पाकिस्तान की सियासत और वहां के सैन्य प्रतिष्ठान में एक बहुत बड़ा भूचाल आ गया है. जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (JUI-F) के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने पाकिस्तान सेना पर अब तक का सबसे तीखा और सनसनीखेज हमला बोला है. उन्होंने सार्वजनिक मंच से 1999 के कारगिल युद्ध को लेकर वो सच उगल दिया है जिसे पाकिस्तानी सेना दशकों से छिपाती आई है.
मौलाना फजलुर रहमान ने सीधे तौर पर पाकिस्तानी सेना को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि कारगिल की जंग में पाकिस्तान ने अपने ही मारे गए सैनिकों को पहचानने और उनके शव (जनाजे) लेने से साफ इनकार कर दिया था और उन्हें 'हिंदुओं' (भारत) के रहमोकरम पर छोड़ दिया था.
पाकिस्तानी नेता का यह बयान भारत के उस स्टैंड की पुष्टि करता है, जिसे भारत पिछले 27 सालों से दुनिया के सामने रखता आया है कि कारगिल में मारे गए पाकिस्तानी सैनिकों का अंतिम संस्कार भारतीय सेना ने पूरे इस्लामिक रीति-रिवाजों के साथ किया था क्योंकि पाकिस्तान उन्हें अपना मानने से इनकार कर दिया था.
'आपने अपने शहीदों को हिंदुओं के सुपुर्द किया'
पाकिस्तानी सेना पर तीखा हमला करते हुए मौलाना फजलुर रहमान ने तीखे लहजे में कहा, "मैं तुम्हें अच्छी तरह जानता हूं कि तुम्हारी नज़र में अपने ही शहीदों की क्या कद्र और कीमत है! क्या तुम आज तक बता पाए हो कि कारगिल में तुम्हारे कितने जवान मारे गए थे? और वहां से तुमने कितने शहीदों के जनाज़े वापस लिए? ज़रा मुल्क को बताओ तो सही. तुमने अपने ही जवानों के शवों को हिन्दुओं के सुपुर्द कर दिया... और फिर वहां (भारत) से बयान आया कि हमने उन्हें इस्लामी तरीके से दफ़न कर दिया है.'
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मौलाना यहीं नहीं रूके, उन्होंने आगे कहा, 'कारगिल में मरने वालों की तादाद सिर्फ़ कुछ नहीं, बल्कि असल में सैकड़ों में थी. तुम अपने शहीदों के जनाजे अपनाने के लिए तैयार नहीं थे. यहां तक कि 'कैप्टन कर्नल शेर खान' का जनाजा भी हमें हिंदुस्तान के इसरार (दबाव) के बाद मजबूरन लेना पड़ा था."
पाकिस्तानी सेना पर अपने ही देश में राजनीति करने और भ्रष्टाचार को छिपाने का आरोप लगाते हुए मौलाना फजलुर रहमान ने आगे कहा, 'अपने शहीदों की सबसे बड़ी तौहीन (अपमान) तुम लोगों (सैन्य जनरलों) ने खुद की है. और अब जब तुम चारों तरफ से घिर चुके हो, तो अपने जरायम (जुर्म) को छुपाने के लिए उन्हीं शहीदों के नाम की ओट में छुपने की कोशिश कर रहे हो...'
कारगिल का वो सच, जिससे कांपती है पाकिस्तानी फौज
आपको बता दें कि 1999 में जब जनरल परवेज मुशर्रफ की शह पर पाकिस्तानी सैनिकों ने घुसपैठियों के भेष में कारगिल की पहाड़ियों पर कब्जा किया था, तब भारतीय सेना के पराक्रम के आगे वे टिक नहीं पाए. भारत ने जब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सबूत दिखाए, तो फजीहत से बचने के लिए पाकिस्तान सरकार और उसकी सेना ने यह झूठ फैलाया कि कारगिल में उनके सैनिक नहीं बल्कि 'कश्मीरी मुजाहिदीन' लड़ रहे हैं.
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इसी झूठ के चक्कर में पाकिस्तानी सेना ने अपने सैकड़ों नियमित सैनिकों के शवों को लावारिस छोड़ दिया था, जिन्हें बाद में भारतीय सेना ने पूरे सम्मान के साथ इस्लामिक रीति-रिवाज से सुपुर्द-ए-खाक किया था. अब पाकिस्तान के भीतर से ही इस सच के बाहर आने के बाद सेना की फिर से पोल खुल गई है.