रूस से खरीदे गए चौथे S-400 एयर डिफेंस सिस्टम के पार्ट्स ले जा रहे जहाज इस हफ्ते भारत पहुंच रहे हैं. इंडिया टुडे को सूत्रों ने पुष्टि की है कि अप्रैल के आखिरी सप्ताह में रवाना हुए जहाज जल्द ही भारतीय बंदरगाह पहुंच जाएंगे. इसके साथ ही रूसी विदेश मंत्री दिल्ली का दौरा कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर से मुलाकात करेंगे.
चौथा S-400 सिस्टम पश्चिमी मोर्चे (पाकिस्तान बॉर्डर) पर तैनात किया जाएगा. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान S-400 ने अपनी क्षमता साबित की थी, इसलिए इसकी तैनाती पश्चिमी सीमा पर की जा रही है. भारत ने 2018 में रूस के साथ करीब 35,000 करोड़ रुपये का सौदा किया था, जिसमें 5 S-400 स्क्वॉड्रन खरीदने का समझौता हुआ था.
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अभी तक तीन स्क्वॉड्रन तैनात
भारत पहले ही तीन S-400 स्क्वॉड्रन मिल चुका है. उन्हें रणनीतिक रूप से तैनात किया गया है. पहला स्क्वॉड्रन सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा के लिए रखा गया है, जो भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को बाकी देश से जोड़ता है. दूसरा स्क्वॉड्रन पठानकोट क्षेत्र में तैनात है, जो जम्मू-कश्मीर और पंजाब की सुरक्षा करता है. तीसरा स्क्वॉड्रन पश्चिमी सीमा पर राजस्थान और गुजरात के महत्वपूर्ण इलाकों की रक्षा कर रहा है.
मार्च 2026 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) ने पांच अतिरिक्त S-400 सिस्टम खरीदने की मंजूरी दी थी. यह खरीद कुल 2.38 लाख करोड़ रुपये के बड़े पैकेज का हिस्सा है, जिसका मकसद भारतीय वायुसेना और थलसेना को मजबूत करना है. इन नई यूनिट्स से दुश्मन के विमानों, ड्रोनों और मिसाइलों को दूर से ही ट्रैक करके नष्ट करने की क्षमता बढ़ेगी.
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S-400 की ताकत
S-400 दुनिया के सबसे एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम में से एक है. हर स्क्वाड्रन में 16 वाहन शामिल होते हैं - लॉन्चर, रडार, कंट्रोल सेंटर और सपोर्ट वाहन. यह 600 किलोमीटर दूर तक हवाई खतरे को ट्रैक कर सकता है. 400 किलोमीटर दूर तक टारगेट को नष्ट करने में सक्षम है.
यह चार प्रकार की मिसाइलों से लैस है, जो दुश्मन के फाइटर जेट, बैलिस्टिक मिसाइल और छोटे ड्रोनों को भी मार गिरा सकता है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान S-400 ने पाकिस्तानी मिसाइलों को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.
S-400 की तैनाती भारत की वायु सुरक्षा को बहुत मजबूत करती है. खासकर चीन और पाकिस्तान की तरफ से आने वाले हवाई खतरे को देखते हुए यह सिस्टम बेहद उपयोगी साबित हो रहा है. रूस के साथ यह सौदा आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को भी सपोर्ट करता है, क्योंकि भारत धीरे-धीरे अपनी एयर डिफेंस क्षमता बढ़ा रहा है.
चौथे S-400 सिस्टम के आने और पांच नए सिस्टम की मंजूरी से भारत की रक्षा क्षमता में नई ताकत आएगी. रूस के साथ मजबूत संबंध और S-400 जैसी ए़डवांस तकनीक भारत को क्षेत्रीय चुनौतियों से निपटने में मदद करेगी.
शिवानी शर्मा