अरुणाचल के नक्शे पर चीन बौखलाया, जानिए क्या बोल रहे एक्सपर्ट

भारत ने अरुणाचल के 27 स्थानों के नाम नक्शे में जोड़े, इससे चीन बौखला गया है. जांगनान यानी अरुणाचल प्रदेश में एकतरफा कदम बताकर आलोचना कर रहा है.

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अरुणाचल प्रदेश के तवांग जिले का दिरांग गांव. (Photo: Getty) अरुणाचल प्रदेश के तवांग जिले का दिरांग गांव. (Photo: Getty)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 10 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 7:14 PM IST

चीन और भारत के बीच सीमा विवाद लंबे समय से चला आ रहा है. हाल ही में भारत ने अपने आधिकारिक नक्शे में अरुणाचल प्रदेश के 27 स्थानों के नाम शामिल किए हैं. चीन इसे अपने जांगनान क्षेत्र में एकतरफा कार्रवाई बताते हुए इसकी आलोचना कर रहा है. चीनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम धोखा है और दोनों देशों के बीच सुधरते संबंधों के विपरीत है.  

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भारत सरकार ने शुक्रवार को सर्वे ऑफ इंडिया के अपडेटेड नक्शे में चार पहाड़ी दर्रे और एक ऊंचाई वाली झील समेत 27 स्थानों के नाम शामिल किए. भारत का कहना है कि इससे इन जगहों की सही पहचान सुनिश्चित होगी और उनकी भौगोलिक व ऐतिहासिक अहमियत के बारे में लोगों में जागरूकता बढ़ेगी. यह कदम सीमा मामलों पर दोनों देशों के बीच 6 अगस्त को नई दिल्ली में हुई 36वीं बैठक के कुछ दिन बाद लिया गया.

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चीनी विशेषज्ञों ने इस कार्रवाई की आलोचना की है. उनका कहना है कि जब दोनों देशों के संबंध सुधार की दिशा में बढ़ रहे हैं, तब भारत का एकतरफा कदम सीमा मुद्दे को और जटिल बना सकता है. वे इसे धोखा बता रहे हैं क्योंकि नाम बदलने या नक्शे पर लिखने से क्षेत्र की कानूनी स्थिति नहीं बदलती.

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चीन का स्थाई रुख

चीन का रुख साफ है कि जांगनान क्षेत्र (जिसे भारत अरुणाचल प्रदेश कहता है) प्राचीन काल से उसका हिस्सा है. यह शिज्यांग (तिब्बत) का हिस्सा है. 2017 से चीन ने इस क्षेत्र के 112 स्थानों के मानक नाम जारी किए हैं. चीन मैकमोहन रेखा को अवैध मानता है और अरुणाचल प्रदेश को मान्यता नहीं देता.

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने पहले भी कहा था कि इन स्थानों के नाम जारी करना चीन का संप्रभु अधिकार है. विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का ताजा कदम अपनी दावेदारी मजबूत करने की कोशिश है, लेकिन इससे बातचीत का माहौल खराब हो सकता है.

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हाल के महीनों में दोनों देशों ने संबंध सुधारने की कोशिशें जारी रखी हैं. दिसंबर 2024 में सीमा मामलों पर छह सूत्रीय सहमति बनी थी. पिछले सप्ताह नाथू ला पास छह साल बाद फिर से खोला गया, जिससे व्यापार बढ़ने की उम्मीद है. जुलाई में दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की मुलाकात भी हुई थी. नेताओं ने कहा था कि दोनों देश भागीदार हैं, प्रतिद्वंद्वी नहीं.

ऐसे में चीनी विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि एकतरफा कार्रवाई से यह सकारात्मक माहौल प्रभावित हो सकता है. वे कहते हैं कि सीमा विवाद का हल समान बातचीत और ऐतिहासिक-कानूनी आधार पर ही निकाला जा सकता है. 

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क्या यह रिश्तों के लिए बाधा बनेगा?

भारत और चीन के बीच सीमा विवाद जटिल है. दोनों देश अपने-अपने नक्शों और नामों के जरिए दावेदारी जताते रहते हैं. भारत इसे अपने क्षेत्र की पहचान बताता है, जबकि चीन इसे संप्रभुता का उल्लंघन मानता है. विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे कदमों से तनाव बढ़ सकता है, लेकिन दोनों पक्ष अभी भी बातचीत के रास्ते खुले रखना चाहते हैं.

वर्तमान में संबंध स्थिर हैं, लेकिन विश्वास बनाए रखना दोनों के हित में है. एकतरफा कार्रवाई से बातचीत मुश्किल हो सकती है. लंबे समय में शांति और स्थिरता के लिए संयम और संवाद जरूरी है. 

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