अगर आप रेलवे स्टेशन के टिकट काउंटर से ट्रेन का टिकट खरीदते हैं, तो आपके लिए बीमा कवर से जुड़ी यह खबर अहम है. सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे को निर्देश दिया है कि 27 अक्टूबर तक काउंटर से खरीदे जाने वाले टिकटों पर भी बीमा की सुविधा लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं. फिलहाल ऑनलाइन टिकट बुक करने वाले यात्रियों को मामूली अतिरिक्त रकम देकर बीमा लेने का विकल्प मिलता है, लेकिन काउंटर से टिकट खरीदने वालों के लिए ऐसी व्यवस्था नहीं है.
सुप्रीम कोर्ट ने 6 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान ऑनलाइन और काउंटर टिकट के बीच इस अंतर पर सवाल उठाए. जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने कहा कि ऑनलाइन टिकट बुक करते समय यात्री को थोड़ी अतिरिक्त रकम देकर बीमा लेने का विकल्प मिलता है, जबकि रेलवे स्टेशन के काउंटर से टिकट खरीदने वालों को यह सुविधा नहीं मिलती.
अदालत ने कहा कि काउंटर से टिकट खरीदकर यात्रा करने वाले यात्रियों में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है, जिनके लिए यह सुविधा महत्वपूर्ण हो सकती है. रेलवे को इस व्यवस्था को लागू करने के लिए पर्याप्त समय दिया गया था, लेकिन अब तक ठोस प्रगति नहीं हुई. इसी के बाद अदालत ने 27 अक्टूबर तक व्यवस्था लागू करने की दिशा में कदम उठाने को कहा.
रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान अदालत ने रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था पर भी नाराजगी जताई. पीठ ने कहा कि रेलवे की ओर से सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने के दावे किए जाते रहे हैं, लेकिन इन दावों के अनुरूप जमीन पर पर्याप्त बदलाव नजर नहीं आ रहे. अदालत ने सुरक्षा से जुड़े कामों के लिए तय बजट का पूरा इस्तेमाल नहीं होने का मुद्दा भी उठाया. साथ ही रेलवे ट्रैक के किनारे बाड़ लगाने के लक्ष्य में हर साल करीब एक-तिहाई की कमी का जिक्र किया. पीठ ने रेलवे से पूछा कि जब सुरक्षा के लिए योजनाएं बनाई जाती हैं, तो उन्हें तय लक्ष्य के मुताबिक पूरा क्यों नहीं किया जा रहा.
रेलवे बोर्ड के अधिकारियों से मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष और सदस्यों को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया था. अदालत ने कहा कि अधिकारियों को यह बताने के लिए तैयार रहना चाहिए कि रेलवे ट्रैक की फेंसिंग के लक्ष्य को पूरा करने में लगातार कमी क्यों रह रही है. हालांकि, आदेश लिखवाए जाने के बाद केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल विक्रमजीत बनर्जी ने अदालत से एक आखिरी मौका देने की गुजारिश की. उन्होंने पिछले साल हुए काम, फेंसिंग का लक्ष्य पूरा नहीं होने के कारणों और आगे की योजना के बारे में हलफनामा दाखिल करने की पेशकश की. केंद्र की इस गुजारिश के बाद रेलवे बोर्ड के अधिकारियों की व्यक्तिगत पेशी के निर्देश पर फिलहाल रोक लगा दी गई.
यात्रियों के लिए इसका क्या मतलब है?
अगर रेलवे तय समयसीमा के भीतर व्यवस्था लागू करता है, तो रेलवे स्टेशन के काउंटर से टिकट खरीदने वाले यात्रियों को भी बीमा लेने की सुविधा मिल सकती है. अभी ऑनलाइन टिकट बुकिंग के दौरान मामूली अतिरिक्त रकम देकर यह विकल्प मिलता है. हालांकि, बीमा की शर्तें, कवरेज और काउंटर टिकट पर सुविधा लागू करने की अंतिम व्यवस्था रेलवे की ओर से स्पष्ट की जानी होगी. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 16 नवंबर को होगी. रेलवे को हलफनामे के जरिए अब तक किए गए काम और आगे की योजना का ब्योरा देना होगा. अदालत यह भी देखेगी कि सुरक्षा से जुड़े निर्देशों पर जमीन पर कितनी प्रगति हुई है.
आजतक बिजनेस डेस्क