'जब एक लड़की घर-परिवार से लड़कर पढ़ाई के लिए निकलती है, तो उस पर दोहरी जिम्मेदारी होती है. 2018 से दिन-रात एक करके तैयारी कर रही हूं. लेकिन जब 4-4 परीक्षाएं देने के बाद हर बार पता चलता है कि पेपर बिक चुका था, तो हिम्मत टूट जाती है...' रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में JPSC और JSSC धांधली के खिलाफ अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठी महिला अभ्यर्थी अर्चना का यह बयान उन हजारों छात्राओं का प्रतिनिधित्व करता है, जो सरकारी नौकरी के सपने के साथ सालों से संघर्ष कर रही हैं.
2018 से तैयारी, 2021 का कोविड और 2024 का 'धोखा'
aajtak.in से बातचीत में अर्चना ने अपनी पढ़ाई का पूरा टाइमलाइन साझा किया.
2018 - 2021: 2018 से बेसिक तैयारी शुरू की. 2021 के कोविड महामारी के दौरान घर के एक कमरे में बंद होकर 10-10 घंटे पढ़ाई की.
2024 का पहला झटका: साल 2024 में जब पहला बड़ा एग्जाम दिया, तो पूरी परीक्षा धांधली और अनियमितताओं की भेंट चढ़ गई.
2025 में दीं 4 बड़ी परीक्षाएं... नतीजा फिर वही!
अर्चना बताती हैं कि उन्होंने हार नहीं मानी और 2025 में एक साथ 4-4 बड़ी परीक्षाओं में अपनी किस्मत आजमाई. ये परीक्षाएं फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर (Forest Range Officer), असिस्टेंट कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट (Assistant Conservator of Forest), 14वीं जेपीएससी (14th JPSC) और जेपीएससी बैकलॉग परीक्षा (Backlog Exam) परीक्षाएं थीं. लेकिन हर बार कहानी वही रही लीक, धांधली या कोई गड़बड़ी.
अर्चना कहती हैं कि हम लड़कियां हर परिस्थिति से समझौता करके पढ़ते हैं. 8 साल का समय कोई छोटा समय नहीं होता. लेकिन जब सिस्टम ही भ्रष्ट हो, तो हमारी मेहनत का क्या मोल? सरकार को लगता है कि लड़कियां पीछे हट जाएंगी, लेकिन आज से मैं भी अन्न-जल त्यागकर अनशन पर बैठ रही हूं. जब तक इंसाफ नहीं मिलेगा, हम पीछे नहीं हटेंगे.
अर्चना का कहना है कि लड़कियां मेहनत करती हैं लेकिन भ्रष्ट सिस्टम में उनकी मेहनत बेकार हो जाती है. न्याय मिलने तक वे अनशन पर डटी रहेंगी. यह आंदोलन हजारों संघर्षरत छात्राओं की आवाज़ बन गया है.
मानसी मिश्रा