओं ने प्रतिकूल परिस्थितियों वाले राज्यों में अपनी रणनीतिक कुशलता से परिणाम दिए हैं, उन्हें ही आगामी बड़े मुकाबलों के लिए आगे किया गया है. विनोद तावड़े जहां यूपी जैसे बड़े राज्य में सत्ता और जनाधार बनाए रखने के प्रबंधन पर काम करेंगे, वहीं सतीश पूनिया पंजाब जैसे राज्य में भाजपा के लिए नए राजनीतिक रास्ते तलाशेंगे.
कुबूल अहमद