दुश्मनों पर तबाही मचाने को तैयार मेड इन इंडिया ग्लाइड बम खगांतक, 140 KM कर मारक क्षमता

भारतीय वायुसेना ने स्वदेशी लंबी दूरी के ग्लाइड बम खगांतक-243 का सफल परीक्षण किया. Su-30MKI से गिराया गया यह बम 140 किलोमीटर से ज्यादा दूर लक्ष्य भेद सकता है. आईएएफ की घातक क्षमता में इजाफा हुआ है.

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खगांतक-243 भारतीय वायु सेना का स्वदेशी ग्लाइड बम है. (Photo: X/IAF) खगांतक-243 भारतीय वायु सेना का स्वदेशी ग्लाइड बम है. (Photo: X/IAF)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 03 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 12:39 PM IST

भारतीय वायु सेना ने स्वदेशी डिजाइन और विकसित लंबे रेंज वाले ग्लाइड बम खगांतक-243 का सफल ड्रॉप टेस्ट पूरा किया. वायु सेना ने इसे आईएएफ और भारतीय उद्योग के लिए महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया. परीक्षण में सभी उद्देश्य पूरे हुए. यह बम JSR डायनामिक्स और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) ने बनाया गया है. 

नागपुर स्थित स्टार्टअप JSR डायनामिक्स ने बॉडी और कंट्रोल सिस्टम तैयार किए जबकि बीईएल ने इलेक्ट्रॉनिक्स और गाइडेंस सिस्टम दिए. खगांतक-243 करीब 300 किलोग्राम वजन का स्टैंड-ऑफ प्रेसिजन गाइडेड ग्लाइड बम है. इसमें 125 किलोग्राम का एमके-81 जनरल पर्पज ब्लास्ट-फ्रैगमेंटेशन वॉरहेड लगा है. इसमें सिलेंडर आकार का शरीर, मिड-बॉडी में स्विवल टाइप ग्लाइड विंग्स और पीछे पांच कंट्रोल सतहें हैं. 

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12 किलोमीटर की ऊंचाई से छोड़ने पर इसकी रेंज 140 किलोमीटर से ज्यादा है. कुछ रिपोर्ट्स में 144 से 180 किलोमीटर तक की बात कही गई है. यह ग्लाइड रेशियो 12 से अधिक रखता है. गाइडेंस सिस्टम में मिड-कोर्स के लिए आईएनएस और मल्टी-जीएनएसएस है. 

टर्मिनल गाइडेंस में आईएनएस+जीएनएसएस, पैसिव होमिंग या इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल/इन्फ्रारेड सीकर का विकल्प है. सटीकता बिना सीकर के 10 मीटर से कम और सीकर के साथ 5 मीटर से कम सीईपी बताई गई है.  

कैसे काम करता है ग्लाइड बम

सामान्य फ्री-फॉल बम छोड़ने के बाद सीधी गिरावट का रास्ता अपनाते हैं. लेकिन ग्लाइड बम एयरोडायनेमिक लिफ्ट का इस्तेमाल करके लक्ष्य की ओर उड़ता है. विमान दुश्मन के एयर डिफेंस जोन में गए बिना दूर से ही बम छोड़ सकता है. इससे पायलट और विमान दोनों सुरक्षित रहते हैं. खगांतक-243 को Su-30MKI से पहली बार टेस्ट किया गया. आगे मिग-29के और मिराज-2000 पर भी इंटीग्रेशन की योजना है.  

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यह परीक्षण आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया का बड़ा उदाहरण है. पहले लंबे रेंज के ग्लाइड बम आयात पर निर्भर थे. अब स्वदेशी विकल्प तैयार हो गया है. आईएएफ ने बीईएल को सीमित सीरीज का कॉन्ट्रैक्ट भी दे दिया है. खगांतक परिवार में और वेरिएंट जैसे 306, 225 आदि भी विकसित हो रहे हैं जो अलग-अलग रेंज और क्षमता देंगे. इससे आयात निर्भरता घटेगी और भारतीय उद्योग को बढ़ावा मिलेगा.  

आधुनिक युद्ध में स्टैंड-ऑफ हथियार बहुत जरूरी हो गए हैं. खगांतक-243 आईएएफ को दुश्मन के गहरे इलाकों में सटीक हमला करने की क्षमता देगा. ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियानों में इस्तेमाल होने वाले हथियारों की लाइन में यह नया जोड़ है. इससे वायुसेना की घातकता बढ़ेगी और भारतीय रक्षा क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर मजबूती मिलेगी. सफल परीक्षण के बाद अब उत्पादन और विभिन्न प्लेटफॉर्म पर इंटीग्रेशन का काम आगे बढ़ेगा.  

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