उत्तर प्रदेश सहित देश के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के बीच दिल्ली में 'इंडिया ब्लॉक' की बैठक बुलाई गई है. बुधवार को इंडिया ब्लॉक से जुड़े तमाम दल और बड़े नेता दिल्ली में जुट रहे हैं. इस बड़ी बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ बड़े फैसले लिए जाने की उम्मीद है. ऐसे में सभी की निगाहें 'INDIA ब्लॉक' की बैठक पर रहने वाली हैं.
एसआईआर में 13 करोड़ से ज्यादा लोगों के नाम काटे जाने और चुनाव आयोग के भीतर मचे बवाल के बाद ममता बनर्जी से लेकर उद्धव ठाकरे तक सभी ज्ञानेश कुमार और केंद्र सरकार के खिलाफ अपनी रणनीति तय करेंगे, लेकिन इस सबसे अहम बैठक से सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने दूरी बना ली है.
अखिलेश यादव ने ऐलान किया है कि वह इंडिया ब्लॉक की बैठक में नहीं जा रहे हैं, उनकी जगह पार्टी का कोई नेता सपा का प्रतिनिधित्व करेगा. लेकिन उनके इस ऐलान ने कांग्रेस के कान खड़े कर दिए हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि अखिलेश यादव इंडिया गठबंधन की बैठक से क्यों दूरी बना रहे हैं?
इंडिया ब्लॉक की बैठक से अखिलेश ने बनाई दूरी?
कांग्रेस की अगुवाई वाले इंडिया ब्लॉक की बुधवार को नई दिल्ली में बैठक बुलाई गई है, जिसमें तमाम विपक्षी नेता शिरकत करेंगे. सपा प्रमुख अखिलेश यादव खुद शामिल होने के बजाय पार्टी के अन्य नेताओं को भेज रहे हैं. सपा की मानें तो अखिलेश यादव राज्यसभा चुनाव को लेकर व्यस्त हैं.
पार्टी उम्मीदवारों के चयन के लिए उनकी कई बैठकें प्रस्तावित हैं, लेकिन पार्टी के इनसाइडर कह रहे हैं कि अखिलेश यादव इस वक्त कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से आमना-सामना करने से बचना चाहते हैं. अखिलेश यादव, मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी अगर एक साथ दिखे तो फिर चर्चा सीट शेयरिंग और कांग्रेस-सपा के बीच मचे घमासान पर आ जाएगी.
कांग्रेस के दबाव में न आने का सपा का प्लान?
कांग्रेस पार्टी लगातार सीट शेयरिंग का दबाव बना रही है कि जल्द से जल्द यूपी में सीटें तय की जाएं. कांग्रेस और सपा के बीच सीटों की संख्या और सीटों के नाम फाइनल हो जाएं, वरना देर होने से कांग्रेस पार्टी को भारी नुकसान हो जाएगा. इमरान मसूद से लेकर तमाम कांग्रेसी नेता यह बात कह रहे हैं.
सूत्रों की मानें तो अखिलेश यादव फिलहाल ऐसी किसी चर्चा से बचना चाहते हैं, वह तुरंत सीट शेयरिंग के मूड में नहीं हैं. माना जा रहा है कि इंडिया गठबंधन की बैठक से दूर रहने का फैसला फिलहाल सीट शेयरिंग को टालने से जुड़ा हुआ है. हालांकि, सपा की रणनीति है कि इंडिया ब्लॉक की बैठक में अपने वरिष्ठ नेताओं के जरिए कांग्रेस के सामने चार मांगें जरूर रखी जाएं.
अखिलेश सीट शेयरिंग को क्यों टाल रहे हैं?
अखिलेश यादव ने एक और खुलासा किया है कि मल्लिकार्जुन खड़गे से उनकी बात हुई है, यानी कांग्रेस पार्टी अब शीर्ष स्तर पर भी सीटों के बंटवारे पर दबाव बना रही है. ऐसे में चर्चा यह है कि अक्टूबर के पहले हफ्ते में अखिलेश यादव की मुलाकात मल्लिकार्जुन खड़गे से हो सकती है, लेकिन कांग्रेस को लेकर अखिलेश यादव बेहद सतर्क नजर आ रहे हैं.
अखिलेश यादव कांग्रेस के साथ सीट शेयरिंग की किसी भी बातचीत से फिलहाल बचना चाहते हैं. अखिलेश की कोशिश है कि गठबंधन और सीट बंटवारे को जितना ज्यादा टाला जा सके उतना टाला जाए, क्योंकि अगर अभी से सीट बंटवारे पर बैठकें शुरू हो गईं तो कांग्रेस पार्टी बड़ा दबाव बना लेगी. वहीं, कांग्रेस पार्टी लगातार समाजवादी पार्टी पर सीट शेयरिंग का दबाव बना रही है; इमरान मसूद ने तो सपा पर सीट शेयरिंग को लेकर तगड़ा दबाव बना रखा है.
सीट शेयरिंग पर कांग्रेस से सपा की चाहत
सपा और कांग्रेस नेताओं में गठबंधन को लेकर हो रही तीखी बयानबाजी के चलते गठबंधन पर सवाल खड़े होने लगे थे. ऐसे में रविवार को सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा था कि हम ऊपर-ऊपर से लड़ रहे हैं, अंदर से एक हैं, यह हमारी रणनीति का हिस्सा है. उन्होंने कहा कि जैसे बीजेपी ऊपर से दिखती है कि वह लड़ रही है और अंदर बीजेपी व उसके घटक दल एक हैं, कुछ वैसे ही हमारे और कांग्रेस के बीच भी है.
समाजवादी पार्टी चाहती है कि कांग्रेस पार्टी अपने जिताऊ कैंडिडेट और वे सीटें पहले बताए जिस पर उसका संगठन मजबूत है और वह खुद अपने दम पर चुनाव लड़ सकती है, उसके बाद ही आगे की सीट शेयरिंग पर बात होगी.
कांग्रेस और सपा में शह-मात का खेल
कांग्रेस पार्टी को लगता है कि अगर सीट शेयरिंग का मामला एक-दो महीने और टल गया तो फिर किसी दूसरे दल से गठबंधन की बात नहीं हो पाएगी. उसके बाद अखिलेश यादव अपनी शर्तों पर कांग्रेस से गठबंधन करेंगे, जिससे कांग्रेस के हाथ कुछ नहीं आएगा. इसलिए कांग्रेस पार्टी का दबाव है कि चाहे जो हो, अक्टूबर में ही सीटें और सीटों की संख्या तय हो जाए.
अखिलेश यादव के रुख को देखते हुए नहीं लगता कि वह कांग्रेस की शर्त पर सीट शेयरिंग के लिए तुरंत समझौते की मेज पर बैठने को तैयार हैं. अखिलेश यादव अपनी शर्तों पर गठबंधन चाहते हैं और कांग्रेस पार्टी अपनी शर्तों पर, ऐसे में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन के पेंच सुलझना आसान नहीं है. फिलहाल दोनों के बीच शह-मात का खेल जारी है.
कुमार अभिषेक