रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 19-20 अक्टूबर 2026 को ताजिकिस्तान के दुशांबे में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के शासनाध्यक्षों की परिषद की 25वीं बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे. यह बैठक सदस्य देशों के बीच बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने पर केंद्रित रहेगी.
व्यापार, अर्थव्यवस्था, निवेश, कनेक्टिविटी, इनोवेशन और सांस्कृतिक-मानवीय आदान-प्रदान जैसे क्षेत्रों पर विशेष जोर दिया जाएगा. साथ ही चल रही पहलों की प्रगति की समीक्षा और संगठन के वित्तीय तथा संस्थागत कामकाज से जुड़े फैसले भी लिए जा सकते हैं.
शंघाई सहयोग संगठन मध्य एशिया, दक्षिण एशिया और यूरेशिया के देशों को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मंच है. इसमें भारत, रूस, चीन, पाकिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान सहित कई देश शामिल हैं. शासनाध्यक्षों की बैठक आमतौर पर आर्थिक और व्यावहारिक सहयोग पर फोकस करती है.
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इस बार दुशांबे में होने वाली बैठक में सदस्य देश आपसी व्यापार बढ़ाने, निवेश के नए अवसर तलाशने और कनेक्टिविटी परियोजनाओं को आगे बढ़ाने पर चर्चा करेंगे. इनोवेशन और डिजिटल क्षेत्र भी एजेंडे में प्रमुख रहेंगे. भारत इन क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभाता रहा है.
पिछली बैठक नवंबर 2025 में मॉस्को में हुई थी, जिसमें विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने भारत का प्रतिनिधित्व किया था. इस बार रक्षामंत्री राजनाथ सिंह का जाना संगठन में भारत की व्यापक भागीदारी को दर्शाता है. सुरक्षा और आर्थिक सहयोग दोनों मोर्चों पर भारत की रुचि स्पष्ट है.
भारत की भूमिका और योगदान
भारत SCO के विभिन्न तंत्रों में सक्रिय रूप से जुड़ा हुआ है. स्टार्टअप और इनोवेशन, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर तथा लोगों के बीच आदान-प्रदान जैसी पहलों के जरिए भारत क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा दे रहा है. बैठक में भारत अन्य सदस्य देशों के साथ व्यावहारिक और पारस्परिक लाभकारी सहयोग बढ़ाने पर विचार विमर्श करेगा. कनेक्टिविटी परियोजनाएं, आर्थिक एकीकरण और सांस्कृतिक संबंध मजबूत करने के लिए भारत के सुझाव महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं.
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ताजिकिस्तान जैसी मध्य एशियाई देश के साथ भारत के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध भी इस दौरे को अतिरिक्त महत्व देते हैं. SCO मंच पर भारत क्षेत्रीय स्थिरता, आतंकवाद विरोधी सहयोग और सतत विकास जैसे मुद्दों पर अपना पक्ष रखता रहा है. राजनाथ सिंह की उपस्थिति सुरक्षा आयाम को भी बल देगी, भले ही बैठक मुख्य रूप से आर्थिक एजेंडे पर हो.
क्षेत्रीय सहयोग के लिए अवसर
यह बैठक उस समय हो रही है जब वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितताएं और भू-राजनीतिक चुनौतियां बनी हुई हैं. SCO सदस्य देशों के बीच आपसी निर्भरता बढ़ाने और बाहरी दबावों से निपटने का एक मंच उपलब्ध कराता है. भारत के लिए यह मौका है कि वह अपने डिजिटल अनुभव, स्टार्टअप इकोसिस्टम और इंफ्रास्ट्रक्चर विशेषज्ञता को साझा करे. साथ ही मध्य एशियाई देशों के साथ कनेक्टिविटी बढ़ाने के प्रयासों को आगे बढ़ाए.
समग्र रूप से राजनाथ सिंह का यह दौरा भारत की बहुपक्षीय कूटनीति और क्षेत्रीय सहयोग के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है. बैठक के नतीजे संगठन की कार्यप्रणाली को और प्रभावी बनाने में मददगार साबित हो सकते हैं.
शिवानी शर्मा