जरा सोचिए, रोज सुबह ऑफिस जाने की भागदौड़ नहीं, बॉस के फोन और काम की डेडलाइन की चिंता नहीं लेकिन फिर भी हर महीने खाते में पूरी सैलरी आ रही है. नौकरी करने वाले किसी भी इंसान को यह बात हैरान कर सकती है. लेकिन कॉर्पोरेट जगत में ऐसा हो सकता है.
इसे गार्डन लीव (Garden Leave) के नाम से जानते हैं. इस व्यवस्था में कंपनी कर्मचारी को कुछ समय के लिए ऑफिस आने या काम करने से रोक सकती है, जबकि वह कंपनी का कर्मचारी बना रहता है और उसे अनुबंध के मुताबिक सैलरी मिलता रह सकता है. लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर कंपनी ऐसा क्यों करती है और क्या भारत में भी ऐसा होता है?
क्या है गार्डन लीव?
तो बता दें कि गार्डन लीव ऐसी व्यवस्था है, जिसमें कंपनी अपने कर्मचारी को नोटिस पीरियड के दौरान ऑफिस आने या नियमित काम करने से रोक देती है. इसके बावजूद कर्मचारी आधिकारिक तौर पर कंपनी में कार्यरत रहता है और उसे हर महीने सैलरी और अनुबंध में तय फायदा भी मिलता है.
ब्रिटेन की सरकार की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, गार्डन लीव के दौरान नियोक्ता कर्मचारी को ऑफिस आने से रोक सकता है या घर से काम करने के लिए कह सकता है. इस अवधि में उसे सामान्य सैलरी और अनुबंध के अनुसार मिलने वाले लाभ मिलते हैं. हालांकि, यह ब्रिटेन के नियमों की जानकारी है. भारत में इसकी कानूनी स्थिति को अलग से समझना जरूरी है. लेकिन इससे पहले समझते हैं कि आखिर कंपनी कर्मचारी को गार्डन लीव क्यों देती है?
कंपनी कर्मचारी को गार्डन लीव क्यों देती है?
गार्डन लीव देने के पीछे कई वजहें हो सकती हैं. यह फैसला हर कर्मचारी के मामले में एक जैसा नहीं होता.
कंपनी की गोपनीय जानकारी सुरक्षित रखने के लिए
किसी कर्मचारी के पास कंपनी की रणनीति, ग्राहकों की जानकारी, कारोबार की योजनाओं या दूसरे गोपनीय डेटा तक पहुंच हो सकती है, लेकिन अगर वह नौकरी छोड़कर किसी प्रतिस्पर्धी कंपनी में जाने वाला है, तो कंपनी नोटिस पीरियड के दौरान उसकी पहुंच सीमित कर सकती है.
नौकरी छोड़ने की प्रक्रिया के दौरान
जब कर्मचारी इस्तीफा दे चुका हो या उसका रोजगार समाप्त होने वाला हो, तो कंपनी उसे नोटिस पीरियड के बाकी बचे समय में कर्मचारी को काम से दूर रख सकती है. इस दौरान कर्मचारी कंपनी का हिस्सा बना रहता है, लेकिन उसे नियमित काम नहीं दिया जाता है.
ग्राहकों और कारोबार से जुड़े जोखिम कम करने के लिए
वहीं, कुछ पदों पर कर्मचारी के पास ग्राहकों, व्यावसायिक संपर्कों या भविष्य की योजनाओं से जुड़ी संवेदनशील जानकारी हो सकती है. ऐसे मामलों में कंपनी इन जानकारियों को कर्मचारियों तक सीमित करना चाहती है, तो भी वह गार्डन लीव दे सकती है.
काम नहीं करने पर भी पूरी सैलरी क्यों मिलती है?
गार्डन लीव के दौरान कर्मचारी को सैलरी इसलिए मिल सकती है, क्योंकि वह अभी भी कंपनी में नौकरी कर रहा होता है और उसका नोटिस पीरियड चल रहा होता है. अगर उसके नौकरी के कॉन्ट्रैक्ट और लागू नियमों के मुताबिक सैलरी मिलनी है, तो सिर्फ ऑफिस न जाने की वजह से उसकी सैलरी नहीं रोकी जा सकती है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि कंपनी किसी कर्मचारी को हमेशा बिना काम के सैलरी देती रहेगी. गार्डन लीव कितने समय तक चलेगी और इस दौरान कितनी सैलरी व अन्य सुविधाएं मिलेंगी, यह नौकरी के कॉन्ट्रैक्ट, कंपनी की, पॉलिसी और लागू कानून पर निर्भर करता है.
क्या भारत में भी गार्डन लीव का कॉन्सेप्ट?
भारत की बात करें, तो कुछ कंपनियां रोजगार अनुबंध की शर्तों के तहत गार्डन लीव का इस्तेमाल करती हैं. रोजगार और श्रम कानून से संबंधित कानूनी मार्गदर्शिका में बताया गया है कि भारतीय कानून में गार्डन लीव के लिए अलग से कोई व्यवस्था नहीं हैं और इसका इस्तेमाल आमतौर पर अनुबंध की शर्तों के आधार पर किया जाता है. इसलिए यह मानना भी सही नहीं होगा कि भारत में हर कर्मचारी को गार्डन लीव या इस दौरान पूरी सैलरी मिलने का अधिकार नहीं है. किसी कर्मचारी को यह सुविधा मिलेगी या नहीं, यह उसके रोजगार अनुबंध, कंपनी की शर्तों और संबंधित परिस्थितियों पर निर्भर कर सकता है.
आजतक एजुकेशन डेस्क