क्या ताइवान के लिए चीन से जंग लड़ेगा अमेरिका, जानिए कितना तैयार है?

अमेरिका चीन के साथ लंबे युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार नहीं है. लंबी दूरी की मिसाइलों, एयर डिफेंस सिस्टम और ड्रोन्स की भारी कमी है. ईरान युद्ध में गोला-बारूद खत्म होने से समस्या बढ़ गई है.

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चीन ने अमेरिका के सामने ताइवान पर सख्ती दिखाई है. (Photo: ITG) चीन ने अमेरिका के सामने ताइवान पर सख्ती दिखाई है. (Photo: ITG)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 14 मई 2026,
  • अपडेटेड 2:41 PM IST

क्या अमेरिका चीन के साथ लंबे समय तक चलने वाले युद्ध के लिए तैयार है? हाल के वर्षों में अमेरिका ने अपनी सेना को मजबूत करने की कोशिश की है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार अभी भी कई कमियां हैं. लंबी दूरी के मिसाइलों, एयर डिफेंस सिस्टम, इंटरसेप्टर और ड्रोन्स, पानी के अंदर और सतह वाले सिस्टम की कमी अमेरिका को परेशान कर रही है. ताइवान के लिए अगर चीन के साथ युद्ध हुआ तो अमेरिका को मुश्किल हो सकती है. साथ ही अगर मिडिल ईस्ट और इंडो-पैसिफिक में दो मोर्चों पर एक साथ लड़ना पड़ा तो स्थिति और भी खराब हो जाएगी.

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ईरान युद्ध ने बढ़ाई चिंता

जब अमेरिका ने ईरान के खिलाफ ऑपरेशन एपिक फ्यूरी चलाया तो हजारों मिसाइलें और ड्रोन दागे गए. पैट्रियट और THAAD जैसे एयर डिफेंस सिस्टम ने अच्छा प्रदर्शन किया. लेकिन इस युद्ध में अमेरिका के लंबी दूरी के मिसाइलों (टॉमहॉक, JASSM) और एयर डिफेंस इंटरसेप्टरों का बड़ा स्टॉक खत्म हो गया. 

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THAAD इंटरसेप्टरों का एक बड़ा हिस्सा इस्तेमाल हो चुका है. ईरान युद्ध से पहले भी अमेरिका के पास चीन के साथ लंबे युद्ध के लिए पर्याप्त गोला-बारूद नहीं था. ईरान युद्ध के बाद स्थिति और खराब हो गई है. कुछ मिसाइलें बनाने में 3 से 4 साल लग जाते हैं. इसलिए जल्दी भरपाई संभव नहीं है.

चीन की बढ़ती ताकत

चीन अपनी सेना को बहुत तेजी से मजबूत कर रहा है. चीन का रक्षा उद्योग युद्ध स्तर पर काम कर रहा है. वह बड़े पैमाने पर जहाज, हवाई जहाज, मिसाइलें और अन्य हथियार बना रहा है. चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) हर क्षेत्र - जमीन, हवा, समुद्र, स्पेस, साइबर और न्यूक्लियर में मजबूत हो रही है.

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अमेरिका और ताइवान के खिलाफ अगर युद्ध हुआ तो चीन पहले और दूसरे आइलैंड चेन में भारी हमला कर सकता है. अमेरिका के बेस (जापान, गुआम, फिलीपींस) चीन की मिसाइलों और ड्रोन से बहुत कमजोर हैं.

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हेलस्केप योजना क्या है?

अमेरिका इंडो-पैसिफिक कमांड ने हेलस्केप नामक योजना बनाई है. इसका मतलब है - ताइवान स्ट्रेट को दुश्मन के लिए नर्क बना देना. इसमें हजारों सस्ते ड्रोन, बिना चालक वाले सबमरीन (UUV), सतह वाले वाहन (USV) इस्तेमाल किए जाएंगे. 

ये ड्रोन खुफिया जानकारी इकट्ठा करेंगे, माइन्स बिछाएंगे, दुश्मन के जहाजों पर हमला करेंगे और चीन की सेना को ताइवान पहुंचने से रोकेंगे. इस योजना में सस्ते और महंगे दोनों तरह के सिस्टम की जरूरत है.

अमेरिका को क्या-क्या चाहिए?

चीन को रोकने या युद्ध जीतने के लिए अमेरिका को ये चीजें तेजी से बढ़ानी होंगी... 

  • पानी के अंदर क्षमता: वर्जिनिया क्लास परमाणु पनडुब्बियां और सस्ते UUV. पनडुब्बियां चीन के जहाजों को भारी नुकसान पहुंचा सकती हैं.
  • हवाई क्षमता: सैकड़ों हजार सस्ते ड्रोन (UAS) और F-35, B-21 जैसे स्टील्थ फाइटर और बॉम्बर. यूक्रेन युद्ध से पता चला है कि ड्रोन की बहुत बड़ी संख्या जरूरी है.
  • लंबी दूरी की मिसाइलें: LRASM, JASSM, टॉमहॉक जैसी मिसाइलों की भारी मात्रा.
  • एयर डिफेंस: पैट्रियट, THAAD और सस्ते एंटी-ड्रोन सिस्टम.
  • अन्य: स्पेस, साइबर, AI आधारित कमांड सिस्टम.

अभी अमेरिका के पास इनमें से कई चीजों की कमी है. ताइवान को हथियार देने में भी 3 लाख करोड़ रुपये का बैकलॉग है.

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क्या है समाधान?

अमेरिकी पेंटागन और कांग्रेस को तुरंत ये कदम उठाने चाहिए...

  • महत्वपूर्ण मिसाइलों के लिए मल्टी-ईयर कॉन्ट्रैक्ट.
  • जहाज और हवाई जहाजों की मरम्मत और तैयार रखना.
  • बेस को मजबूत बनाना - अंडरग्राउंड शेल्टर, एयर डिफेंस.
  • रक्षा उद्योग को युद्ध स्तर पर तैयार करना.
  • ताइवान को हथियार तेजी से देना.

अमेरिका चीन के साथ युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार नहीं है. ईरान युद्ध ने इस कमी को और उजागर कर दिया है. चीन तेजी से हथियार बना रहा है जबकि अमेरिका के गोला-बारूद के स्टॉक कम हो रहे हैं. अगर अमेरिका अब भी तेजी से उत्पादन नहीं बढ़ाता तो भविष्य में मुश्किल हो सकती है. 

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