रिजिम चेंज से कुर्द विद्रोह और न्यूक्लियर ऑप्शन तक... ईरान में ट्रंप का एंडगेम क्या है? मिडिल ईस्ट के एक्सपर्ट इसे कैसे देख रहे

ट्रंप का ईरान में एंडगेम क्या है? जंग के दूसरे हफ्ते में ट्रंप रिजीम चेंज, IRGC से सौदा, कुर्द विद्रोह, न्यूक्लियर हमला और जमीन पर सैनिक भेजने जैसे प्लान बदल रहे हैं. एक्सपर्ट्स कहते हैं रिजीम चेंज फेल हो गया क्योंकि खामेनेई के बेटे मोजतबा को नया सुप्रीम लीडर बना दिया गया. ईरान अभी मजबूत है. सबसे संभावित रास्ता जबरदस्ती सौदा है. इजरायल पूरे मिडिल ईस्ट को नया आकार देना चाहता है.

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डोनाल्ड ट्रंप ईरान को लेकर लगातार बयान बदल रहे हैं. पता नहीं चल रहा कि उनका एंडगेम क्या है. (Photo: ITG) डोनाल्ड ट्रंप ईरान को लेकर लगातार बयान बदल रहे हैं. पता नहीं चल रहा कि उनका एंडगेम क्या है. (Photo: ITG)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 10 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 1:07 PM IST

अमेरिका और इजरायल के साथ मिलकर ईरान से जंग शुरू किए अब दूसरा हफ्ता चल रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हर दिन अपना टारगेट बदल रहे हैं. कभी वे कहते हैं कि ईरान का पूरा सिस्टम बदल देंगे तो कभी कहते हैं कि ईरानी नेता खुद सौदा कर लें. मिसाइलें गिर रही हैं, हजारों लोग मर चुके हैं लेकिन वॉशिंगटन अभी तक साफ नहीं बता पाया कि इस युद्ध का आखिरी मकसद क्या है. मिडिल ईस्ट के एक्सपर्ट्स कह रहे हैं कि ट्रंप का प्लान कई बार गलत साबित हो रहा है. ईरान ज्यादा मजबूत निकल रहा है.

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रिजीम चेंज: ईरानी सत्ता को पूरी तरह तोड़ने का प्लान

28 फरवरी को हमले शुरू होते ही सबसे पहले ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई को मार दिया गया. वे 37 साल से देश चला रहे थे. ट्रंप ने कभी सीधे रिजीम चेंज शब्द नहीं बोला लेकिन एक्सपर्ट्स कहते हैं कि यही असल मकसद था. पाकिस्तान-चाइना इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर मुस्तफा हाइदर सईद बताते हैं कि अमेरिका चाहता था कि खामेनेई के मरते ही ईरानी सरकार गिर जाए और लोग सड़कों पर विद्रोह कर दें. 

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दोहा इंस्टीट्यूट के प्रोफेसर मुहनाद सलूम कहते हैं कि ट्रंप ने सोचा था कि सिर और शरीर के बड़े हिस्से को हटा देने से पूरा सिस्टम ढह जाएगा. लेकिन हकीकत कुछ और है. कई बड़े कमांडर मर गए फिर भी ईरान की संस्थाएं अब भी मजबूत हैं. रविवार को खामेनेई के 56 साल के बेटे मोजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर बना दिया गया. ट्रंप की गलत गणना थी क्योंकि ईरान बहुत लंबे युद्ध लड़ने की ताकत रखता है.

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IRGC और ईरानी डिप्लोमैट्स से सौदा करने की कोशिश

युद्ध शुरू होते ही ट्रंप ने ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी आईआरजीसी से कहा कि हथियार डाल दो, हम तुम्हें माफ कर देंगे. बाद में उन्होंने ईरानी डिप्लोमैट्स से भी कहा कि पक्ष बदल लो. लेकिन आईआरजीसी अब भी ईरान की जवाबी हमलों का नेतृत्व कर रहा है. 

डिप्लोमैट्स ने खुला पत्र लिखकर ट्रंप की पेशकश ठुकरा दी. प्रोफेसर सलूम कहते हैं कि आईआरजीसी ने नए सुप्रीम लीडर को पूरा समर्थन दे दिया है. ट्रंप ने आईआरजीसी को आतंकवादी संगठन घोषित कर रखा है इसलिए दोनों तरफ बातचीत की कोई गुंजाइश नहीं है.

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ईरान की सेना को पूरी तरह खत्म करने का लक्ष्य

ट्रंप बार-बार कह रहे हैं कि ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल, मिसाइल फैक्टरियां और नौसेना को नष्ट कर देंगे. अमेरिका और इजरायल ने ईरान के युद्धपोतों पर हमले किए. मिसाइल ठिकानों को उड़ा दिया. अब ईरानी हवाई क्षेत्र पर कब्जा करने का दावा कर रहे हैं. लेकिन सलूम कहते हैं कि सिर्फ हथियार नष्ट करने से राजनीतिक हल नहीं निकलेगा. हवा से हमला करके कोई नई सरकार नहीं बनाई जा सकती.

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अपनी सरकार ले लो... लेकिन नेता हम चुनेंगे

ट्रंप ने ईरान के लोगों से कहा कि जब हम खत्म कर दें तो अपनी सरकार खुद संभाल लो. बाद में उन्होंने कहा कि कोई भी ईरानी नेता आगे आ सकता है लेकिन अमेरिका के पूर्व शाह के बेटे रेजा पहलवी को ज्यादा तवज्जो नहीं दी. फिर अचानक ट्रंप ने मोजतबा खामेनेई को अस्वीकार्य बता दिया. कहा कि नया नेता चुनने में हमारा भी कहना होगा.

6 मार्च को ट्रंप ने लिखा – ईरान के साथ कोई सौदा नहीं, सिर्फ बिना शर्त समर्पण. लेकिन ईरान का जवाब साफ है – बमबारी के बीच कोई बातचीत नहीं, कोई बाहरी नेता नहीं. एक्सपर्ट्स कहते हैं कि मोजतबा को चुनकर ईरान ने ट्रंप को सीधा जवाब दिया है.

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कुर्द विद्रोह या आक्रमण का प्लान

ट्रंप ने कुर्द लड़ाकों से भी बात की थी कि वे ईरान की सेना पर हमला करें. अमेरिका इराक में कुर्दों के साथ संबंध रखता है लेकिन ईरान के अंदर कुर्द आक्रमण बहुत मुश्किल है. सलूम कहते हैं कि ईरानी कुर्द समूहों के पास न तो ताकत है, न एकता और न ही लॉजिस्टिक्स. अगर कुर्दों को आगे बढ़ाया गया तो तुर्की बहुत नाराज होगा. अमेरिका को दूसरा संकट झेलना पड़ेगा.

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जमीन पर सेना भेजने का विकल्प

ईरान के विदेश मंत्री ने कहा कि अगर अमेरिका जमीन पर उतरना चाहे तो हम तैयार हैं. ट्रंप ने इसे पूरी तरह खारिज नहीं किया लेकिन न्यू लाइन्स इंस्टीट्यूट के कमरान बोखारी कहते हैं कि ट्रंप जंग नहीं चाहते हैं ये वादा करके चुनाव जीते थे. इराक और अफगानिस्तान के जंगों की सबक अभी ताजा है इसलिए जमीन पर सैनिक भेजना मुश्किल होगा.

इजरायल का असल मकसद क्या है?

कतर यूनिवर्सिटी के गल्फ स्टडीज सेंटर के डायरेक्टर महजूब ज्वेरी कहते हैं कि इजरायल ईरान को सबसे बड़ा दुश्मन मानता है. 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमले के बाद इजरायल पूरे मिडिल ईस्ट को नया आकार देना चाहता है. वे चाहते हैं कि कोई भी देश या ताकत इजरायल को चुनौती न दे सके.

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ट्रंप का असली एंडगेम क्या हो सकता है?

किंग्स कॉलेज लंदन के प्रोफेसर एंड्रियास क्रिग कहते हैं कि सबसे रियलिस्टिक रास्ता है जबरदस्ती सौदा करवाना. अमेरिका आईआरजीसी के कुछ नेताओं से समझौता कर सकता है अगर वे मिसाइलें कम करें, न्यूक्लियर प्रोग्राम रोकें और क्षेत्र में शांति बनाए रखें. मुस्तफा हाइदर सईद कहते हैं कि ट्रंप बहुत प्रैग्मेटिक हैं.

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वे किसी भी तरह विजय घोषित करके युद्ध खत्म करना चाहेंगे. जमीन पर युद्ध का मतलब उनके लिए घरेलू राजनीतिक नुकसान होगा. अभी हालात देखकर लगता है कि ट्रंप जल्द ही कोई नया सौदा करके मिशन पूरा का ऐलान कर सकते हैं लेकिन ईरान की मजबूती ने कई पुरानी गणनाएं गलत साबित कर दी हैं.

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