एक नौकरी के लिए 16,000 आवेदन! क्या मुश्किल होता जा रहा है IT एंट्री लेवल में हायरिंग

साल 2026 में नए ग्रेजुएट्स के लिए IT सेक्टर में पहली नौकरी पाना मुश्किल होता जा रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, रिमोट IT सपोर्ट की एक नौकरी के लिए केवल दो हफ्तों में 16 हजार से ज्यादा आवेदन आ गए हैं. इससे पता चलता है कि नौकरी पाने के लिए युवाओं के बीच प्रतिस्पर्धा कितनी बढ़ गई है.

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फ्रेशर्स को नौकरी मिलने में आ रही है दिक्कत. फ्रेशर्स को नौकरी मिलने में आ रही है दिक्कत.

आजतक एजुकेशन डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 14 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 2:11 PM IST

साल 2026 में जॉब मार्केट में लगातार प्रतिस्पर्धा बढ़ती जा रही है. छंटनी और सीमित भर्तियों के कारण स्थायी नौकरी पाना मुश्किल हो रहा है.अमेरिकी रियल एस्टेट प्रौद्योगिकी कंपनी जिलो में रिमोट आईटी सपोर्ट की एक रोल के लिए केवल दो हफ्तों के अंदर 16,000 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए, जिससे एक नौकरी चाहने वालों की स्थिति सामने आई है. यह शुरुआती स्तर की नौकरी थी, जिसके लिए हाई स्कूल डिप्लोमा और 0 से 2 साल का अनुभव मांगा गया था. इसके लिए हर घंटे 27.30 अमेरिकी डॉलर से 43.50 अमेरिकी डॉलर तक की सैलरी देने की बात कही गई थी. आवेदनों की भारी संख्या देखकर एक उम्मीदवार ने इसे डिस्टोपियन हकीकत बताया.

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सोशल मीडिया पर शेयर किया एक्सपीरियंस 

लिंक्डइन पर आईटी सपोर्ट स्पेशलिस्ट की यह नौकरी देखने के बाद एक उम्मीदवार ने इसे लेकर अपना अनुभव शेयर किया है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट के r/recruitinghell ग्रुप पर अपना अनुभव शेयर किया है. पोस्ट के मुताबिक, दो हफ्तों में इस पद के लिए 16,000 से ज्यादा आवेदन आए. इनमें से 600 से ज्यादा आवेदन केवल पिछले 24 घंटों में आए थे.

इस नौकरी में कंप्यूटर की समस्याएं दूर करना, उपकरण तैयार करना, सॉफ्टवेयर इंस्टॉल करना और निगरानी में सपोर्ट टिकट संभालना जैसे सामान्य तकनीकी काम शामिल थे. उम्मीदवार ने माना कि घर से काम करने की सुविधा और सैलरी की वजह से इतनी बड़ी संख्या में लोगों ने आवेदन किया होगा.

हालांकि, उम्मीदवार की सबसे बड़ी चिंता आवेदन करने वालों के अनुभव को लेकर थी. पोस्ट के मुताबिक, लिंक्डइन पर दिखाया गया कि 25 प्रतिशत आवेदक वरिष्ठ स्तर के पेशेवर थे. अगर यह आंकड़ा सही है, तो आईटी क्षेत्र में कदम रखने की कोशिश कर रहे लोगों का मुकाबला कई साल का पेशेवर अनुभव रखने वाले उम्मीदवारों से हो रहा है.

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शुरुआती नौकरी के लिए सीनियर्स कर रहे आवेदन 

उम्मीदवार ने हालात को डिस्टोपियन हकीकत बताते हुए सवाल उठाया कि क्या ऐसी शुरुआती नौकरी पाना लगातार मुश्किल हो रहा है, जिसकी सैलरी से कोई व्यक्ति अपने दम पर जीवन चला सके. उसने यह सवाल भी उठाया कि शिक्षा और स्किल हासिल करने के बाद भी क्या रोजगार पाने का पारंपरिक रास्ता अब पर्याप्त नहीं रह गया है.

रेडिट पोस्ट में उम्मीदवार ने डिग्री लेने, प्रमाणपत्र हासिल करने और अनुभव जुटाने के बाद भी एक सामान्य पद के लिए हजारों लोगों से मुकाबला करने की निराशा बताई. उम्मीदवार ने माना कि यह उदाहरण बहुत अलग हो सकता है, लेकिन उसका कहना था कि यह नौकरियों के तेजी से प्रतिस्पर्धी होते बाजार से जुड़ी बड़ी चिंता दिखाता है. पोस्ट के आखिर में उसने पूछा कि क्या जरूरी योग्यता और अनुभव होने के बावजूद दूसरे उम्मीदवारों को भी नौकरी का उचित मौका मिलने में मुश्किल हो रही है.

मैं पूरी तरह से थक चुका हूं...

इस पोस्ट के बाद कई रेडिट यूजर्स ने अपना अनुभव शेयर किया है. खास तौर पर आईटी क्षेत्र में नौकरी खोजने के अपने अनुभव साझा किए. एक यूजर ने कहा कि लंबे समय से बनी अनिश्चितता ने उसे इतना थका दिया है कि पूरी स्थिति अब मजाक जैसी लगने लगी है. एक अन्य यूजर ने कहा कि उसने आईटी नौकरियों के लिए आवेदन करना बंद कर दिया है, क्योंकि शुरुआती स्तर के पदों पर भी कई प्रमाणपत्र या डिग्री मांगी जा रही है. वहीं, एक अन्य यूजर ने कुछ अलग ही नजरिया रखा. उसने कहा कि किसी पद के लिए आवेदन करने वाला हर व्यक्ति जरूरी शर्तें पूरी नहीं करता. कुछ लोग संबंधित स्किल नहीं होने के बावजूद आवेदन कर सकते हैं, जबकि कुछ विदेश में हो सकते हैं और वीजा प्रायोजन के योग्य नहीं होते.

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शुरुआती लेवल की नौकरियां पाने में आ रही हैं परेशानियां?

रिमोट वर्क और अच्छी सैलरी वाली नौकरियों के लिए बड़ी संख्या में युवा आवेदन कर रहे हैं. ऐसे में नए ग्रेजुएट्स के लिए नौकरी पाना और अनुभवी उम्मीदवारों के बीच अपनी पहचान बनाना मुश्किल हो रहा है. नैसकॉम की रिपोर्टों के मुताबिक, कंपनियां अब भर्ती के दौरान चुनिंदा स्किल्स पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं. AI, मशीन लर्निंग, डेटा एनालिटिक्स और साइबर सिक्योरिटी जैसे क्षेत्रों में स्किल्ड उम्मीदवारों की मांग बढ़ रही है. TCS, Infosys और HCLTech ने जून तिमाही में मिलकर करीब 19,000 एंट्री-लेवल कर्मचारियों की भर्ती की. हालांकि, नौकरी के अवसर हर क्षेत्र में समान नहीं हैं. 

JobSpeak के सितंबर 2026 के आंकड़ों के अनुसार, व्हाइट-कॉलर नौकरियों में सालाना आधार पर 2 फीसदी की बढ़ोतरी हुई, जबकि फ्रेशर्स की भर्ती में केवल 1 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई. दूसरी ओर, AI और मशीन लर्निंग से जुड़ी नौकरियों में 20 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. 

डिग्री के साथ प्रैक्टिकल स्किल्स भी जरूरी

GI Group Holding के 2026 के एक अध्ययन डिग्री से क्षमता तक में भी व्यावहारिक स्किल की अहमियत सामने आई. सर्वे में शामिल 64 फीसदी नियोक्ताओं ने बताया कि शुरुआती स्तर की नौकरी के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों में से 40 फीसदी से भी कम शुरुआती मूल्यांकन में सफल हुए.

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वहीं, 76 फीसदी नियोक्ताओं ने कहा कि टियर-2 और टियर-3 शहरों से उम्मीदवारों का चयन करते समय उनका व्यावहारिक अनुभव और काम करने की क्षमता अहम भूमिका निभाते हैं. इससे साफ है कि सिर्फ डिग्री या सर्टिफिकेट हासिल करना काफी नहीं है. इंटर्नशिप, प्रोजेक्ट्स और तकनीकी कौशल के जरिए अपनी क्षमता दिखाना भी अब बहुत जरूरी हो गया है. 

पहली नौकरी पाना बन रहा बड़ी चुनौती

किसी एक नौकरी के लिए हजारों आवेदन आने का मतलब यह नहीं है कि हर आवेदन करने वाला उम्मीदवार उस पद के लिए योग्य है. फिर भी बढ़ती प्रतिस्पर्धा और कंपनियों की चुनिंदा भर्ती प्रक्रिया के कारण फ्रेशर्स के लिए पहला मौका पाना मुश्किल हो रहा है. Reddit पर हुई चर्चा में भी IT सेक्टर की शुरुआती नौकरियों को लेकर युवाओं की चिंता सामने आई. हालांकि, एक नौकरी के लिए आए आवेदनों से पूरे रोजगार बाजार की स्थिति का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता, लेकिन यह जरूर दिखाता है कि पहली नौकरी पाने के लिए अब केवल डिग्री पर निर्भर रहना काफी नहीं हो सकता. 

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