भारत की रक्षा तैयारियों में एक महत्वपूर्ण सिफारिश सामने आई है. संसदीय स्थायी समिति ने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी DRDO की अगली पीढ़ी की क्षमताओं पर जोर देते हुए महत्वपूर्ण और नई टेक्नोलॉजी के लिए अलग बजट हेड बनाने की सिफारिश की है. इसका मकसद हाइपरसोनिक मिसाइलें, छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान और सुपरसोनिक ग्लाइड हथियार जैसी भविष्य की प्रणालियों के विकास को तेज करना है.
समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि डीआरडीओ वैश्विक रक्षा प्रगति के साथ कदम मिलाकर चलने के लिए अगली पीढ़ी की क्षमताओं पर ध्यान केंद्रित कर रहा है. यह कदम आत्मनिर्भरता बढ़ाने और नेटवर्क केंद्रित युद्ध के युग में भारत की रणनीतिक स्थिति मजबूत करने की दिशा में उठाया गया है.
यह भी पढ़ें: चीन-अमेरिका से आगे निकलेगा भारत, फ्रांस के साथ बनाएगा 6th जेनरेशन फाइटर जेट
समिति ने सुपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल प्रणालियों को प्राथमिकता क्षेत्र बताया है. ये सिस्टम लॉन्च के बाद सुपरसोनिक या हाइपरसोनिक गति के साथ ग्लाइड और मैन्यूवर करने की क्षमता रखते हैं. इससे इन्हें पकड़ना और रोकना बहुत मुश्किल हो जाता है. पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइलों के मुकाबले ये ज्यादा मैन्यूवर करती हैं. कम ऊंचाई पर उड़ सकती हैं.
समिति का कहना है कि ग्लाइड मिसाइल प्रौद्योगिकी में स्वदेशी अनुसंधान से रणनीतिक तैयारी मजबूत होगी. नेटवर्क केंद्रित और क्लाउड सक्षम युद्ध के दौर में यह क्षमता निर्णायक साबित हो सकती है. पर्याप्त फंडिंग, समयबद्ध लक्ष्य और परीक्षण बुनियादी ढांचे की जरूरत पर जोर दिया गया है.
हाइपरसोनिक हथियारों के फायदे
रक्षा मंत्रालय ने समिति को बताया कि डीआरडीओ का हाइपरसोनिक पर काम आगे बढ़ रहा है. हाइपरसोनिक हथियार या मिसाइलें मैक 5 से ज्यादा गति से यात्रा करती हैं और कम ऊंचाई पर उड़ती हैं. ये अधिक मैन्यूवरेबल होती हैं जिससे मौजूदा डिफेंस सिस्टम से इन्हें रोकना लगभग असंभव हो जाता है.
यह भी पढ़ें: दिल्ली में मॉनसून का प्रकोप, जमकर बरसे बादल... 15 साल का रिकॉर्ड टूटा
ये दुश्मन को बहुत कम निर्णय या प्रतिक्रिया समय देती हैं. अप्रत्याशित कोण से हमला करने की क्षमता रखती हैं. अपनी विशाल ऊर्जा से मजबूत लक्ष्यों को भेदकर नष्ट कर सकती हैं. भारत में हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल और क्रूज मिसाइलों पर काम चल रहा है. डीआरडीओ ने स्क्रैमजेट इंजन के लंबे परीक्षण भी किए हैं जो इन प्रणालियों के लिए आधार तैयार करते हैं. ये हथियार रणनीतिक निवारक क्षमता बढ़ाएंगे और विरोधियों के लिए चुनौती पैदा करेंगे.
रणनीतिक महत्व और भविष्य की दिशा
आज के युद्ध में गति, चपलता और अनप्रेडक्टिबिलिटी बहुत मायने रखती है. हाइपरसोनिक हथियार इन जरूरतों को पूरा करते हैं. भारत रूस, रूस और चीन जैसे देशों के साथ इस क्षेत्र में कॉम्पीटिशन कर रहा है. स्वदेशी क्षमता विकसित करने से बाहरी निर्भरता घटेगी और स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी बढ़ेगी.
समिति की सिफारिशें सरकार को स्पष्ट दिशा देती हैं कि इन परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जाए. परीक्षण सुविधाओं का विस्तार और उद्योग भागीदारी भी महत्वपूर्ण होगी. अगर ये सिफारिशें लागू होती हैं तो भारत भविष्य के युद्धक्षेत्र में मजबूत स्थिति में होगा. नेटवर्क केंद्रित युद्ध में जो देश इन तकनीकों में आगे रहेगा, वह लाभ में रहेगा.
मंजीत नेगी