मिडिल ईस्ट में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है. यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मोखा बंदरगाह पर कब्जा कर लिया है. यह कब्जा स्ट्रेट ऑफ बाब अल-मंदेब के नजदीक स्थित है जो लाल सागर से गुजरने वाले वैश्विक शिपिंग मार्ग का महत्वपूर्ण हिस्सा है. Photo: AFP
इससे सऊदी अरब के तेल निर्यात और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर सीधा खतरा पैदा हो गया है. तेल की कीमतें तेजी से बढ़ गईं. सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से दो बार फोन पर बात की और सीधे सैन्य हमले की मांग की. लेकिन ट्रंप ने इनकार कर दिया. Photo: AP
अब सऊदी अरब अपनी शक्तिशाली वायुसेना के साथ खुद हवाई अभियान चलाने की तैयारी कर रहा है. यह घटनाक्रम यमन संघर्ष को नए सिरे से भड़का रहा है. हूतियों ने पिछले कुछ दिनों में तेजी से आगे बढ़ते हुए सऊदी समर्थित यमनी बलों को पीछे धकेल दिया. मोखा पोर्ट के अलावा आसपास के क्षेत्रों और द्वीपों पर भी उनका नियंत्रण बढ़ रहा है. Photo: Getty
स्ट्रेट ऑफ बाब अल-मंदेब विश्व के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक है. यहां से एशिया और यूरोप के बीच बड़ी मात्रा में माल और तेल गुजरता है. हूतियों के नियंत्रण से जहाजों पर हमलों का खतरा बढ़ गया है. इससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो सकती है. Photo: AFP
क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने गुरुवार को दो बार ट्रंप से संपर्क किया. पहली बार स्थिति की जानकारी दी और दूसरी बार सीधे अमेरिकी हमलों की अपील की. ट्रंप प्रशासन ने साफ कहा कि अमेरिका सीधे सैन्य कार्रवाई नहीं करेगा. इसके बजाय खुफिया जानकारी और लक्ष्य निर्धारण संबंधी सहायता दी जाएगी. Photo: AFP
सऊदी अरब में करीब दो सौ अमेरिकी सैन्य कर्मी पहले से गैर-लड़ाकू सहायता दे रहे हैं. अमेरिका का फोकस ईरान और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर बना हुआ है. नया मोर्चा खोलने से बचना चाहता है. सऊदी अरब के पास मजबूत वायुसेना है. इसमें एफ-15 लड़ाकू विमान और यूरोफाइटर टाइफून शामिल हैं. रियाद ने संकेत दिए हैं कि वह अपने बल पर प्रमुख हवाई अभियान चला सकता है. Photo: Getty
पहले भी सऊदी गठबंधन ने यमन में हवाई हमले किए हैं. लेकिन विश्लेषक सवाल उठा रहे हैं कि क्या अकेले हवाई हमले हूतियों जैसी लचीली और भूमि आधारित ताकत को पूरी तरह रोक पाएंगे. हूती पहले भी सऊदी हमलों का सामना कर चुके हैं और उन्होंने अपनी क्षमता बनाए रखी है. Photo: AFP
लाल सागर मार्ग पर खतरे से तेल कीमतों में उछाल आया. ब्रेंट क्रूड जैसी वैश्विक बेंचमार्क कीमतें बढ़ गईं. सऊदी अरब अपने तेल निर्यात का बड़ा हिस्सा लाल सागर के रास्ते करता है खासकर जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव हो. हूतियों के हमले से टैंकरों को नुकसान पहुंचने का डर है. इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार अस्थिर हो सकता है. Photo: Getty
शिपिंग कंपनियां वैकल्पिक मार्ग अपना सकती हैं जो महंगे और लंबे होंगे. इससे महंगाई और आपूर्ति संकट बढ़ सकता है. यमन संघर्ष लंबे समय से चला आ रहा है. सऊदी अरब और उसके सहयोगी हूतियों को कमजोर करने की कोशिश करते रहे हैं लेकिन पूरी सफलता नहीं मिली. Photo: AFP
हूती ईरान से समर्थन पाते हैं और मिसाइल तथा ड्रोन हमले करने में सक्षम हैं. उन्होंने सऊदी शहरों और ऊर्जा सुविधाओं पर भी हमले किए हैं. अब मोखा पर कब्जे से उनकी स्थिति और मजबूत हो गई है. Photo: AP
रियाद के पास कुछ विकल्प हैं. वह बड़े पैमाने पर हवाई हमले कर सकता है. साथ ही यमनी सहयोगी बलों को जमीनी समर्थन दे सकता है. लेकिन पिछले अनुभव बताते हैं कि हवाई अभियान अकेले पर्याप्त नहीं होते. हूती पहाड़ी इलाकों और शहरी क्षेत्रों में छिपकर लड़ते हैं. Photo: Getty
नागरिक हताहत होने का खतरा भी रहता है जो अंतरराष्ट्रीय आलोचना बढ़ा सकता है. अमेरिका की सीमित सहायता से खुफिया जानकारी मिलेगी लेकिन सीधे हमले नहीं होंगे. विश्लेषकों का कहना है कि सऊदी को क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर काम करना होगा. संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है. Photo: AP
दीर्घकालिक समाधान के लिए राजनीतिक बातचीत भी जरूरी है लेकिन फिलहाल सैन्य तनाव हावी है. सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था तेल पर निर्भर है इसलिए शिपिंग मार्ग सुरक्षित रखना उसकी प्राथमिकता है. सऊदी अगर बड़े हवाई अभियान की शुरुआत करता है तो हूती जवाबी हमले कर सकते हैं. Photo: Getty
इसमें सऊदी क्षेत्र पर मिसाइल हमले शामिल हो सकते हैं. क्षेत्रीय युद्ध का खतरा बढ़ जाएगा. अमेरिका और अन्य देश स्थिति पर नजर रखे हुए हैं. तेल बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है. यमन के नागरिक पहले से युद्ध की विभीषिका झेल रहे हैं. नई लड़ाई से विस्थापन और मानवीय संकट गहराएगा. Photo: Getty