उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी ने अपने पत्ते खोल दिए हैं. सपा से राज्यसभा के लिए बुधवार को प्रोफेसर रामगोपाल यादव और उद्योगपति धनराज परिमल नथवानी ने नामांकन दाखिल किया. इस दौरान सपा प्रमुख अखिलेश यादव सहित पार्टी के कई विधायक मौजूद रहे. अब AIMIM को एक बड़ा मौका मिल गया है और वह सपा को सियासी कठघरे में खड़ा करने में जुट गई है.
सपा द्वारा एनडीए सांसद परिमल नथवानी के बेटे धनराज नथवानी को राज्यसभा प्रत्याशी बनाए जाने के बाद विपक्ष ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं. ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के राष्ट्रीय प्रवक्ता शादाब चौहान ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर सीधा और तीखा हमला बोला है.
शादाब चौहान ने सपा की इस चुनावी रणनीति पर सवाल उठाते हुए इसे 'बीजेपी और सपा की अंदरूनी मिलीभगत' करार दिया. साथ ही उन्होंने सपा की मुस्लिम राजनीति पर भी जमकर हमला बोला.
AIMIM ने सपा पर लगाए गंभीर आरोप
AIMIM के राष्ट्रीय प्रवक्ता शादाब चौहान ने सपा के राज्यसभा प्रत्याशी के बहाने आरोप लगाया कि सपा का नया नारा बन चुका है, 'मुसलमानों को बीजेपी का डर दिखाकर वोट लो और राज्यसभा में बीजेपी नेताओं के परिवारों को जगह दो.' उन्होंने सवाल किया कि क्या मुसलमान सिर्फ सपा को वोट देने के लिए ही हैं?
शादाब चौहान ने सवाल उठाया कि क्या एनडीए सांसद के बेटे को सपा से राज्यसभा भेजने की यह 'डील' बीजेपी नेता और अखिलेश यादव की भाभी अपर्णा यादव के जरिए हुई है.
'क्या सपा में मुसलमान सिर्फ दरी बिछाएंगे?'
AIMIM नेता ने अखिलेश यादव पर तीखा तंज कसते हुए कहा कि मुसलमान बीजेपी के खिलाफ सपा को वोट देते हैं, लेकिन जब राज्यसभा भेजने की बात आती है तो सपा बीजेपी समर्थित परिवारों को मौका देती है. उन्होंने सवाल किया कि क्या सपा के मुस्लिम नेता केवल पार्टी में दरी बिछाने के लिए ही रह गए हैं?
अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए शादाब चौहान ने पूछा कि 'ये रिश्ता क्या कहलाता है?' उन्होंने दावा किया कि इस फैसले के बाद सपा का असली चेहरा जनता के सामने आ गया है और यह साबित हो गया है कि बीजेपी की असली बी-टीम कौन है.
धनराज परिमल नथवानी रिलायंस इंडस्ट्रीज के ग्रुप प्रेसिडेंट हैं और उनके पिता परिमल नथवानी एनडीए के सहयोग से झारखंड से राज्यसभा सांसद हैं. सपा द्वारा उन्हें यूपी से राज्यसभा का प्रत्याशी बनाए जाने के बाद से ही विपक्षी दल, खासकर AIMIM, सपा के 'पीडीए' और मुस्लिम राजनीति के दावों पर लगातार हमलावर हैं.
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