कैसे ईरान की जंग में कुवैत-इराक बॉर्डर धधक रहा है, पहले हुआ हवाई हमला और अब जमीनी जंग का खतरा

ईरान की जंग में कुवैत-इराक बॉर्डर पर तनाव बढ़ गया है. अल-अब्दाली क्रॉसिंग पर ड्रोन हमला हुआ, पहले हवाई हमले हुए और अब जमीनी संघर्ष का खतरा मंडरा रहा है.

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बाएं से- कुवैत-इराक बॉर्डर पर अल-अब्दाली क्रॉसिंग पर ईरान ने हमला किया. लॉन्च होती ईरानी मिसाइल. (Photo: AFP/Reuters) बाएं से- कुवैत-इराक बॉर्डर पर अल-अब्दाली क्रॉसिंग पर ईरान ने हमला किया. लॉन्च होती ईरानी मिसाइल. (Photo: AFP/Reuters)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली ,
  • 24 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 1:35 PM IST

ईरान और उसके विरोधी देशों के बीच चल रही 2026 की जंग अब पूरे खाड़ी क्षेत्र को अपनी चपेट में ले रही है. इस संघर्ष में पहले जो हवाई हमले और मिसाइल-ड्रोन हमले हो रहे थे, वे अब कुवैत और इराक की सीमा पर आग की तरह फैल रहे हैं. कुवैत-इराक बॉर्डर, जो पहले व्यापार और यात्रा का महत्वपूर्ण रास्ता था, अब युद्ध का नया मैदान बनता जा रहा है. 

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विशेषज्ञों का कहना है कि यह जंग सिर्फ ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच नहीं है, बल्कि पूरे क्षेत्र की स्थिरता को चुनौती दे रही है. अल-अब्दाली बॉर्डर क्रॉसिंग पर ड्रोन हमला हुआ है, जिसमें आग लग गई और भारी नुकसान हुआ, हालांकि जान-माल की हानि कम बताई गई. यह हमला ईरान की तरफ से जवाबी कार्रवाई माना जा रहा है.

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2026 की शुरुआत में ईरान पर अमेरिकी और इजरायली हमलों के बाद ईरान ने पूरे क्षेत्र में अपनी ताकत दिखानी शुरू कर दी. ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अमेरिकी ठिकानों वाले देशों को निशाना बनाया. कुवैत में अमेरिकी सैन्य अड्डे होने के कारण वह भी इस जंग में खींच लिया गया. 

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फरवरी-मार्च 2026 में ईरान ने कुवैत के हवाई अड्डे, अली अल सलेम एयर बेस और कैम्प ब्यूहरिंग जैसे ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए. इन हमलों में कुछ नागरिकों की मौत हुई और कई घायल हुए. कुवैत-इराक बॉर्डर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दोनों देशों के बीच मुख्य लैंड रूट है. इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया सक्रिय हैं, जो अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाते रहे हैं. 

हाल ही में शलामचे (ईरान-इराक बॉर्डर) पर हुए हमले को कुवैती क्षेत्र से लॉन्च माना गया, जिसके जवाब में ईरान ने कुवैत के अल-अब्दाली क्रॉसिंग पर हमला किया. धुआं उठता हुआ इलाका और आग की लपटें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं. कुवैत के रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की कि ड्रोन हमले से सामग्री नुकसान हुआ, लेकिन कोई मौत नहीं हुई. यह दूसरा हमला था, जो 24 घंटे के अंदर हुआ.

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हाल के अपडेट और घटनाएं

जुलाई 2026 के अंत में स्थिति और गंभीर हो गई है. कुवैत ने बताया कि उसने सुबह से 32 दुश्मन ड्रोन रोक लिए. ईरान ने कुवैत और बहरीन दोनों में हमले किए, जिनमें अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया गया. एक रिपोर्ट में ईरान ने दावा किया कि उसने कुवैत में ड्रोन और हेलीकॉप्टर हैंगर तथा टेलीकॉम टावर को नष्ट कर दिया. 

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अमेरिका की तरफ से ईरान पर हमले जारी हैं, लेकिन ईरान इसे क्षेत्रीय युद्ध में बदलने की कोशिश कर रहा है. इराक में भी ईरान समर्थित समूह सक्रिय हैं, जो कुवैत बॉर्डर के पास रॉकेट और ड्रोन हमले कर रहे हैं. अल-अब्दाली पर हमले के बाद कुवैत ने ईरान के राजदूत को तलब किया. व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हुई हैं, तेल टैंकरों पर खतरा बढ़ा है और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव है.

हवाई हमलों से जमीनी जंग तक का खतरा

पहले चरण में ईरान ने मुख्य रूप से ड्रोन और मिसाइलों से हवाई हमले किए. ये हमले सटीक थे. अमेरिकी बेस को नुकसान पहुंचाने वाले. अब स्थिति बदल रही है. इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया के जरिए जमीनी स्तर पर गतिविधियां बढ़ रही हैं. अगर ये मिलिशिया कुवैत बॉर्डर पार करके या बॉर्डर के पास जमीनी कार्रवाई करें, तो पूरा क्षेत्र जमीनी युद्ध में फंस सकता है. 

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कुवैत-इराक बॉर्डर का इलाका पहले से ही संवेदनशील है. 1990 के गल्फ वॉर की यादें अभी ताजा हैं, जब इराक ने कुवैत पर कब्जा करने की कोशिश की थी. अब ईरान की जंग इस बॉर्डर को नया मोर्चा बना रही है.

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विश्लेषकों का मानना है कि ईरान जानबूझकर जंग को फैला रहा है ताकि अमेरिका और उसके सहयोगी देशों पर दबाव बने. अगर जमीनी सैनिकों की आवाजाही बढ़ी या मिलिशिया ने घुसपैठ की, तो NATO या अमेरिकी जमीनी सेना शामिल हो सकती है, जिससे बड़ा युद्ध शुरू हो सकता है.

इस जंग का असर सिर्फ कुवैत और इराक तक सीमित नहीं है. सऊदी अरब, बहरीन, यूएई, जॉर्डन और कतर भी प्रभावित हुए हैं. तेल की कीमतें बढ़ रही हैं, व्यापार रुक रहा है. लाखों लोग विस्थापित हो सकते हैं. संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने चिंता जताई है कि सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे पावर प्लांट और डिसेलिनेशन प्लांट निशाने पर हैं. 

कुवैत जैसे छोटे लेकिन अमीर देश अब खुद को बचाने के लिए अमेरिका पर निर्भर हैं, लेकिन ईरान के हमलों से उनकी सुरक्षा व्यवस्था चुनौतीपूर्ण हो गई है. इराक में ईरानी प्रभाव मजबूत है, इसलिए बॉर्डर पर नियंत्रण मुश्किल है. अगर जमीनी जंग शुरू हुई तो शरणार्थी संकट, आर्थिक नुकसान और मानवीय संकट गहरा सकता है.

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भविष्य की संभावनाएं और चुनौतियां

विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अगर तुरंत कूटनीतिक कोशिशें नहीं हुईं तो हवाई हमले जमीनी संघर्ष में बदल सकते हैं. ट्रंप प्रशासन ने भारी हमलों की धमकी दी है, जबकि ईरान बातचीत रोकने की बात कर रहा है. कुवैत-इराक बॉर्डर पर अंतरराष्ट्रीय निगरानी बढ़ाने की जरूरत है. 

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इस जंग ने दिखा दिया कि आधुनिक युद्ध कितनी तेजी से फैल सकता है. ड्रोन और मिसाइलों ने पारंपरिक सीमाओं को बेमानी कर दिया है. अब सवाल यह है कि दुनिया इस बढ़ावे को कैसे रोकती है. कुवैत और इराक जैसे देश शांति चाहते हैं, लेकिन बड़े शक्तियों की जंग उन्हें भी तबाह कर सकती है.

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